मन की आंखो से लिखी जाती है कहानियां: डॉ ओमप्रकाश भाटिया

जोधपुर। चनणी फाउंडेशन और राजस्थान साहित्य अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आज आयोजित लेखक से मिलिये कार्यक्रम में जैसलमेर के प्रसिद्ध कथाकार डॉ. ओमप्रकाश भाटिया ने कहा कि कहानियाँ कहीं न कहीं अघटित यथार्थ को ही मन की आंखो से दृश्यगत की गई होती है। और वही कहानियां पाठक के हृदय को सीधे संप्रेषित होती है। कहानियों का निर्माण स्वानुभूति, सहानूभूति और संवेदनशीलता से मिलकर होता है। लेखक संस्कारित होकर आगे बढता है और डूब कर लिखने वाला ही तैरता है।

कहानी के इतिहास पर चर्चा करते हुए लेखक ने कहा कि आधुनिक काल में बाजारवाद, पूंजीवाद, साम्यवाद का असर साहित्य पर, कहानी लेखन पर भी भरपूर पड़ा है। लेखक डॉ. ओमप्रकाश भाटिया ने अपने आप को रेगिस्तान का लेखक बताते हुए कहा कि उनके लेखन पर रेगिस्तान का, परिवेश का भरपूर प्रभाव है और ये अमूमन हर लेखक पर होता ही है।
वरिष्ठ रचनाकार सत्यदेव संवितेन्द्र के इस प्रश्न पर कि क्या आप मानते है, साहित्य समाज का दर्पण होता है? को नकारते हुए ओमप्रकाश भाटिया ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण माना जाता है लेकिन असल में होता नहीं है। समाज में बदलाव होता रहता है लेकिन दर्पण एक असंवेदनशील चीज है। और साहित्य संवेदनशील होता है। मूल्यों का ह्वास, अवसाद आदि बाजारवाद के कारण हो रहा है और उससे हमें साहित्य उबार सकता है। कहानियां यथार्थ की जमीन पर उपजी हुई होती है। और वर्तमान परिस्थितियों में कहानी का भविष्य उज्जवल है।
लेखक से मिलिये कार्यक्रम के अन्तर्गत डॉ ओमप्रकाश भाटिया से सार्थक संवाद सत्यदेव संवितेन्द्र ने किया और चुटीली बातों संग उनके रचनात्मकता और सृजन यात्रा पर विस्तृत बातचीत की। सूर्यनगरी के साहित्यिक मनीषियों की गरिमामय उपस्थिति और लेखक से प्रश्नोत्तर के संवाद कार्यक्रम से आयोजन में भरपूर आंनद आया, और जोधपुर के साहित्यिक आयोजनों की कड़ी में चनणी फाउंडेशन का ये कार्यक्रम मील का पत्थर बन कर उभरा।
कार्यक्रम में मीठेश निर्माेही, डॉ आईदान सिंह भाटी, कमलेश तिवारी, पद्मजा शर्मा, दीपा परिहार, डॉ फतेहसिंह भाटी, सरला सोनी, डॉ वीणा चूंडावत, शशी चौधरी, बसंती पंवार, लता खत्री, विनोद गहलोत, जोगेन्द्र चौधरी, सुनिता गोदारा ‘अवनि’,  सुषमा गुप्ता, डॉ सुखदेव राव, हरिप्रकाश राठी, महेंद्र सिंह छायण, छगनराज राव, रघुवीर सिंह चौधरी, मदनलाल जांगिड़, सूर्यप्रकाश वर्मा इत्यादि साहित्यिक प्रेमियों की गरिमामय उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के अंत में चनणी फाउंडेशन की अध्यक्ष संतोष चौधरी ने धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा कि राजस्थानी और हिंदी के प्रसिद्ध कथाकार डॉ. ओमप्रकाश भाटिया और वरिष्ठ कवि गीतकार सत्यदेव संवितेन्द्र की इस सफल सार्थक वार्ता से चनणी फाउंडेशन और राजस्थान साहित्य अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में सफल आयोजन सम्पन्न हुआ है। कार्यक्रम का शानदार संयोजन मधुर परिहार का रहा।

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