कर्मों की निर्जरा का सुअवसर है पर्यूषण महापर्व: महासती कुमुद प्रभा
सोजत सिटी । जैन धर्म के पावन पर्व पर्यूषण महापर्व के अवसर पर बुधवार को स्थानीय ओसवाल न्याति नोहरे में आयोजित धर्मसभा में महासती कुमुद प्रभा ने कहा कि यह पर्व आत्मशुद्धि, आत्मसंयम और तपस्या के माध्यम से कर्मों की निर्जरा का सुअवसर है। उन्होंने कहा कि जन्म-जन्मांतर के संचित कर्मों से मुक्ति पाने का यह उत्तम समय है।
सभा को संबोधित करते हुए साध्वी प्रभा ने कहा कि “मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है, और यही मोक्ष प्राप्ति का माध्यम है। हमें इस जीवन का सदुपयोग करते हुए आत्मकल्याण की दिशा में अग्रसर होना चाहिए।”
साध्वी सुलेखा ने अपने प्रवचनों में कहा कि पर्यूषण एक महान तप आराधना का पर्व है। उन्होंने कहा, “थोड़े स्वाद के लिए अपने संपूर्ण जीवन को नुकसान पहुँचना उचित नहीं है, संयम ही सच्चा सुख है।”
साध्वी निर्मिता ने कहा कि “जो दूसरों को सुख देता है, उसे ही वास्तविक सुख की प्राप्ति होती है। तपस्या के माध्यम से इच्छाओं पर नियंत्रण संभव है और यही आत्मिक शांति का मार्ग है।”
साध्वी प्रणिता ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे पर्यूषण के दौरान जमीकंद का त्याग करें और रात्रि भोजन न करने का संकल्प लें, जिससे आहार संयम के साथ आध्यात्मिक उन्नति संभव हो।
धर्मसभा में नगर के अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
इस अवसर पर प्रकाश बांठिया, दौलतराज बांठिया, नेमीचंद मांडोत, रामलाल श्री श्रीमाल, पारसमल सिंघवी, सुरेश सुराणा, चेनराज अखावत, बाबूलाल बोहरा, पदम धोका, ललित पगारिया, महावीर श्री श्रीमाल, विनोद लोढ़ा, राजेश कोरिमुथा, सुनील सुराणा सहित अन्य धर्मप्रेमीजन उपस्थित रहे।