सिर की चोट एक गंभीर सामाजिक समस्या: डॉ. शर्मा
जोधपुर। राष्ट्रीय सडक़ सुरक्षा माह के अंतर्गत राजस्थान रोड सेफ्टी की कोऑर्डिनेटर डॉ प्रेरणा सिंह व राष्ट्रीय रोड सेफ्टी मिशन के तत्वावधान में राष्ट्रीय स्तर पर एक वर्चुअल वेबिनार का आयोजन किया गया। इसमें सडक़ दुर्घटना में होने वाली सिर की चोटों पर डॉ नगेंद्र शर्मा ने अपना व्याख्यान दिया।
डॉ नगेन्द्र शर्मा ने बताया कि लॉकडाउन खुलने के बाद लोग अपने निजी वाहनों से ज्यादा यात्रा कर रहे हैं जिसके कारण पिछले दो-तीन माह में सडक़ दुर्घटनाओं की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ रही है। नतीजन मृत्यु दर भी काफी बढ़ गई है। इसका मुख्य कारण वाहन चलाते वक्त सुरक्षा के निर्देशों का पूर्ण रूप से काम में नहीं लेना, सडक़ सुरक्षा के नियमों को पालन नहीं करना है। डॉ शर्मा ने बताया कि सिर की चोट एक बहुत ही बड़ी सामाजिक समस्या है जिसमें न केवल व्यक्ति की तुरंत ही मृत्यु हो जाती है बल्कि बचे हुए मरीजों में से 10 से 15 प्रतिशत लोग लंबे समय तक बेहोशी की हालत में पड़े रहते हैं। जिनकी जिंदगी को बचाने के लिए करीबन प्रतिमाह 10 से 15000 का खर्चा परिवार के सदस्यों को करना पड़ता है जो कि एक सामान्य परिवार के लिए बेहद खर्चीला है। बाकी बचे हुए सभी मरीजों को मिर्गी रोग का शिकार होना पड़ता है। हर माह लगने वाले निशुल्क मिर्गी रोग शिविर में पिछले एक दशक में लगातार मिर्गी रोगियों की संख्या बढ़ रही है, और उनमें से 90 प्रतिशत व्यक्ति वे हैं जो सडक़ दुर्घटना से ग्रसित हो चुके हैं। जिनके उपचार में 5 साल लगातार और करीबन 700 रुपए की दवा हर माह लेनी पड़ती है जो हर व्यक्ति के लिए संभव नहीं है। डॉ शर्मा ने बताया कि देश में वर्तमान में करीबन चार हजार के आसपास न्यूरो सर्जन हैं। इस अभाव के कारण हर व्यक्ति को न्यूरो सर्जन से इलाज कराने का मौका नहीं मिल पाता। सिर की गंभीर चोटों में ज्यादातर युवा वर्ग पीडि़त है। जिसके कारण देश में युवा वर्ग की बड़ी क्षति हो रही है। डॉ प्रेरणा सिंह ने बताया कि रोड सेफ्टी संस्थान लगातार कई वर्षों से सडक़ सुरक्षा के उपाय व लोगों में जागरूकता लाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन अभी तक भी इसके कोई संतोषजनक परिणाम नहीं आए। इसके लिए और गंभीर प्रयासों की जरूरत है।