मेहरानगढ़ दुर्ग में 22 से 26 अक्टूबर तक सजेगा 20वां जोधपुर रिफ
छह महाद्वीपों के कलाकार बिखेरेंगे लोक संगीत के रंग, 250 से अधिक राजस्थानी लोक कलाकार भी देंगे प्रस्तुतियां

जोधपुर। मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के तत्वावधान में 20वां जोधपुर रिफ (राजस्थान इंटरनेशनल फोक फेस्टिवल) 22 से 26 अक्टूबर तक मेहरानगढ़ दुर्ग में आयोजित होगा। इस वर्ष महोत्सव अपनी 20वीं वर्षगांठ मना रहा है। इसमें छह महाद्वीपों के कलाकार, एक दर्जन से अधिक देशों के संगीतकार और राजस्थान की समृद्ध लोक संगीत परंपराओं से जुड़े 250 से अधिक लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। महोत्सव का आयोजन मुख्य संरक्षक महाराजा गजसिंह द्वितीय के संरक्षण में किया जाएगा।
शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होने वाला यह महोत्सव पिछले दो दशकों से दुनिया भर के लोक संगीत कलाकारों को एक मंच पर लाने का कार्य कर रहा है। इस बार कोलंबिया, चिली, पुर्तगाल, पोलैंड, स्कॉटलैंड और एस्टोनिया सहित विभिन्न देशों के कलाकार भाग लेंगे। यहां अलग-अलग संस्कृतियों और संगीत परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
राजस्थान के मंगणियार, लंगा, मेघवाल, भोपा, कालबेलिया, मीणा, भील सहित विभिन्न समुदायों के कलाकार महोत्सव की प्रमुख आकर्षण होंगे। इन कलाकारों की पारंपरिक लोक धुनें अंतरराष्ट्रीय संगीतकारों के साथ संवाद और सहयोग के नए अवसर भी तैयार करेंगी।
महोत्सव के मुख्य संरक्षक पूर्मव महाराजा गजसिंह द्वितीय ने कहा कि जोधपुर रिफ अब राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। इसके माध्यम से राजस्थानी लोक कलाकारों को दुनिया भर में पहचान और सम्मान मिला है।
महोत्सव के निदेशक दिव्य भाटिया ने कहा कि राजस्थानी कलाकार हमेशा से इस आयोजन की आत्मा रहे हैं। पिछले 20 वर्षों में महोत्सव ने ऐसा मंच तैयार किया है, जहां राजस्थानी कलाकार अपनी लोक परंपराओं को नए रूप में प्रस्तुत करते हैं। साथ ही राजस्थान, भारत और दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों को एक-दूसरे के साथ संगीत के नए प्रयोग करने का अवसर मिलता है।
मेहरानगढ़ दुर्ग बनेगा संगीत का जीवंत केंद्र
जोधपुर रिफ के दौरान मेहरानगढ़ दुर्ग और आसपास के ऐतिहासिक स्थलों पर विभिन्न संगीत कार्यक्रम आयोजित होंगे। सुबह वीर दुर्गादास स्मारक पार्क में कार्यक्रमों की शुरुआत होगी। जसवंत थड़ा पर सूर्योदय और चंद्रोदय के समय विशेष संगीत प्रस्तुतियां होंगी। चोकेलाव बाग में कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जबकि जनाना महल के प्रांगण में प्रतिदिन भव्य संगीत कार्यक्रम होंगे।
इसके अलावा राव जोधा डेजर्ट लाउंज और सलीमकोट स्थित क्लब मेहरान में भी संगीत प्रेमियों को विभिन्न कार्यक्रमों का आनंद मिलेगा। ऐतिहासिक इमारतों और खुले प्रांगणों में होने वाली प्रस्तुतियां महोत्सव को विशेष पहचान प्रदान करेंगी।
पहली बार भारत आएंगे कई अंतरराष्ट्रीय कलाकार
इस वर्ष महोत्सव में कई ऐसे अंतरराष्ट्रीय कलाकार भाग लेंगे, जो पहली बार भारत में प्रस्तुति देंगे। इनमें लैटिन अमेरिकी लोक संगीत से जुड़े कलाकार, ब्रिटेन के प्रसिद्ध बांसुरी और इलियन पाइप वादक माइकल मैकगोल्ड्रिक और डोनाल्ड शॉ, ग्रैमी पुरस्कार विजेता फंक संगीत से जुड़े कलाकार तथा ब्रॉडवे संगीत से जुड़ी प्रतिभाएं शामिल हैं।
फ्रांसीसी ओपेरा गायिका कैमिला बोरेट भी अपनी प्रस्तुति देंगी। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत गायिका स्मिता बेलूर और मांगणियार कमायचा वादक कोडे खान की प्रस्तुति में राजस्थान की महिला संगीत परंपराओं को विशेष रूप से प्रस्तुत किया जाएगा।
