एस.एम. चर्च एवं कुड़ी स्थित आराधनालय का स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया

महाराजा उम्मेद सिंह जी ने 11-1-1927 में अपने कर कमलों से चर्च का उद्घाटन किया।

जोधपुर। एस.एम. चर्च का 97 वां एवं बासनी स्थित आराधनालय का 21वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया।

चर्च के फादर रेव्ह. क्रूस लॉयल ने कमेटी के सदस्यों के साथ मिलकर विशेष आयोजन किया। इस विशेष अवसर पर अजमेर से माननीय बिशप रेव्ह. रेमसन विक्टर साहब जोधपुर पधारे। जोधपुर आगमन पर चर्च की पास्ट्रेट कमेटी, डबल्यू एफ सी एस, सी वाई एफ, संडे स्कूल कमेटी, चर्च क्वायर तथा सेंट एंड्रयूज हाल कमेटी के द्वारा बिशप साहब का भव्य स्वागत किया गया। चर्च क्वायर ने सुंदर सुंदर धार्मिक गीत प्रस्तुत किये। इस अवसर पर रेव्ह. प्रणोय कुमार, रेव्ह. पैट्रिक केरल जोसेफ, रेव्ह. मनीष राव भी उपस्थित थे।

स्थापना दिवस पर सुबह 10:00 बजे आराधनालय कुड़ी में तथा सायं 6:00 बजे एस.एम. चर्च में प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। बिशप रेव्ह. रेमसन विक्टर साहब ने चर्च में उपस्थित जनसमूह को चर्च के स्थापना दिवस की बधाइयां दी। रेव्ह. क्रूस लॉयल ने प्रार्थना द्वारा धन्यवाद की आराधना शुरू की। बिशप साहब ने चर्च की नींव रखने से लेकर अभी तक 23 वर्ष होने पर समय के संबंध पर व्याख्यान दिया उन्होंने बताया कि किसी भी बड़े कार्य को मूर्त रूप देने में बहुत समय लगता है बड़ी-बड़ी योजनाएं बनानी पड़ती हैं, ढेर सारे धन की आवश्यकता होती है, सकारात्मक विचारधारा रखनी पड़ती है समाज के सभी लोगों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखनी पड़ती है। ईश्वर का भवन रातों-रात बनकर तैयार नहीं होता ईश्वर की योजना के बिना कोई भी कार्य संभव नहीं अनेकों लोगों ने रात दिन ईश्वर से प्रार्थना की होगी निर्माण के दौरान तरह-तरह की मुश्किलों का सामना किया होगा। उन्होंने बताया कि आज के जीवन में मनुष्य में धैर्य की कमी पाई जाती है हर चीज हमें इंस्टेंट चाहिए किसी भी वांछित वस्तु को जल्दी प्राप्त करने के चक्कर में हमें तरह-तरह के समझौते करने पडते हैं दुनिया के आकर्षण बहुदा हमें गलत रहा पर ले जाते हैं। हमें विषमताओं के दौर में धैर्य की आवश्यकता होती है।
धीरज धरने की शक्ति हमें ईश्वर प्रदान करता है प्रभु यीशु ने हमें धीरज रखना सिखाया है। इस भवन के निर्माण में अनेक लोगों का योगदान रहा है। जिनकी विशिष्ट सेवाएं अथक परिश्रम लगन तथा त्याग पूर्ण समयदान के कारण यह संभव हो सका। उन्हीं लोगों की मेहनत लगन तथा प्रार्थनाओं के फल स्वरुप यह चर्च बनकर तैयार हुआ है। जब यह चर्च बनकर तैयार हो गया और लोग इसमें प्रार्थनाएं करने लगे तो देखते ही देखते 21 वर्ष कब निकल गए पता ही नहीं चला इस चर्च के द्वारा ईश्वर ने लोगों को ढेरों आशीषें प्रदान की है। नवीन पॉल तथा संजीव बहादुर ने जानकारी साझा करते हुए बताया की आज ही के दिन पाली चर्च का भी स्थापना दिवस है। एस.एम. चर्च जोधपुर का प्राचीन एवं ऐतिहासिक भव्य गिरजाघर है।
उन्होंने बताया कि इस चर्च की स्थापना 97 वर्ष पूर्व हुई थी।

चर्च सेक्रेटरी श्री डैनिस एलिकजेंडर ने चर्च के इतिहास की जानकारी दी उन्होंने बताया कि मसीही समाज राज परिवार के प्रति सदा कृतज्ञ रहेगा।
तत्कालीन महाराजा उम्मेद सिंह जी ने 1924 में चर्च हेतु भूमि उपलब्ध करवाई थी, तथा निर्माण हेतु भी सहायता प्रदान की। लेफ्टिनेंट कर्नल टेम्परले ने मानचित्र बनाया था, डॉ. ड्रमंड ने चर्च की नींव रखी थी। चर्च 1927 में बनकर तैयार हुआ। महाराजा उम्मेद सिंह जी ने 11-1-1927 में अपने कर कमलों से चर्च का उद्घाटन किया। डॉ. चार्ल्स ने इस नए भवन को स्व. डॉ. समरवेल साहब को समर्पित किया। इस तरह समरविल मेमोरियल चर्च अस्तित्व में आया। इसी प्रकार कुड़ी में स्थित आराधनालय के इतिहास के बारे में बताया कि जैसे-जैसे जोधपुर का विस्तार होता गया लोग दूर-दूर बसने लगे, अत: लोगों को चर्च तक आने में असुविधा होने लगी। लोगों की इस परेशानी को देखते हुए तत्कालीन पादरी रेव्ह. ई.एन. हाबिल साहब ने इस समस्या के हल हेतु कुड़ी में चर्च बनाने का सपना देखा तथा उसे पूरा करने में जुट गए सन् 1997 में चर्च हेतु जमीन खरीदी गई। 11 जनवरी 2001 में इस सुंदर प्रार्थना भवन को बनाने हेतु रेव्ह. ई.एन.हाबिल साहब ने आधारशिला रखी 3 वर्ष में यह प्रार्थना भवन बनकर तैयार हुआ।
11-1-2003 में तत्कालीन बिशप रेव्ह. कौलिन सी. थियोडोर ने इस भवन का उद्घाटन किया। आराधना के पश्चात उपस्थित सभी लोगों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर स्थापना दिवस की बधाइयां दी। इसके पश्चात रात्रि भोज का आयोजन किया गया था जहां उपस्थित समाज के लोगों ने कार्यक्रम में पधारे मेहमानों के साथ प्रेम पूर्वक भोजन का आनंद लिया।

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