जगदम्बे मण्डल ने माताजी की प्रतिमा को किया सरोवर में विसर्जित
जगदम्बे मण्डल ने माताजी की प्रतिमा को किया सरोवर में विसर्जित

सिरोही। शक्ति की उपासना व भक्ति पर्व शारदीय नवरात्र के अवसर पर शहर के हृदय स्थल रामझरोखा मैदान में जगदम्बे नवयुवक मंडल सिरोही ने अपने 54 वें भव्य आयोजन के अवसर पर गरबा पांडाल में आकर्षक आदमकद प्रतिमा को विराजमान किया था जिसका विधि विधान से पूजा अर्चना के बाद गाजे बाजों के साथ जयकारे लगाते हुए हर्षोउल्लासपूर्वक तालाब के जल मे विसर्जन करके विदाई दी।
जगदम्बे नवयुवक मंडल के संरक्षक लोकेश खण्डेलवाल ने बताया कि विसर्जन से पूर्व पूरे भक्ति भाव के साथ माता की प्रतिमा की पूजा अर्चना की गई। इसके बाद ढोल थाली के साथ माता के जयकारों के बीच माता की मूर्ति को वाहन पर रखकर दूधिया तालाब तक लाया गया, जहां मंत्रोच्चारण के साथ पंडित जयेश जीवनलाल ओझा ने अभिषेक पूजा विधि संपन्न करवाई। इस मौके पर मंडल के मुख्य संरक्षक सुरेश सगरवंशी, संरक्षक गिरीश सगरवंशी, लोकेश खंडेलवाल, गांधीभाई पटेल,विजय पटेल,प्रकाश खारवाल, अध्यक्ष अतुल रावल सहित मंडल सदस्यों ने पूजन करते हुए नगर के समस्त भक्तों के दुख निवारण,सुख समृद्धि की मंगल कामना की। इस मौके पर प्रकाश प्रजापति, शैतान खरोर,दिनेश प्रजापत, रुपेश शर्मा, मनीष खत्री, प्रतीक प्रजापत, महेंद्र सूर्यवंशी, हरिश खत्री, सुरेश टेलर, अश्विन भाई सहित श्रद्धालु मौजूद थे।
जिस प्रकार बेटियां अपने ससुराल से मायके जाती है और कुछ दिन बिताने के बाद वापस अपने घर चली जाती है उसी प्रकार मान्यता है कि मां दुर्गा भी अपने मायके यानी धरती लोक पर नवरात्र में आती है और 9 दिन बाद फिर से अपने घर शिवजी के पास माता पार्वती के रूप में कैलाश पर्वत पर चली जाती है। बेटियों को विदा करते समय उन्हें कुछ खाने पीने का सामान और श्रंगार की सामग्री भेंट दी जाती है ठीक उसी प्रकार विसर्जन के समय एक पोटली में मां दुर्गा की प्रतिमा के साथ यह सारा सामान बांधा जाता है उसी परंपरा के तहत जगदम्बे मंडल द्वारा भी प्रतिवर्ष विसर्जन के मौके पर विधि विधान से यह कार्य संपन्न कर विदा करता है। इन भावुक पलो में माता से क्षमा याचना करते हुए अगले वर्ष पुनः आने का निमंत्रण देते वक्त कार्यकर्ताओं का माहौल कारुणिक बन गया।