रेत के टिब्बों में डामर सड़क ने लिया आकार
जैसलमेर। आम जन के कल्याण और सामुदायिक विकास के लिए हर क्षेत्र में बहुद्देशीय एवं बहुआयामी उपलब्धियां पाने का ग्राफ निरन्तर बढ़ता जा रहा है। खासकर प्रदेश के अन्तर्राष्ट्रीय सरहदी क्षेत्रों पर बुनियादी लोक सुविधाओं और सेवाओं पर विशेष फोकस किया जा रहा है। इससे लोक जीवन की कई सहूलियतों का व्यापक विस्तार होने के साथ ही आम जन को सुकून का अहसास होने लगा है। भारत-पाक अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पर अवस्थित मरुस्थलीय जैसलमेर जिले में भी प्रदेश सरकार द्वारा जन सुविधाओं की बढ़ोतरी के लिए बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषकर मीलों तक पसरे रेतीले मरु क्षेत्र में आवागमन सुविधाओं को सुचारू बनाने के लिए सार्थक गतिविधियों को मूर्त रूप दिया जा रहा है। हर तरफ फैले हुए रेत के मंजर के बीच आवागमन सुविधाओं की दृष्टि से सड़क विकास एवं विस्तार के कई महत्वपूर्ण कार्य आकार ले रहे हैं। सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा इस दिशा में कई उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं। खासकर सीमावर्ती क्षेत्रों में आम जन के आवागमन तथा यातायात की दृष्टि से किए गए कार्य आंचलिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण एवं लोकोपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। इन्हीं में रेत के समन्दर के बीच सड़कों का निर्माण करना अपने आप में चुनौती भरा कार्य है। इन विषम भौगौलिक परिस्थितियों में सार्वजनिक निर्माण विभाग की ओर से सीमा क्षेत्रों में अवस्थित दूरवर्ती रेतीले गांवों और ढांणियों में सड़क सुविधा की दृष्टि से सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (बीएडीपी) में कई नवीन सड़कों का निर्माण कराकर इन इलाकों के ग्रामीणों को हमेशा के लिए राहत का सुकून दिया है। इन गांवों में पहली बार सड़क सुविधा उपलब्ध हो पाई है। इनसे सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़े इलाकों के किसानों को भी लाभ मिलने लगा है। जैसलमेर जिला मुख्यालय से 127 किलोमीटर दूर तनोट से किशनगढ़ सड़क मार्ग पर तनोट से 8 किलोमीटर आगे दाहिनी तरफ एक किलोमीटर अन्तरंग रेत के समुद्र में बसी नथुवाला ढाणी में सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा बनाई गई सड़क क्षेत्रवासियों के लिए आवागमन की दृष्टि से राहत का सुकून देने वाली सिद्ध हुई है। यह ढाणी भारत-पाक अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पर मात्र 15 किलोमीटर अन्दर अवस्थित है। कुल 1 किलोमीटर लम्बाई वाली इस सरहदी सड़क का निर्माण सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (बीएडीपी) के अन्तर्गत 15.40 लाख रुपए की धनराशि व्यय कर किया गया है। इस छोटी सी ढाणी नथुवाला की आबादी काफी कम होने के बावजूद जन सुविधाओं की दृष्टि से यहाँ सड़क निर्माण कर ढाणीवासियों को आवागमन एवं यातायात की सहूलियत उपलब्ध कराई गई, इससे क्षेत्रवासियों को राहत का अहसास हुआ है। यह ढाणी सीमावर्ती क्षेत्र में रेतीले टिब्बों के बीच बसी हुई होने से यहाँ आवागमन के लिए पहले कोई सुविधा नहीं थी। क्षेत्रवासियों के लिए आवागमन तथा जरूरी सामान को लाने के लिए ऊँटों या ऊँट गाड़ों का इस्तेमाल करने के सिवा और कोई चारा नहीं था। ऎसे में कोई सा मौसम हो, भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। साल में कई-कई बार आवागमन थम जाने जैसी स्थितियां अक्सर बनी रहती थीं। फिर जिन दिनों में रेतीली आंधियों का दौर चलता, तब मार्ग में रेतीले टिब्बे बन जाने के कारण जनजीवन काफी मुश्किलों भरा हो उठता था। अर्से से चली आ रही इन दिक्कतों का खात्मा किया सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा बनाई गई सड़क ने। अब ठेठ ढाणी तक डामर सड़क बन जाने से वाहनों का आना-जाना सुगम हो गया है तथा लोगों के लिए आवागमन की मुश्किलें समाप्त हो गई हैं। अब आम जन के साथ ही बच्चों एवं शिक्षकों का सरकारी स्कूल तक आवागमन सहज हो चला है, दुपहिया वाहन भी चलने लगे हैं। इसी प्रकार उदयनगर 8-9 लारिका चौराहा से 90 बी.डी. चौराहा तक 4 किमी लम्बाई की डामर सडक का निर्माण सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत किया गया है। इस पर 84 लाख रुपए की धनराशि व्यय हुई है। यह 8-9 लारिका चौराहा हनुमानगढ़-रामगढ़ सड़क स्टेट हाईवे-94 के किमी 91/0 पर स्थित है। 8-9 लारिका चौराहा से 90 बीडी चौराहा तक बनी सड़क में नवीन राजस्व ग्राम जानीपुरा को जोड़ा गया है। यह सडक इन्दिरा गांधी नहर परियोजना सिंचित क्षेत्र के विभिन्न चक व ढांणियों से होकर गुजरती है तथा अन्तराष्ट्रीय भारत-पाक सीमा पर बसी ढाणियों को जोडती है। जानीपुरा राजस्व गांव है जहां की जनसंख्या कम होने के बावजूद आम जन को आवागमन सुविधा मुहैया कराने की दृष्टि से सड़क नेटवर्क से जोड़ा गया है। इस क्षेत्र के लोगों को आवश्यक कृषि सबंधित सामान के लाने के लिए ट्रेक्टर का इस्तेमाल करना पड़ता था और आवागमन में भारी कठिनाइयों के दौर से रूबरू होना होना पड़ता था लेकिन सड़क बन जाने से कई प्रकार की सुविधाएं मिलने लगी हैं। आज गांव-ढाणी तक डामर सडक हो जाने से वाहनों का आना-जाना सुगम हो गया है। सरकारी स्कूल तक बच्चों एवं शिक्षकों का दुपहिया वाहन से आवागमन सुगम हो गया है। आम ग्रामीणों के लिए घर-गृहस्थी, खेत-खलिहानों से जुड़ी सामग्री इत्यादि की आसानी से पहुंच सुनिश्चित हुई है और इससे क्षेत्रवासियों को कई प्रकार की सहूलियतें मिलने के साथ ही काश्तकारों सहित अन्य ग्रामीणों का आर्थिक एवं सामाजिक स्तर ऊँचा उठा है। लोक जीवन के लिए जरूरी सुविधाओं एवं सेवाओं की पहुंच का मार्ग आसान हो चला है। आवागमन व परिवहन की सुविधाओं की बढ़ोतरी के चलते क्षेत्रवासियों को राहत का सुकून मिला है वहीं आंचलिक आर्थिक एवं सामाजिक स्तर में भी अपेक्षाकृत बढ़ोतरी हुई है।