दीपावली की तैयारियां तेज, चाक पर आकार ले रहे मिट्टी के दीये;
कुम्हार परिवारों को कारोबार बढ़ने की उम्मीद

जोधपुर। दीपावली का पर्व नजदीक आते ही शहर में त्योहार की तैयारियां तेज हो गई हैं। घर-आंगन को रोशन करने के लिए मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ने लगी है। जोधपुर के बाजारों में मिट्टी के दीपक और दीयों की दुकानें सजने लगी हैं। वहीं, गांवों में कुम्हार परिवार पारंपरिक तरीके से मिट्टी के दीये बनाने में जुटे हुए हैं।
कुम्हार परिवार चाक पर मिट्टी को आकार देकर सुंदर दीये तैयार कर रहे हैं। इसके बाद इन्हें धूप में सुखाया जाता है और फिर भट्ठी में पकाकर बिक्री के लिए बाजारों तक पहुंचाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में कारीगरों की मेहनत, पारंपरिक हुनर और पीढ़ियों से चली आ रही कला की झलक देखने को मिलती है।
इस बार बाजारों में मिट्टी के रंग-बिरंगे दीपकों को लेकर ग्राहकों में उत्साह नजर आ रहा है। चाइनीज लाइटों और बिजली की लड़ियों के बजाय स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने की सोच से स्थानीय कुम्हारों और ग्रामीण महिलाओं को कारोबार बढ़ने की उम्मीद जगी है।
दीपावली पर मिट्टी के दीये जलाने की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि दीप प्रज्वलित करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। यही वजह है कि आधुनिक सजावट के साधनों के बीच भी मिट्टी के दीयों का अपना विशेष महत्व बना हुआ है।
स्थानीय कारीगरों ने शहरवासियों से अपील की है कि दीपावली पर स्थानीय कुम्हारों द्वारा तैयार किए गए मिट्टी के दीये जरूर खरीदें। इससे उनकी मेहनत को उचित सम्मान मिलेगा और उनके परिवारों को आर्थिक संबल भी मिलेगा। साथ ही, भारतीय संस्कृति और पारंपरिक हस्तकला को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।
