राजस्थान कोरोना संक्रमितों की रिकवरी दर में देश में पहले नम्बर पर
सेवा भारती समाचार
जयपुर। बेहतरीन चिकित्सकीय प्रबंधन, सुविधाओं और चिकित्सकों की मेहनत से राजस्थान ने कोरोना संक्रमितों की रिकवरी में देश भर में पहले पायदान पर अपनी जगह बना ली है। प्रदेश में एक्टिव केसेज से ज्यादा संख्या उन लोगों की है, जो कोरोना संक्रमण की लड़ाई जीतकर ठीक हो चुके हैं। आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में जहां एक्टिव केस लगभग 41.99 प्रतिशत है वहीं रिकवरी रेट तकरीबन 55.11 प्रतिशत है। पूरे प्रदेश के लिए यह आंकड़े कोरोना के भय और दहशत के माहौल के बीच उम्मीद की किरण की तरह हैं और इस बात का भरोसा जगाते हैं की सरकार की तत्परता और सही समय पर सही निर्णयों, आम जन के सहयोग और चिकित्सकों के अथक प्रयासों से प्रदेश कोरोना को हराने में सक्षम है।
कोरोना से मुकाबले में राज्य सरकार के प्रयासों का एक सुखद परिणाम रिकवरी रेट के बढ़ने के रूप में देखने को मिल रहा है। यह न केवल प्रदेश सरकार के लिए उत्साहवर्धक है, बल्कि आम जन के लिए भी राहत प्रदान करने वाला है। आंकडों के मुताबिक प्रदेश में कोरोना के मरीजों की रफ्तार जहां लगातार बढ़ रही है, वहीं इलाज के बाद ठीक होकर घर जाने वालों की संख्या भी तेजी से इज़ाफा हो रहा है, जो कि एक सूकून देने वाली खबर है। आंकड़ों पर गौर करें तो हम पाएंगे कि 8 मई की सुबह तक प्रदेश में कुल संक्रमितों की संख्या 3 हजार 453 दर्ज की गई। इसमें से ठीक होने वालों की संख्या 1 हजार 903 है, जो कि कुल संख्या का 55.11 प्रतिशत है तथा इसी दिन तक एक्टिव केसेज 1 हजार 450 हैं जो कि तकरीबन 41.99 प्रतिशत है। इस प्रकार हम देख सकते हैं कि ठीक होने वाले लोगों की कुल संख्या एक्टिव केसेज से ज्यादा है।
बड़े स्तर पर टेस्टिंग और चिकित्सकीय देखभाल से मिली मदद
व्यापक स्तर पर हुई एक्टिव और पैसिव सर्विलांस, संक्रमितों को बेहतरीन क्वारेंटाइन और आइसोलेशन सुविधाएं उपलब्ध कराने, ज्यादा सैंपलिंग व टेस्टिंग करवाने और चिकित्सकों द्वारा बेहतर देखभाल के चलते करीब 55 फीसदी मरीज पॉजीटिव से नेगेटिव हो चुके हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ.रघु शर्मा का कहना है कि सरकार की सतर्कता के साथ स्वयं मरीजों ने भी सकारात्मक रूख रखते हुए इलाज करवाया और चिकित्सकों का भरपूर सहयोग किया।
एक्टिव केसेज की संख्या पिछले 16 दिनों की तुलना में कम
पूरे देश में कोरोना से संक्रमण के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है और प्रदेश में भी यह ग्राफ लगातार बढ़ ही रहा है। यह एक चिन्ता का विषय है लेकिन इन सब के बीच राहत की बात यह है कि रिकवरी रेट बढ़ाने के प्रयासों में सफलता के कारण पिछले तकरीबन 16 दिनों से एक्टिव केसेज की संख्या ज्यादा होने की अपेक्षा कम ही हुई है। पिछले 22 अप्रेल तथा 8 मई के आंकडों की तुलना करने पर कोरोना के एक्टिव केसेज में 94 केसेज का अन्तर है। आंकड़ों के मुताबिक 21 अप्रेल को प्रदेश में लगभग 1 हजार 544 एक्टिव केस थे और 8 मई के आंकडे के मुताबिक यह केसेज 1 हजार 450 हैं, जो 94 कम हैं। इससे यह कहा जा सकता है कि निराशा के इस दौर में आशा की किरण अब भी हमारे सामने है। उम्मीद है कि राजस्थान की सरकार और प्रदेशवासी कोरोना वॉरियर्स के साथ मिलकर इस महामारी से सफलता पूर्वक लडेंगे और एक मिसाल कायम करेंगे।
प्रदेश में जिला प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद
प्रदेश में कुछ जिले अपनी सीमाओं में कोरोना संक्रमण रोकने में काफी हद तक सफल हुए हैं। बारां, बाडमेर, जालौर, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सिरोही, राजसमन्द तथा सीकर आदि जिलों में वर्तमान में संक्रमितों की संख्या दस से कम है। वहीं चूरू, सवाई माधोपुर, करौली, झुंझुनूं तथा हनुमानगढ़ में अब कोरोना के संक्रमित पॉजिटिव से नेगेटिव हो चुके हैं। इन जिलों में वर्तमान में कोई भी एक्टिव केस मौजूद नहीं है।
इसके अतिरिक्त भरतपुर, बीकानेर तथा दौसा में रिकवरी का प्रतिशत 90 से अधिक है। वहीं बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, झालावाड़ तथा टोंक में यह प्रतिशत 80 से अधिक है। जयपुर, कोटा तथा नागौर जिलों में यह आंकड़ा 60 प्रतिशत से अधिक है।
जिलों में प्रशासन द्वारा लोगों को विभिन्न माध्यमों से जागरूक किया गया। क्वारेंटाइन सेन्टरों की सतत निगरानी के साथ-साथ वहां रखे गये लोगों को मोबाइल फोन के माध्यम से सर्विलांस पर रखा गया और यह सुनिश्चित किया गया कि वे क्वारेंटाइन सेन्टर को किसी भी स्थिति में नहीं छोडें। चिकित्सकों, प्रशासन एवं पुलिस के समन्वय से प्रभावी तथा तत्काल की गयी कांटेक्ट ट्रेसिंग से जिलों में रिकवरी रेट बढ़ाने में सहायता मिली।
प्लाज्मा थैरेपी से कम होगी प्रदेश में कोरोना की मृत्युदर
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार प्लाज्मा थैरेपी से दो गंभीर बीमारियों से ग्रसित कोरोना पॉजीटिव मरीजों का इलाज सवाई मानसिंह अस्पताल में ट्रायल बेस पर किया जा चुका है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने प्रदेश के 20 मरीजों के इलाज की अनुमति दी है। उन्होंने कहा कि प्लाज्मा थैरेपी आने के बाद हम कोरोना से होने वाली मृत्युदर को और भी कम कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में राष्ट्र के मुकाबले मृत्यु दर महज 2.89 फीसदी ही है। इस थैरेपी के आने के बाद कोरोना के गंभीर मरीजों का इलाज आसानी से किया जा सकेगा।