दीक्षा वेश परिवर्तन नहीं वरन हृदय परिवर्तन का मार्ग हैः साध्वी प्रमोदश्री
Gulam Mohammed, Editor, Seva Bharati News
जोधपुर का लाडला जिनशासन को होगा समर्पित
जोधपुर। सूरत में तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्य महाश्रमणजी के सानिध्य में जोधपुर के सुरेंद्र कोचर की आगामी 19 जुलाई को होने वाली जैन भगवती दीक्षा के पूर्व तीन दिवसीय कार्यक्रमों के अंतिम दिन रविवार को सरदारपुरा स्थित ओसवाल कम्यूनिटी सेंटर में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का आगाज साध्वीवृंद्व द्वारा नमस्कार महामंत्र एवं अमिता बैद द्वारा मंगलाचरण से हुआ।
कार्यक्रम में ही मुमुक्षु सुरेंद्र एवं मुुमुक्षु करूणा गुलेच्छा संसार पक्षीय मामा भुआ के भाई बहिन है। दोनों को दीक्षा वैराग्य के भाव साथ में जागृत हुए। दोनों दीक्षा ग्रहण कर रहे है जिसमें एक तेरापंथ संघ से व दूसरी स्थानकवासी साधुमार्गी संघ से।
मंत्री अंकित चैधरी व देवीचंद तातेड ने बताया कि त्रिदिवसीय कार्यक्रम के अंतिम तीसरे दिन रविवार 30 जून को सुबह 8.30 बजे मुमुक्षु सुरेंद्र कोचर की संयम यात्रा-वर घोडा सरदारपुरा स्थित तातेड गेस्ट हाउस से रवाना होकर सत्संग भवन, सी रोड होते हुए तारघर स्थित ओसवाल कम्यूनिटी हाॅल में सम्पन्न हुआ। वर घोडे में तेरापंथी सभा, महिला मंडल, कन्या मंडल, किशोर मंडल, ज्ञान शाला के ज्ञानार्थी, अणुव्रत समिति, प्रोफेशनल फोरम के साथ ही अनेक सामाजिक धार्मिक संस्थाओं की सहभागिता रही। इस अवसर पर तेरापंथ युवक परिषद के सदस्यों की ओर से पूरे रास्ते में भजनों की स्वरलहरियां बिखेर कर भक्तिमय माहौल बना दिया। ओसवाल कम्यूनिटी हाॅल में तेरापंथ धर्मसंघ की ओर से दोनों मुमुक्षाओं का शाॅल, माला, साफा, जैन दुपट्टा, अभिनंदन पत्र आदि देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर संयम पथ की ओर जाने वाले मुमुक्षु सुरेंद्र कोचर ने कहा अनेक लोगों को भौतिक वस्तुओं की इच्छा होती है। मोक्ष जाने की इच्छा बहुत कम लोगों को होती है। उन्होंने बच्चों और युवाओं को दीक्षा लेकर मोक्ष जाने की प्रेरणा देते हुए कहा इससे प्रवचन, साधु संतों के सानिध्य में जाकर संसार के मोह में उलझकर कर्मबंधन भाई बहिन व अन्य परिवारिक सदस्यों, तेरापंथ व अन्य समुदाय का अभिनंदन के लिए आभार व्यक्त किया कि उसकी खुशी के लिए अपने लाडले को धर्म संघ में समर्पित किया।
समारोह में साध्वी प्रमोदश्री ने कहा दीक्षा सत्यम, शिवम, सुंदरम का सौपान है। इस सौपान पर आरोहण वही व्यक्ति कर सकता है जिसमें साहस, हिम्मत व शौर्य होता है। दीक्षा एक चिकित्सा पद्धति है जो आधी व्याधि उपाधि का हरण कर समाधि प्रदान करती है। दीक्षा वेश परिवर्तन नहीं वरन हृदय परिवर्तन का मार्ग है। दीक्षा दिखावा नहीं दर्शन है, प्रदर्शन नहीं प्रयोग है। जो जाग जाता है वही दीक्षा स्वीकार करता है।
कार्यक्रम में सभाध्यक्ष मूलचंद तातेड, सुरेश जीरावला, युवक परिषद अध्यक्ष मितेश जैन, मिलन बाठिया, महिला मंडल अध्यक्ष दिलखुश तातेड, मंत्री पूजा सालेचा, सभा मंत्री मुकेश चैधरी, मुमुक्षु के भाई किशोर कोचर, सुमेर कोचर, साध्वी आदर्शप्रभाजी, जिनेश्वर तातेड, विजयराज मेहता, गोविंदराज पुरोहित, नरेश सिंघवी, तनसुख गुलेच्छा आदि ने दोनों मुमुक्षु के प्रति मंगल भावना प्रेषित की। इस अवसर पर अतिथि शहर विधायक अतुल भंसाली, ग्रुप कैप्टन एयरफोर्स जितेंद्र बरडिया, विंग कमांडर चेतन बाफना का अभिनंदन किया गया।