केंद्रीय कारागृह में नए आपराधिक कानूनों के संबंध में व्याख्यानमाला हुई आयोजित

जोधपुर। आज से लागू हुए नवीन भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम विषयक व्याख्यान का आयोजन केंद्रीय कारागृह के सभागार में किया गया।  जेल अधीक्षक प्रदीप लखावत ने संबोधित करते हुए कहा कि पुराने कानूनों का केंद्रीय बिंदू दंड का प्रावधान था, जो औपनिवेशिक मानसिकता से प्रेरित थे, लेकिन नए कानूनों में न्याय पर बल दिया गया है। उन्होंने कहा कि संविधान एवं लोकतंत्र की भावना के अनुरूप नए कानून वर्तमान परिवेश को ध्यान में रखकर आवश्यक बदलाव किए गए है। 

उन्होंने कहा कि 1860 में बने भारतीय दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता,1898 में बने दंड प्रक्रिया संहिता के स्थान पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता तथा 1872 में बने एविडेंस एक्ट की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू होगा।

अधिवक्ता श्याम सिंह गाजेरी ने संबोधित करते हुए कहा कि कहा कि भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाली हरकतों को एक नए अपराध की श्रेणी में डाला गया है। राजद्रोह को आईपीसी से हटा दिया गया है, इस जगह नया प्रावधान जोड़ा गया है। जिसमें सजा एवं विस्तृत परिभाषा दी गई है।

अधिवक्ता मनोज जाखड़ ने कहा कि आतंकवादी कृत्य, जो पहले गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम जैसे विशेष कानूनों का हिस्सा थे, इसे अब भारतीय न्याय संहिता में शामिल किया गया है।

कार्यक्रम में कारापाल हनवंत सिंह, उप कारापाल तुलसीराम, उप कारापाल कविता विश्नोई,सुरेश पारीक, देवेन्द्र सिंह,गणपत सिंह,उदय सिंह पंवार,प्रेम सिंह शेखावत,अब्दुल हई,दलपत डांगी,भीयाराम,विष्णुदेव सहित जेलकर्मी एवं बंदी उपस्थित रहे।

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