प्रदेश में राजस्व न्यायिक सेवा के गठन की मांग

जोधपुर। बार कौंसिल ऑफ राजस्थान के अध्यक्ष सैयद शाहिद हसन एवं पूर्व अध्यक्ष सुशील कुमार शर्मा के संयुक्त शिष्टमंडल ने राजस्व मंत्री हरीश चौधरी से मिलकर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में बार कौंसिल ऑफ राजस्थान ने कहा है कि प्रदेश में राजस्व न्यायिक सेवा की गठन कर उसमें अधिवक्ताओं का चयन कर पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया जाए। साथ ही राजस्व न्यायालयों में भी अधिवक्ताओं को नियुक्त किया जाए। राजस्व बोर्ड में लगे हुए अधिकारियों को हटाकर उन्हें प्रशासनिक कार्य में लगाकर उनकी जगह न्यायिक अधिकारियों एवं अधिवक्ताओं को चयनित करने की मांग की गई है। ताकि किसानों की जमीन से जुड़े विवादों का समय पर उचित समाधान हो सके।
बार कौंसिल ऑफ राजस्थान के अध्यक्ष सैयद शाहिद हसन ने राजस्व मंत्री को बताया कि वर्तमान में प्रदेश मे किसानों की जमीनों से जुड़े पांच लाख से अधिक मामलों की सुनवाई के लिए 474 राजस्व अदालतें है। राजस्व मंडल में न्यायिक व वकील कोटे के चार सदस्यों को छोडक़र प्रदेश की राजस्व न्यायालयों में ऐसे अधिकारी नियुक्त हैं जिनके पास कानून की डिग्री ही नहीं हैं। पूरा राजस्व न्यायिक तंत्र न्यायिक अधिकारियों की बजाए आरएएस एवं आईएएस अधिकारियों के हाथों में हैं। राजस्व न्यायिक तंत्र में किसान की जमीन से जुड़े मामले की सुनवाई उपखंड अधिकारी व सहायक कलेक्टर कोर्ट से होती है और सर्वोच्च अदालत राजस्व मंडल राजस्थान है। किसान की जमीन से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली पहली से लेकर अंतिम कड़ी कानूनी ज्ञान की कसौटी पर बहुत कमजोर है।
राजस्व मंडल के सदस्यों व राजस्व अपील प्राधिकरण को छोड़ शेष उपखंड अधिकारी, कलेक्टर व संभागीय आयुक्त के पास प्रशासनिक कार्य बहुत अधिक होते है। ऐसे में किसानों की जमीन से जुड़े मामलों को प्राथमिकता नहीं मिल पाती। कानून के जानकारी नहीं होने के कारण अधिकांश अधिकारी फैसले लिखवाने के लिए बाबू या रीडर के भरोसे रहते है। यह राजस्व न्यायिक तंत्र में भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा कारण है। गरीब किसान इस भ्रष्टाचार का शिकार बनता है।
उन्होंने मंत्री को उदाहरण देकर बताया कि वर्तमान में अधीनस्थ राजस्व अदालतों में 1.09 लाख मामले पांच वर्ष पुराने है। वहीं 32 हजार 458 मामले दस साल या उससे अधिक पुराने है। उपखंड अधिकारी की अदालत में 72 हजार से अधिक मामले पांच साल से अधिक पुराने है। जबकि 22 हजार मामलों की सुनवाई दस साल से अधिक समय से चल रही है। ऐसे में प्रदेश में प्राथमिकता के आधार पर राजस्व न्यायिक सेवा का गठन किया जाए।

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Gulam Mohammed

(EDITOR SEVA BHARATI NEWS) ==> Seva Bharti News Paper Approved Journalist, Directorate of Information and Public Relations, Rajasthan, Jaipur (Raj.), Mobile 7014161119 More »

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