आफरी में मरुस्थलीकरण तथा भू-अवक्रमण को रोकने के लिए अंतरर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण का आयोजन
जोधपुर। भा.वा.अ.शि.प.-शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (आफरी), जोधपुर में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा “मरुस्थलीकरण तथा भू-अवक्रमण को रोकने हेतु समन्वित रणनीतियाँ” विषय पर पांच दिवसीय अंतरर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण 16 दिसंबर 2024 को श्रीमती कंचन देवी, महानिदेशक, भारतीय वानिकी अनुसन्धान एवं शिक्षा परिषद, देहरादून के मुख्य आतिथ्य में आरम्भ हुआ| कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्व्ल्लन से हुआ| महानिदेशक ने अपने उद्बोधन में संस्थान को इस महत्त्पूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम को आयोजित करने की बधाई दी और कहा कि भूमि सुधार, पुनर्वास एवं संरक्षण और टिकाऊ भूमि और जल संसाधनों का प्रबंधन करने जैसी दीर्घकालिक एकीकृत रणनीतियों की आवश्यकता है जो सम्मिलित प्रयासों से ही संभव है ।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के अध्यक्ष, डॉ. तरुण कान्त, निदेशक आफरी ने अपने स्वागत उद्बोधन में इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की उपयोगिता स्पष्ट करते हुए कहा कि उत्तम विधियों से मरुस्थलीकरण तथा भू-अवक्रमण को रोकने के लिए नवीन समाधन तलाशते हुए, आने वाली पीढ़ी के लिए स्थायी भविष्य का समर्थन ही इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य है।
विशिष्ट अतिथि श्री पंकज अग्रवाल, पूर्व प्रधान वन संरक्षक, मध्य प्रदेश ने मरुस्थलीकरण के समस्या के आकड़ों को प्रस्तुत करते हुए बताया कि देश में वन और अन्य बंजर भूमि पर ध्यान देने के साथ, 26 मिलियन हेक्टेयर अवक्रमित की भूमि उत्पादकता और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को 2030 तक बहाल करने का लक्ष्य है जिसे सभी के सम्मिलित प्रयासों से ही प्राप्त किया जाना संभव है| प्रशिक्षण पाठ्यक्रम निदेशक श्री संजीव कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक, सेंटर ऑफ़ एक्स्सिलेंस, सस्टेनेबल लैंड मैनेजमेंट, भा.वा.अ.शि.प. देहरादून ने प्रशिक्षण के दौरान आयोजित सैधांतिक और व्यावहारिक सत्रों की जानकारी दी और लवणीय भूमि एवं अवक्रमित भूमि का पुनर्वास और दीर्घकालिक स्थिरता की बात कही| कार्यक्रम के अंत में डॉ. संगीता सिंह, समूह समन्वयक शोध ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया| कार्यक्रम का संचालन मीता सिंह तोमर, ने किया| इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया, मंगोलिया, रवांडा, बोत्सवाना, केमरून, अल्जीरिया, तुर्की नेपाल, केन्या, अफगानिस्तान समेत 15 विभिन्न देशों के 19 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे है जो विभन्न अनुसन्धान कार्यों से जुड़े है और इस ज्वलंत समस्या के हल के लिए कार्यरत हैं | यह प्रशिक्षण कार्य्रकम 20 दिसंबर तक चलेगा।