प्रशिक्षित बुद्धि और विवेक ही कर्म के प्रतिमान : प्रो. अग्रवाल

‘समकालीन विश्व में शान्ति एवं अहिंसा के गांधीवादी मार्ग‘‘ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय कान्फ्रेंस का उदघाटन

जोधपुर। गांधी अध्ययन केंद्र, जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय द्वारा ‘समकालीन विश्व में शान्ति एवं अहिंसा के गांधीवादी मार्ग‘‘ विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कान्फ्रेंस का उदघाटन सत्र आज एस एन मेडिकल के ऑडिटोरियम हाल में हुआ।

कांफ्रेंस के आयोजन सचिव डॉ. हेमसिंह गहलोत ने बताया कि उद्घाटन सत्र में यूपीएससी के पूर्व सदस्य एवं जेएनयू के पूर्व प्रोफेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल ने वर्तमान दौर में सोशल मीडिया और विभिन्न प्रचार तंत्रों के कुप्रचार से भारत में गांधी के विचारों को नकारात्मक प्रभाव पड़ा ड़ा है। एक तरफ जहां आज अफ्रीकन एशियाई और लैटिन अमेरिकी देश सहित पूरा विश्व गांधी के विचारों की और अग्रसर है, वहीं दूसरी तरफ गांधी के खिलाफ कुप्रचार से भारत मे तर्क और विवेक का खात्मा किया जा रहा है। ऐसे में गांधी के विचारों को मानने वाले लोगो को अपने पूरे प्रयास से गाँधी जी के विचारों को जन जन तक पहुंचाना होगा। तभी करुणा और संयम के जरिये हम भारत मे विवेक और प्रशिक्षित तर्क की स्थापना होगी। आगे अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि मजबूरी का नाम महात्मा गांधी नही बल्कि मजबूती का नाम महात्मा गांधी है, क्योंकि गांधी के विचारो से ही हम न केवल आत्मिक शांति बल्कि विश्व शांति की स्थापना की जा सकती है साथ ही कहा कि अहिंसा का मतलब करुणा विवेक न्याय तथा संयम के साथ जीना है।
गांधी शांति प्रतिष्ठान, नई दिल्ली के अध्यक्ष कुमार प्रशांत ने गांधी जी के जीवन की प्रेरणाओं पर अपनी बात रखते हुए कहा कि गांधी कोई व्यक्ति नहीं बल्कि गांधी एक मजहब है। ऐसा मजहब है जिससे हम अपने जीवन की अच्छी मंजिल और अच्छे रास्ते की खोज कर सकते है। गांधीजी की किसी पुस्तक में कोई उपदेश नहीं है लेकिन यदि आप गांधी जी के जीवन को पढ़ले तो आपके जीवन का रास्ता गांधी के जीवन में मिल जायेगा। साथ ही मणिपुर पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि आज मणिपुर को गांधी और गांधीवादी लोगों की जरूरत है। गांधी को अपनाते हुए हमें ’सब’ का भाव अपनाना होगा। इस सामूहिकता के भाव अर्थात जाति धर्म से इतर हमें एक इंसान की भावना से हिंदुस्तानी बनना होगा और वही भावना जिसने पूरे हिंदुस्तान को जोड़ रखा है उस भावना का नाम गांधी है।
शांति और अहिंसा निदेशालय, जयपुर के निदेशक मनीष शर्मा ने मणिपुर और यूक्रेन की चर्चा करते हुए गांधीवादी मूल्यों को वर्तमान में लागू करने पर बात रखी। उन्होंने बताया कि राजस्थान जिला स्तरीय गांधी कार्यालयों की स्थापना करने वाला पहला राज्य है। सिर्फ यही नहीं गांधीजी पर विभिन्न कार्यक्रमों और आयोजनों के माध्यम से अशोक गहलोत सरकार ने गांधीजी के विचारों को जन जन तक पहुंचाने का कार्य किया है।

गांधी इनफॉरमेशन सेंटर बर्लिन जर्मनी के डॉ. क्रिस्टन बरटोल्फ ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका द्वारा हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम को मानव इतिहास का क्रूरतम हमला बताया, आज गांधी दर्शन से शिक्षा लेने की आवश्यकता है तथा जीवन में गांधी चिंतन, विचारों, मूल्यों आदि को अपनाने की आवश्यकता है।
राजस्थान राज्य पशुधन बोर्ड के अध्यक्ष एवं राज्य मंत्री राजेंद्र सोलंकी ने अपनी बात रखते हुए राज्य सरकार द्वारा गांधीजी पर चलाई जा रही योजनाओं और कार्यक्रमों से श्रोताओं को अवगत कराया। साथी कहां की समकालीन प्रदर्शन में राजनीतिक स्वार्थ के चलते ऐसा अंतिम और सांप्रदायिकता बढ़ती जा रही है ऐसे में गांधी दर्शन को अपनाने की आवश्यकता है।
उद्घाटन के अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रोफेसर के.एल. श्रीवास्तव ने विश्व में जहां हिंसा और आतंक का तांडव मचा हुआ है ऐसे में गांधीवादी मूल्य ही सुकून दे सकते हैं और उससे मानवता को बचाए जा सकते हैं। साथ ही कहा कि गांधी जाति, धर्म, नस्ल आदि के भेदभाव से ऊपर उठकर संपूर्ण मानवता की एकता और उसकी उन्नति की बात करते थे सादा जीवन और उच्च विचार उनके जीवन का प्रमुख मूल्य था सत्य एवं अहिंसा के माध्यम से प्रकट किया। कान्फ्रेंस सचिव डॉ. हेम सिंह गहलोत ने संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा समस्त आगंतुकों स्वागत किया। कान्फ्रेंस निदेशक प्रोफेसर के.एल. रैगर ने धन्यवाद प्रकट करते हुए कहा कि निर्भयता और भाईचारे का मिला जुला जुला नाम है गांधी दर्शन की मूल दृष्टि है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ललित कुमार पंवार एवं डॉ.राजश्री राणावत ने किया।

प्रथम तकनीकी सत्र में प्रो. नावेद जमाल, डॉ. विनय कोड़ा, डॉ. भानू कपिल ने गांधी जी के जीवन दर्शन और उसकी वर्तमान परिस्थितियों में प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर एम.बी.एम. विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजय शर्मा, सिण्डीकेट सदस्य प्रो. के.आर. पटेल, सिण्डीकेट सदस्य एवं कमला नेहरू महिला महाविद्यालय की निदेशिका प्रो. संगीता लूंकड, परीक्षा नियंत्रक प्रो. के. आर. गेंनवा, प्रो. सरोज कौशल, प्रो. सोहनलाल मीना, प्रो. चंदन बाला, प्रो. एस.के. मीना, प्रो. मंगलाराम विश्नोई, प्रो. यादराम मीना, डॉ. शिव कुमार बरवड, डॉ. पदमजा शर्मा तथा शिक्षक, शोधार्थी तथा शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कॉन्फ्रेंस में देश विदेश के लगभग 550 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

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