जोधपुर में भारत-जापान की हवाई साझेदारी का ऐतिहासिक पल, दोनों वायुसेना प्रमुखों ने तेजस में भरी उड़ान
‘वीर गार्जियन-2026’ के 12वें दिन भारत और जापान के वायुसेना प्रमुखों ने लिया स्वदेशी तेजस का अनुभव
दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और परिचालन तालमेल को मिली नई मजबूती
जोधपुर। राजस्थान के जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर भारत और जापान के बीच चल रहे संयुक्त हवाई अभ्यास ‘वीर गार्जियन-2026’ के तहत रविवार को दोनों देशों के वायुसेना प्रमुखों की ऐतिहासिक भागीदारी देखने को मिली। भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह और जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल ताकेहिरो मोरिता जोधपुर पहुंचे। दोनों प्रमुखों ने अभ्यास में शामिल भारत और जापान की वायुसेना टीमों से मुलाकात की और उनके साथ समूह फोटो खिंचवाई। इसके बाद दोनों प्रमुखों ने स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस में उड़ान भरी।
उड़ान से पहले दोनों वायुसेना प्रमुखों ने ब्रीफिंग रूम में अभ्यास और उड़ान से संबंधित जानकारी ली। तेजस में सवार होने से पहले दोनों ने अपने जूते साफ किए। जापान के एयर चीफ जनरल ताकेहिरो मोरिता ने भारतीय पायलट के साथ तेजस में उड़ान भरी, जबकि भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह ने स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस की कमान संभाली।
9 सितंबर से 22 सितंबर तक चल रहे 14 दिवसीय ‘वीर गार्जियन-2026’ अभ्यास में भारतीय वायुसेना के तेजस, सुखोई-30 एमकेआई और राफेल जैसे अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमान हिस्सा ले रहे हैं। वहीं जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स अपने एफ-2ए लड़ाकू विमानों के साथ अभ्यास में शामिल है। इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों की वायुसेनाओं के बीच परिचालन तालमेल, अंतर-संचालनीयता, आपसी समझ तथा जटिल हवाई अभियानों के संचालन की क्षमता को मजबूत करना है।
रविवार को अभ्यास के 12वें दिन दोनों देशों के वायुसेना प्रमुखों की तेजस में उड़ान विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उड़ान के बाद आयोजित मीडिया ब्रीफिंग में जापान के एयर चीफ जनरल ताकेहिरो मोरिता ने तेजस में उड़ान के अनुभव को यादगार बताया। उन्होंने कहा कि यह भारत में निर्मित एक बहुत सफल विमान है। उड़ान के दौरान उनके मन में यह विचार आया कि इस विमान को विकसित करने और तैयार करने के लिए कितने लोगों ने मेहनत की होगी।
भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह ने कहा कि खास तौर पर जापानी लड़ाकू विमानों का पहली बार भारतीय धरती से संचालन होना भारत-जापान संबंधों और दोनों देशों की साझेदारी के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि दोनों सेनाओं के बीच भविष्य में भी साथ-साथ रणनीति बनाने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझेदारी को आगे बढ़ाने का प्रयास जारी रहेगा। इस अवसर पर दोनों वायुसेना प्रमुखों ने अपने-अपने बैज भी एक-दूसरे से बदले।
एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह ने कहा, “संस्कृत में एक अभिव्यक्ति है, ‘आपत्सु मित्रम्’, अर्थात संकट के समय काम आने वाला ही सच्चा मित्र होता है। मुझे लगता है कि भारतीय वायुसेना और कू-कू-जिताई के संबंधों में भी यही भावना दिखाई देती है। यह साझेदारी आपसी सम्मान, पेशेवर विश्वास और शांति एवं स्थिरता के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर आधारित है।”
उन्होंने कहा कि भारत और जापान स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र की साझा दृष्टि रखते हैं। दोनों देशों की वायुसेनाओं के बीच मजबूत होता सहयोग इसी साझा उद्देश्य को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने इस तालमेल को ‘किजुना’ के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें बताया गया है कि जापानी भाषा में किजुना का अर्थ एक ऐसा मजबूत और स्थायी बंधन है, जो साझा अनुभवों, आपसी सम्मान और सहयोगी अभियानों के माध्यम से लगातार मजबूत होता जाता है।
एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि भारतीय विमान उद्योग, अनुसंधान एवं विकास तथा उत्पादन क्षमता बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। भारत ने तेजस को परिचालन में सफलतापूर्वक शामिल किया है और बड़ी संख्या में विमानों के ऑर्डर भी दिए जा चुके हैं। कुछ विमानों की आपूर्ति वैश्विक आपूर्ति शृंखला से जुड़ी चुनौतियों के कारण प्रभावित हुई है, लेकिन तेजस के अगले संस्करण तेजस मार्क-2 और भारत के अगले पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी एएमसीए के साथ भारतीय विमानन, रक्षा विमानन उद्योग और अनुसंधान एवं विकास नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि जिस तेजस में जापान के वायुसेना प्रमुख ने उड़ान भरी, वह इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि स्वदेश में विकसित भारतीय विमान पर जापान का कितना विश्वास और भरोसा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस उड़ान से दोनों देशों के बीच प्रशिक्षण कार्यक्रमों, विशेष रूप से लड़ाकू विमानों की उड़ान प्रशिक्षण व्यवस्था में आपसी सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे।
जापान के एयर चीफ जनरल ताकेहिरो मोरिता ने कहा कि जापान और भारत स्वतंत्र एवं खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र की साझा दृष्टि रखते हैं। दोनों देश जापान-भारत विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के आसपास का रणनीतिक वातावरण लगातार अधिक जटिल हो रहा है। ऐसे में भारत और जापान के बीच और मजबूत रक्षा सहयोग का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
जनरल मोरिता ने कहा कि इसी साझा समझ की पुष्टि जुलाई में भारत में प्रधानमंत्री ताकाइची और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई जापान-भारत शिखर बैठक में हुई थी। इसके बाद अगस्त में रक्षा मंत्री कोइजुमी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बीच हुई जापान-भारत रक्षा मंत्रियों की बैठक में भी इस प्रतिबद्धता को दोहराया गया। राजनीतिक स्तर पर मिले इस मजबूत समर्थन और प्रतिबद्धता के आधार पर भारत और जापान व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों का प्रयास है कि दोनों देशों के प्रयासों के बीच बेहतर तालमेल बने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि में योगदान दिया जा सके।
जनरल ताकेहिरो मोरिता ने कहा कि दोनों देशों का मानना है कि उन्नत स्तर का प्रशिक्षण आपसी समझ को गहरा करता है, विश्वास को मजबूत करता है और व्यावहारिक सहयोग को बढ़ावा देता है। इसी सोच के साथ दोनों देशों ने इस लक्ष्य को वास्तविकता में बदला है और भारत-जापान रक्षा सहयोग को एक नए चरण में पहुंचाया है।
उन्होंने कहा कि जापानी लड़ाकू विमानों की भारत में तैनाती का महत्व केवल इस अभ्यास तक सीमित नहीं है। भारत में अपने लड़ाकू विमानों का संचालन कर दोनों देशों ने अब एक-दूसरे के देशों में लड़ाकू विमानों की पारस्परिक यात्रा के लक्ष्य को हासिल कर लिया है।
इसके साथ ही जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपने हवाई संसाधनों को तैनात करने की क्षमता और इच्छाशक्ति का भी प्रदर्शन किया है। जनरल मोरिता ने कहा कि भारत-जापान की साझेदारी अब केवल संयुक्त अभ्यास करने तक सीमित नहीं रही है, बल्कि दोनों देश व्यावहारिक स्तर पर अपनी सामरिक क्षमताओं को निखारने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि लगातार अधिक उन्नत और जटिल प्रशिक्षण के माध्यम से दोनों वायुसेनाओं ने अपने सहयोग को नई ऊंचाई दी है। ये प्रयास शांति और स्थिरता में योगदान देने की दोनों देशों की क्षमता को मजबूत करते हैं और समय के साथ क्षेत्रीय प्रतिरोधक क्षमता को भी सुदृढ़ करने में मदद करते हैं।
‘वीर गार्जियन-2026’ के दौरान जापानी लड़ाकू विमानों की भारत में भागीदारी को दोनों देशों के रक्षा सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अभ्यास में भारतीय तेजस, सुखोई-30 एमकेआई और राफेल तथा जापानी एफ-2ए लड़ाकू विमानों की भागीदारी के बीच दोनों देशों के पायलट संयुक्त प्रशिक्षण और विभिन्न परिचालन गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हैं।
जोधपुर के आसमान में दोनों देशों के वायुसेना प्रमुखों की तेजस उड़ान ने अभ्यास के दौरान भारत-जापान के बढ़ते हवाई सहयोग और परिचालन तालमेल को प्रमुखता से सामने रखा। 22 सितंबर तक चलने वाला यह अभ्यास दोनों वायुसेनाओं को एक-दूसरे की संचालन प्रक्रियाओं, अनुभवों और कार्यप्रणाली को समझने तथा संयुक्त अभियानों के दौरान बेहतर समन्वय विकसित करने का अवसर प्रदान कर रहा है।