‘गांधी साहित्य की एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

वर्तमान संदर्भ में उपलब्धता एवं उपयोगिता विषय पर की चर्चा

जोधपुर। गांधी विचार कितने ताकतवर है कि उन पर जितना हमला होता है वे उतने ही ताकतवर होते जाते हैं। वाराणसी स्थित सर्व सेवा संघ व गांधी विद्या संस्थान परिसर पर हाल ही में हुआ घटनाक्रम निदंनीय हैं। कब्जे के नाम पर गांधी विचार के प्रचार-प्रसार में जुटी संस्थाओं पर इस तरह का ‘हमला‘ किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता। राजस्थान साहित्य अकादमी के युवाअध्यक्ष डाॅ0 दुलाराम सहारण ने मंगलवार को यहां गांधीभवन सभागार में ‘गांधी साहित्य की वर्तमान संदर्भ में उपलब्धता एवं उपयोगिता विषय पर आयोजित एक दिवसीय  राष्ट्रीय  संगोष्ठी में बतौर मुख्यअतिथि संबोधित कर रहे थे।
श्रद्धेय स्वर्गीय नेमिचंद्र जैन ‘भावुक‘ के 95 वें जन्म जयंती अवसर पर आयोजित इस  राष्ट्रीय   संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह में डाॅ0 दुलाराम ने कहा कि हम सबके अपने भावुकजी आज हमारे विचारों में रचे-बसे हैं उन्होंने न केवल जोधपुर बल्कि प्रदेशभर में युवाओं में गांधी विचारों के प्रचार-प्रसार का काम किया बल्कि राजस्थान साहित्य अकादमी व अंतर प्रांतीय कुमार साहित्य परिषद् के बैनर तले एक नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ा हैं। उन्होंने अनगिनत संगोष्ठियां अपने जीवनकाल में आयोजित की जो सराहनीय हैं। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि अकादमी निकट भविष्य में महात्मा गांधी की आत्मकथा व अन्य पुस्तकें कम कीमत पर प्रकाशन की योजना बना रही हैं। ताकि युवा पीढ़ी गांधी विचारों को जान सकें एवं समझ सकें। अभी ये प्रस्ताव राज्य सरकार के पास भेजा जा चुका हैं। साथ ही मधुमती में नियमित रूप से गांधी विचार से ओत-प्रोत एक स्तंभ शुरू करने की भी योजना हैं।  
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि गांधी शांति प्रतिष्ठान नई दिल्ली के सचिव अशोक कुमार ने कहा कि भावुकजी ने युवा पीढ़ी में स्वाध्याय को बढ़ावा देने का काम किया साथ ही वे विशेषतः बच्चों को विभिन्न परीक्षाओं के माध्यम से उनमें गांधी विचारों का बीजारोपण करने में विश्वास रखते थे। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि वे यहां आज केवल अपनी उपस्थिति ही दर्ज न कराएं बल्कि यहां से कुछ न कुछ गांधीविचारों के बीज ग्रहण करके जाएं।  इससे पूर्व गांधी शांति प्रतिष्ठान समिति जोधपुर के उपाध्यक्ष डाॅ0 ओ0 पी0 टाक ने कहा कि भावुकजी मैत्री भाव, प्रेम व अपनत्व से युवा पीढ़ी को जोड़े रखते थे। उन्होंने अपने सादा जीवन से युवाओं के चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं। आज भी हमारी भौतिक स्मृति मेें हमारी यादों में रचे-बसे हैं। संगोष्ठी के विषय के संबंध में उन्होंने बताया कि गांधीजी की जीवन यात्रा मनुष्यता की यात्रा थी। गांधीजीवन के तीन रूप आंदोलनकारी, पत्रकारिता व रचनात्मकता में उनके योगदान से समझे जा सकते हैं।  गांधीजी ने भाषा को अहिंसा में बांधा।  
कार्यक्रम का संचालन करते हुए केन्द्र के सचिव डाॅ0 भावेंद्र शरद जैन ने गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र एवं अंतर प्रांतीय कुमार साहित्य परिषद् की गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए आज के कार्यक्रम के संदर्भ में प्राप्त मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के संदेश का पठन किया। उन्होंने कहा भावुकजी के पुत्र होने के नाते हालांकि मैं उतना योगदान तो नहीं कर पा रहा लेकिन मैं अपने युवा साथियों के सहयोग से उनके कार्यों व विचारों को बढ़ाने की कौशिश में रहता हूॅं। यह कार्यक्रम गांधी शांति प्रतिष्ठान केन्द्र जोधपुर, राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर एवं अंतर प्रांतीय कुमार साहित्य परिषद् के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया।
इस अवसर पर अतिथियों का सूंताजली व शाॅल ओढ़ाकर सम्मान किया गया। इससे पूर्व संगीतज्ञ डाॅ0 सुनील कुमार पारीक व उनके साथियों ने बापू के प्रिय भजन ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए‘ प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अंत में परिषद् की महामंत्री डाॅ0 पद्मजा शर्मा ने सभी का आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित किया।  कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रबुद्ध साहित्यसेवी, प्रतिष्ठित नागरिक व गांधीविचारों के जानकार के साथ ही बड़ी संख्या में युवाओं एवं बच्चों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। इस दौरान मरूधर पत्रिका के संपादक लालचंद जैन ने भी भावुकजी को याद करते हुए शब्दाजंली प्रस्तुत की।

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