भानुमित्र के निधन पर शोक जताया
सेवा भारती समाचार
जोधपुर। सूर्यनगरी के ख्यातनाम हिंदी गज़़लकार, सृजना के आजीवन सदस्य आनंदचंद टाटिया भानुमित्र के निधन पर साहित्यकारों ने शोक जताया है।
सृजना सचिव हरीदास व्यास ने बताया कि राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पत्रिका गज़़ल गरिमा के संपादक भानुमित्र पिछले तीन दशकों से हिंदी गज़़ल की व्याकरण पर निहायत संजीदगी से काम कर रहे थे, वे गजल का एक नया आलोचना शास्त्र गढ़ रहे थे। उनकी पुस्तक हिंदी गज़़ल की लहरें गजल के व्याकरण का एक नया दौर प्रमाणित हुई। सृजना अध्यक्षा सुषमा चौहान ने कहा कि राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर से अमृत सम्मान से प्रतिष्ठित भानुमित्र अपने आखिरी समय में भी रचनात्मक ऊर्जा से लबरेज थे। सृजना संरक्षक मुरलीधर वैष्णव ने शोक जताते हुए कहा कि वे अपने अंतिम दिनों में राधा-कृष्ण पर गजलों की एक सीरीज लिखने की योजना बना रहे थे। कथाकार हरिप्रकाश राठी ने भानुमित्र को गज़़ल के एक समर्पित जि़ंदगी कहा। सृजना की संयुक्त सचिव डॉ नीना छिब्बर ने उन्हें नए सौंदर्यबोध का रचनाकार कहा। शायर हबीब कैफ़ी ने इस अवसान को अदब की दुनिया की बेहद सख्त खबर कहा। युवा गज़़लकार खुरशीद खैराड़ी ने शोक जताते हुए भानुमित्र के अवसान को गजल के आलोचना पक्ष की अपूरणीय क्षति कहा। आस्था वृद्धाश्रम के मुख्य ट्रस्टी राजेन्द्र परिहार ने संवेदना जताते हुए कहा कि साहित्य के लिए उनका समर्पण आस्था परिवार को आजीवन याद रहेगा।