काजरी में किसानों को बताए अच्छी फसल पाने के तरीके
जोधपुर। काजरी में वर्षा पानी का संग्रहण एवं जल का दक्षतापूर्वक उपयोग कर, कम पानी में पनपने वाली फसलों को प्रोत्साहन विषय पर किसान गोष्ठी आयोजित हुई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कृषि विश्वविद्यालय कोटा के पूर्व कुलपति प्रो. जेडएस सोलंकी ने कहा कि जलवायु एवं क्षेत्र के अनुसार फसल का चयन करें। वही फसलें ले जो कम पानी, कम खर्च में अधिक उत्पादन दें। पश्चिमी राजस्थान में पानी बहुमूल्य है इसलिए बून्द-बून्द एवं फंव्वारा सिंचाई प्रणाली का प्रयोग करना चाहिए। महिला, कृषक समूह बनाकर काम करें, कृषि उत्पाद बनाये ताकि आमदनी में वद्धि हो। काजरी ने विभिन्न फसलों के बहुत अच्छे मॉडल खेतों में प्रदर्शित किये है। उन्होंनें कृषकों से आह्वान किया कि वे जागरूक रहे तथा उन्नत कृषि प्रौद्योगिकियों को अपनाएं एवं लाभ लें।
कार्यक्रम के विशिष्ठ अतिथि अटारी के निदेशक डॉ. एसके सिंह ने कहा कि किसान उत्पादक संगठन बनाने, सामूहिक रूप से कार्य करने से कृषि उत्पादन भी बढेगा तथा दाम भी अधिक मिलेंगें। उन्होंनें कहा कि यदि श्रमशक्ति, सामग्री, मशीनरी, मुद्रा, प्रबन्धन, बाजार की अवधारणा को ध्यान में रखकर काम करेंगें तो लाभ भी दुगना होगा। भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि किसान उनसे जुड़े एवं लाभ उठायें।
कार्यक्रम के अध्यक्ष काजरी निदेशक डॉ. ओ.पी. यादव ने कहा कि देश के किसानों ने कड़ी मेहनत कर, तकनीकियों को अपना कर कोविड जैसी चुनौतिपूर्ण परिस्थितियों में रिकार्ड उत्पादन किया। खेती के परम्परागत तरीकों में बदलाव लाकर नवीनतम प्रौद्योगिकियों, तथा कृषि पद्धतियों को अपनाने से कृषि में लाभ अवश्य बढेगा। उन्होंनें बताया कि काजरी में स्थापित कृषि व्यवसाय अभिपोषण केन्द्र किसानों, युवाओं, महिलाओं के कौशल वृद्धि में सहायता प्रदान करती है ताकि वे स्वयं अपना लघु उद्योग स्थापित कर सके तथा किसान के साथ-साथ व्यापारी भी बने। विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजिका डॉ. प्रतिभा तिवारी ने अतिथियों का स्वागत किया एवं कम से कम पानी में हो रही विभिन्न फसलों की प्रजातियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंनें किसानों से आह्वान किया कि नवीनतम तकनीकियों को अपनाये एवं अन्यों को भी प्रेरित करें ताकि सभी का भला हो।
पंचायत समिति ओसिया प्रधान ज्योति ज्यानी ने कहा कि काजरी के शोध क्षेत्रों में विभिन्न फसलों को देखकर मन प्रफुल्लित हुआ। यहाँ ऐसी अनेक तकनीकियां है जिसे महिलाएं, युवा, मूल्य संवर्द्धन के कार्य सीखकर घर पर बैठकर कमाई कर सकते है। गाँव जाट्टी भाण्डु के सरंपच ओम प्रकाश ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि संस्थान की कृषि तकनीकियां बहुत ही अच्छी है जो गाँव के लोगों को खेती के विकास के लिए प्रेरित करेंगी।
विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण कुमार ने प्रर्दशनी के माध्यम से संस्थान की उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी। संस्थान के विभागाध्यक्ष डॉ. सीबी पाण्डे, डॉ. दिलीप जैन, डॉ. एनवी पाटिल, डा.एसके सिंह, डॉ. आरस त्रिपाठी, डॉ. बीएस राठौड़ एवं अन्य वैज्ञानिक तथा मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी सुनीता आर्य एवं अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। किसानों को संस्थान के शोध क्षेत्रों में भ्रमण करवा कर जल संग्रहण, फलोउद्यानिकी, टैकनोलजी पार्क, डेयरी, पॉली हाउस, फसल वाटिका आदि क्षेत्रों मे जानकारी दी गई।
किसान वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने किसानों की विभिन्न समस्याओं का समाधान किया। किसान गोष्ठी में पंचायत समिति बालेसर, बावड़ी, लूणी, ओसिया, मण्डोर के विभिन्न गाँवो के किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन तकनीकी अधिकारी गजे सिंह जोधा ने किया तथा प्रधान वैज्ञानिक डॉ. विपिन चौधरी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।