भारतीय संगीत के दिग्गज भी देंगे प्रस्तुतियां
महोत्सव में पद्मश्री अश्विनी भिड़े-देशपांडे जयपुर-अतरौली घराने की खयाल गायकी प्रस्तुत करेंगी। मणिपुर की पेना वादक मंगका मयांगलाम्बम, पियानो वादक और संगीतकार मर्लिन डिसूजा, युवा सितार वादक चिंतन कट्टी, अवधूत फड़के और अनिरुद्ध शिर्के भी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।
इसके साथ ही कनाडा की सैक्सोफोन वादक रूबी एबल, राग आधारित शबद गायन के लिए प्रसिद्ध जसलीन कौर मांगा और भारतीय-अमेरिकी वायलिन वादक अंबी सुब्रमण्यम भी महोत्सव का हिस्सा होंगे। अंबी सुब्रमण्यम कर्नाटक और हिंदुस्तानी संगीत परंपराओं के संवाद को अपनी प्रस्तुति के माध्यम से सामने लाएंगे।
पुराने कलाकारों के साथ नए संगीत प्रयोग
महोत्सव में फिनलैंड की फिडल वादक एमिलिया लाजुनेन, कोलंबिया के डीजे किलाबिटमेकर और एस्टोनिया की संगीत जोड़ी पुलुप भी भाग लेगी। पुलुप पारंपरिक हियू कन्नेल वाद्य को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक प्रभावों के साथ प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती है।
इस बार कई विशेष संगीत सहयोग भी देखने को मिलेंगे। राजस्थान के युवा लंगा कलाकार सदीक खान, असिन खान और जाकिर खान, माइकल मैकगोल्ड्रिक तथा डोनाल्ड शॉ के साथ प्रस्तुति देंगे। एमिलिया लाजुनेन और असिन खान लंगा सिंधी सारंगी तथा फिडल के माध्यम से अनूठा संगीत संगम पेश करेंगे। पोलैंड की गायिका कैरोलिना चीचा और अनीता डांगी की प्रस्तुति में टाटर संगीत और राजवाड़ी मांड का मेल देखने को मिलेगा।
राजस्थान की लोक संस्कृति होगी प्रमुख आकर्षण
महोत्सव में बीकानेर के मीर बसु खान की सिरायकी सूफी गायकी, पद्मश्री सम्मानित तंगा राम का अलगोजा वादन, घेवर खान और डरे खान की मांगणियार गायकी, फिरोज खान का ढोलक वादन तथा असिन खान लंगा का सिंधी सारंगी वादन प्रमुख आकर्षण होंगे।
इसके अलावा मेहरानगढ़ म्यूजियम के लोक संगीत प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़े 100 से अधिक युवा लंगा और मंगणियार कलाकार भी प्रस्तुतियां देंगे। महिला कलाकारों में अनीता डांगी, मेघवाल समुदाय की बहनें दरिया और केवल तथा राजवाड़ी मांड की परंपरा को आगे बढ़ाने वाली मां-बेटी की जोड़ी गंगा और सुंदर शामिल होंगी।
पहली बार थिएटर प्रस्तुति भी होगी
जोधपुर रिफ के 20वें संस्करण में पहली बार थिएटर प्रस्तुति को शामिल किया गया है। आदिशक्ति थिएटर की ओर से ‘बृहन्नला’ नाटक का मंचन किया जाएगा। यह महाभारत के उस प्रसंग पर आधारित है, जिसमें अर्जुन एक वर्ष तक नृत्य शिक्षक के वेश में रहते हैं। नाटक का निर्देशन वीणापाणि चावला ने किया है, जबकि विनय कुमार इसमें अभिनय करेंगे।
लोक संगीत और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव
शरद पूर्णिमा के अवसर पर मेहरानगढ़ दुर्ग में आयोजित होने वाला जोधपुर रिफ एक गैर-लाभकारी महोत्सव है, जिसका उद्देश्य लोक संगीत और पारंपरिक कलाओं को प्रोत्साहन देना है। महाराजा गजसिंह द्वितीय महोत्सव के मुख्य संरक्षक तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध संगीतकार मिक जैगर इसके अंतरराष्ट्रीय संरक्षक हैं। दिव्य भाटिया महोत्सव के निदेशक हैं।
जोधपुर रिफ का 20वां संस्करण राजस्थान की लोक परंपराओं को वैश्विक पहचान दिलाने के साथ-साथ विभिन्न देशों की संगीत संस्कृतियों को जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर बनेगा।