झूठे केस में फंसाने की धमकी से आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मामला:

फरार आरोपी दिलेर खां उर्फ छोटू खां को 7 साल का साधारण कारावास

सोजत । झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर एक बुजुर्ग को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के चर्चित मामले में न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए फरार आरोपी दिलेर खां को दोषी करार दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री दिनेश कुमार गढ़वाल ने आज दिनांक 06 फरवरी 2026 को ट्रायल पूर्ण होने के पश्चात आरोपी दिलेर खां को 7 वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई।

उल्लेखनीय है कि यह प्रकरण वर्ष 2019 का है। सोजत निवासी रामचंद्र माली को आरोपियों द्वारा मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया था।

अपर लोक अभियोजक पंकज त्रिवेदी न बताया कि ममता तथा उसके साथी दिलेर खां उर्फ छोटू खां एवं अन्य ने रामचंद्र से दो लाख रुपये की अवैध मांग की थी। मांग पूरी नहीं होने पर उसे झूठे बलात्कार व लज्जा भंग के मामले में फंसाने की धमकी दी गई तथा उसके साथ मारपीट भी की गई। निरंतर मानसिक दबाव और प्रताड़ना से आहत होकर रामचंद्र ने 12 मार्च 2019 को आत्महत्या कर ली।

अगली सुबह मृतक के पौते राकेश ने पुलिस को आत्महत्या की सूचना दी, जिस पर पुलिस ने प्रकरण संख्या 87/2019 दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 341, 323, 327, 384, 451 एवं 306 के तहत चालान पेश किया गया। प्रकरण में गवाहों के बयान और प्रस्तुत साक्ष्यों से यह प्रमाणित हुआ कि आरोपियों ने मृतक रामचंद्र को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया था, जिसके चलते उसने आत्महत्या जैसा कदम उठाया।
पूर्व में इस मामले में आरोपी ममता पत्नी दिलेर खां को न्यायालय द्वारा दोषी ठहराते हुए 7 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है और न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि इस प्रकार के कृत्य समाज के लिए घातक हैं तथा ऐसे मामलों में सख्त सजा आवश्यक है ताकि समाज में गलत संदेश न जाए।

मुख्य आरोपी दिलेर खां उर्फ छोटू खां फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी के पश्चात उसके विरुद्ध बाद ट्रायल चलाया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर मामले को मजबूती से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। न्यायालय ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों का गहन मूल्यांकन करने के बाद आरोपी दिलेर खां उर्फ छोटू खां को दोषी मानते हुए 7 वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई।

प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक श्री पंकज त्रिवेदी ने प्रभावी पैरवी की। न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देकर किसी व्यक्ति को मानसिक रूप से तोड़ना एक गंभीर अपराध है और ऐसे कृत्य समाज में भय और अराजकता फैलाते हैं, इसलिए ऐसे अपराधियों के प्रति कठोर दृष्टिकोण अपनाया जाना आवश्यक है।

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