प्राचीन मूल्यवान पुस्तकें एवं पांडुलिपियां भेंट की
सेवा भारती समाचार।
जोधपुर। प्रसिद्ध इतिहासकार, साहित्यकार एवं कला मर्मज्ञ स्वर्गीय डॉ. महावीरसिंह गहलोत के निजी पुस्तकालय की दुर्लभ पुस्तकें व पाण्डुलिपियों को आमजन व शोधार्थियों के अध्ययन, अवलोकन हेतु महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश मेहरानगढ़ दुर्ग को भेंट स्वरूप प्रदान की गई है। महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश शोध केन्द्र के विभागाध्यक्ष डॉ. महेन्द्रसिंह तंवर ने बताया कि डॉ. महावीरसिंह गहलोत राजस्थान के सुप्रसिद्ध इतिहासविद् स्वर्गीय जगदीशसिंह गहलोत के परिवार से थे। ये भी उन्ही की भांति भारतीय इतिहास के मौलिक शोध पर गहरा ज्ञान रखते थे। डॉ. महावीरसिंह ने वर्षो तक जोधपुर विश्वविद्यालय में अध्यापन का कार्य भी किया, जिससे उन्होने विभिन्न विषयों के ग्रंथो व प्राच्य पुस्तको के संग्रह का अध्ययन कर उनका संग्रहण भी किया। हिन्दी, अंग्रेजी एवं प्राचीन राजस्थानी लिपि की पाण्डुलिपियों का संग्रह डॉ. महावीरसिंह के पुत्र डॉ. अशोक गहलोत ने मेहरानगढ़ के प्रबन्ध न्यासी गजसिंह को पुस्तक प्रकाश शोध केन्द्र के शोधार्थियों के उपयोगार्थ भेंट स्वरूप प्रदान किया है। पुस्तक प्रकाश शोध केन्द्र के विभागाध्यक्ष डॉ. महेन्द्रसिंह तंवर ने बताया कि लगभग तीन सौ पचास दुर्लभ पुस्तके एवं राजस्थानी मे रचित काव्य की पाण्डुलिपियां प्राप्त हुई है जो राजस्थान एवं मारवाड़ के इतिहास, साहित्य कला के साथ-साथ भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं सिक्को के अलावा अनेक विषयो की दुर्लभ पुस्तके है। यह संग्रह मेहरानगढ़ म्यूजिय ट्रस्ट के प्रबन्ध न्यासी गजसिंह के निर्देशानुसार शोध केन्द्र में डॉ.