मीर हर दौर का शाइर है : शीन काफ़ निज़ाम
राजस्थान उर्दू अकादमी का दो दिवसीय अखिल भारतीय सेमिनार सम्पन्न
दो दिवसीय अखिल भारतीय सेमिनार के दूसरे दिन आयोजित हुए चारों सत्र
जोधपुर।’’मीर की शायरी बरसों बाद आज भी प्रासंगिक होने के कारण ही मीर हर दौर का शाइर है। यह उद्गार ख्यातनाम शाइर और आलोचक शीन काफ निज़ाम ने राजस्थान उर्दू अकादमी के तत्वावधान में ख़ुदाए सुखऩ मीर तकी मीर के 300 साला यौमे पैदाइश के अवसर पर होटल चन्द्रा इंपीरियल रातानाडा में रविवार को आयोजित दो दिवसीय अखिल भारतीय सेमिनार के दूसरे दिन आयोजित हुए चारों सत्र को समेकित करते हुए व्यक्त किये। अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. निसार राही ने बताया कि उर्दू अकादमी के अध्यक्ष डॉ. हुसैन रज़ा ख़ान की सरपरस्ती में पहले इज्लास की सदारत दिल्ली के अदीब डॉ. खालिद अशरफ ने करते हुए कहा कि मीर की नज़्मों पर भी गुफ्तगू होनी चाहिए सत्र का संचालन मोहम्मद अफज़़ल जोधपुरी ने किया।
इस सत्र में डॉ. आलिया अपने मक़ाले में बताया कि मीर के बारे में कई भ्रांतियां है जिस पर तज़किरा निगारों ने मनघड़ंत कि़स्से लिखे हैं, शाहिद पठान ने मीर का तज़किरा निकातुश्शोअरा विषय पर अपना पत्र वाचन किया जबकि मुईद रशीदी ने असकरी साहब के मीर विषयक मक़ाले में बताया मीर के यहां ज़बान और रवायत की जद्दोजहद मिलती है ।मीर का अनुभव पूरी इन्सानियत का तजुर्बा है, वो इन्सानियत से बड़ा शाइर है।दूसरे सत्र की सदारत श्रीनगर से आये प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद ज़मां आज़ुर्दा ने की तथा सत्र का संचालन मज़ाहिर सुलतान ज़ई ने किया, इस सत्र में डॉ. निसार राही ने सब हमसे सीखते हैं अन्दाज़े गुफ्तगू का विषयक मक़ाले के ज़रिये मीर को तामीरे दिल का शाइर बताते हुए बात की गहराई तक पंहुचना उनकी आदत बताई, टोंक के डॉ. अरशद अब्दुल हमीद, ने मुतालाते मीर के राजस्थानी हवाले विषयक पत्रवाचन किया तो प्रो. खालिद अशरफ ने नज़्मे मीर के समाजियात पर मक़ाले के ज़रिये उस दौर के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में मीर के हालात का जायज़ा बयान किया।
तीसरे सत्र की सदारत सग़ीर अफऱाहीम ने की और संचालन एम. आई. ज़ाहिर ने किया इस सत्र के प्रथम मक़ाले में शीन मीम हनीफ़ ने मीर की अनानियत शीर्षक से नफ़सियाती ऐतबार से उनके हालात और शाइरी पर गुफ्तगू की, डॉ. नुसरत जहां ने मीर की शेरी जमालियात का एक मारूज़ी जायज़ा शीर्षक से पत्रवाचन किया तो ख़ालिद अल्वी ने मीर की भ्रांतियां और उनके निवारण के उपाय बताए। चौथे और समापन इज्लास की सदारत शीन काफ निज़ाम ने की जबकि राजस्थान उर्दू अकादमी के कोषाध्यक्ष और शाइर बृजेश अम्बर ने संचालन किया। इस सत्र में इश्राकुल इस्लाम माहिर ने सरसरी तुम जहान से गुजऱो विषय पर पत्र वाचन करते हुए मीर और ग़ालिब का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया, इसी सत्र में डॉ. मोहम्मद हुसैन और शाहीना तबस्सुम ने भी अपने मक़ाले पढे, प्रत्येक सत्र के अन्त में सवाल जवाब का सिलसिला भी रखा गया, इस अवसर पर जोधपुर के साहित्यकार एवं अन्य प्रबुद्धजन उपस्थित थे।