ईडब्ल्यूएस आरक्षण के पात्रता नियमों में बदलाव पर जल्द रास्ता निकलेगा : शेखावत

- मीडिया से बातचीत में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री ने दिए संकेत

जोधपुर। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के आरक्षण के पात्रता नियमों में बदलाव के सकारात्मक संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण के नियमों में बदलाव को लेकर केंद्र सरकार के स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है। हाल में इस विषय पर बैठक भी हुई है। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही इसका कोई रास्ता निकलेगा।

शेखावत शनिवार को जोधपुर सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण देकर ऐतिहासिक कदम उठाया था। वर्ष 2014-15 में उन्होंने लोकसभा में भी इस विषय को लेकर कई बार आवाज उठाई थी। हालांकि, आरक्षण के लिए निर्धारित पात्रता के मौजूदा नियमों में कृषि पर निर्भर परिवारों के साथ न्याय नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण पृष्ठभूमि के ऐसे परिवार, जिनकी आजीविका का एकमात्र साधन खेती है, या शहरों में रहने के बावजूद जिनके परिवार की आजीविका कृषि पर निर्भर है, उनके साथ पात्रता के मौजूदा प्रावधानों में न्याय नहीं होता। इस विषय को सरकार के स्तर पर उठाया गया था, लेकिन यूथ फॉर इक्वलिटी की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण निर्णय नहीं हो सका। अब याचिका का निपटारा हो चुका है। शेखावत ने कहा कि केंद्र सरकार जब भी इस पर निर्णय करेगी, तो उसे पूरे देश के परिप्रेक्ष्य में करना होगा। कुछ राज्यों का मत मौजूदा नियमों में बदलाव नहीं करने के पक्ष में भी है। ऐसे में सभी पहलुओं पर विचार कर समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है।

राजस्थानी भाषा की मान्यता पर भी जल्द निर्णय की उम्मीद
राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता देने के सवाल पर शेखावत ने कहा कि वह वर्ष 1991 से इस संघर्ष के साथ खड़े हैं। यह राजस्थान के लोगों की अस्मिता का प्रश्न है। उन्होंने कहा कि विभिन्न भाषाओं को मान्यता देने के 32 से अधिक प्रस्ताव लंबित हैं और गृह मंत्रालय का संबंधित विभाग इस दिशा में काम कर रहा है। सरकार के स्तर पर इस विषय पर विचार-विमर्श जारी है और उन्हें उम्मीद है कि जल्द निर्णय होगा।

शेखावत ने राजस्थानी भाषा की मान्यता के पक्ष में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाली स्वीकृति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राजस्थानी, भोटी और भोजपुरी भाषाओं की एक विशिष्टता है कि इन्हें भारत के बाहर भी विभिन्न देशों में मान्यता मिली हुई है। उनके अनुसार नेपाल में राजस्थानी को, हिमालयी क्षेत्र के देशों में भोटी को और गिरमिटिया भारतीयों के माध्यम से भोजपुरी को कई देशों में पहचान मिली है। यह स्थिति इन भाषाओं को मान्यता देने के दावे को और मजबूत करती है।

पंचायती राज चुनाव में भाजपा की जीत का भरोसा
आगामी पंचायती राज चुनाव में पार्टी कार्यकर्ताओं को संदेश देने के सवाल पर शेखावत ने कहा कि भाजपा का कार्यकर्ता केवल चुनाव के समय सक्रिय नहीं होता, बल्कि पूरे पांच साल सामाजिक सरोकारों के लिए काम करता है। वह संगठन का विस्तार करता है, उसके आधार को मजबूत बनाता है और विचारधारा को आगे बढ़ाता है। चुनाव के समय इन्हीं प्रयासों को एकजुट कर विजय हासिल करने के लिए काम किया जाता है।

उन्होंने कहा कि भाजपा का लक्ष्य राज्य में डबल इंजन की सरकार के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी तीसरा इंजन जोड़ना है। नगर निकाय चुनाव में शहरी क्षेत्रों में भाजपा पहले ही तीसरा इंजन जोड़ चुकी है। शेखावत ने दावा किया कि राजस्थान में 70 प्रतिशत से अधिक नगर निकायों में भाजपा के बोर्ड बने हैं और पंचायती राज चुनाव में भी कमोबेश ऐसे ही परिणाम आने की उम्मीद है।

उन्होंने पिछले 35 वर्षों के चुनावी इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि सामान्य तौर पर जब राजस्थान में भाजपा की सरकार होती है, तब पार्टी के 12-13 जिलों में जिला प्रमुख बनते रहे हैं, जबकि सत्ता से बाहर रहने पर यह संख्या चार-पांच जिलों तक सिमट जाती थी। पिछली कांग्रेस सरकार के समय भी तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पांच चरणों में जिला परिषद और पंचायतों के चुनाव करवाए थे, इसके बावजूद 19 जिलों में भाजपा के बोर्ड बने थे। शेखावत ने इसे उस समय का सबसे बेहतर प्रदर्शन बताते हुए कहा कि इस बार पार्टी का प्रदर्शन इससे भी बेहतर रहने की उम्मीद है।

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Gulam Mohammed

(EDITOR SEVA BHARATI NEWS) ==> Seva Bharti News Paper Approved Journalist, Directorate of Information and Public Relations, Rajasthan, Jaipur (Raj.), Mobile 7014161119 More »

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