पानी को केमिकलयुक्त पानी में मिलने से रोकने के उपाय की कार्य योजना तैयार करें
पाली। उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश प्रकाश टांटिया ने कहा कि बांडी नदी में जाने वाले सीईटीपी रिको एवं नगर परिषद के सीवरेज पानी का अलग-अलग आंकलन कर गंदे पानी का अलग-अलग आंकलन कर मेले पानी को केमिकलयुक्त पानी में मिलने से रोकने के उपाय की कार्य योजना तैयार करें। टाटिया ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जलप्रदूषण समस्या के समाधान के संबंध में जलप्रदूषण समस्या के समाधान के संबंध में अधिकारियों की बैठक में कहा कि औद्योगिक इकाईयां का प्रदूषित पानी नदी में नहीं जाए। इसके साथ ही औद्योगिक केमिकल शुरू पानी व सीवरेज पानी का आंकलन गंभीरता से करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि नदी में सीवरेज व घरेलू पानी में केमिकल्स पानी मिलकर नदी में गिर रहा है। रिको एवं नगर परिषद के अधिकारी अपने अपने क्षेत्र के पानी का सही आंकलन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करे। घरेलू पानी के साथ केमिकलयुक्त पानी नदी में नहीं गिरे इसकी सुनिश्चितता करे। उन्होंने कहा कि आगामी एक माह में संबंधित विभाग अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर कार्य योजना शुरू कर इसे गंभीरता से लिया जाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि रिको अपने क्षेत्र के नालों की माॅनिटरिंग समीक्षा करे। इससे पानी सीधा नदी में नहीं जाएं। सीईटीपी के ट्रीटेट पानी में सीवरेज व नालों से रसायनिक पानी नदी में गिर रहा है। नगर परिषद जहां जहां सीवरेज का पानी नदी में गिरता है तो उसकी मात्रा व गुणवत्ता का आंकलन करे। उन्होंने कहा कि नगर परिषद व रूडिप बकाया सीवरेज एवं घरेलू पानी कनेक्शन जरूरी है ताकि एसटीपी में पानी अधिक आए एवं औद्योगिक इकाईयों को उपचारित पानी मांग के अनुरूप मिल जाए। उन्होंने कहा कि यह पाली की ज्वलंत समस्या है जो काफी वर्षो से चल रही है। इसका समाधान ठीक तरह से हो इसके लिए संबंधित अधिकारी गंभीरता के साथ धरातल पर कार्यवाही करे। इसमें किसी प्रकार की कौताही सहन नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि एनजीटी से जारी निर्देशों की पालना सुनिश्चित करते हुए संबंधित विभाग अपनी जिम्मेदारी का निवर्हन करे जिन अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है वे शीघ्र अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
पर्यावरण विद एवं प्रोफेसर अजय प्रताप सिंह ने कहा कि केमिकल युक्त पानी में सीवरेज का पानी मिलने से वह रंगीन व पारदर्शी रहता है। सीवरेज के पानी के मिलने से नदी में इसके फैलाव की क्षमता बढ़ जाती है। जिससे आम लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों को तकलीफ कम हो इसके लिए नगर परिषद एवं रिको के अधिकारी अपने अपने स्त्रोतो से निकलने वाले पानी में रसायनिक पानी नहीं मिले इसके लिए कार्य योजना तैयार करे।
जिला कलक्टर अंश दीप ने पाली में जल प्रदूषण समस्या से निपटने के लिए एनजीटी आदेश के तहत अब तक किए गए कार्यो की जानकारी देते हुए बताया कि सीईटीपी में जेडएलडी का कार्य चल रहा है। निर्देशों की पालना एवं समस्याओं के निवारण के लिए टेलिफोन नम्बर पर शिकायत की सुविधा तथा शिकायत प्राप्त होते ही कार्यवाही की जा रही है। उन्होंने बताया कि उपखण्ड एवं प्रदूषण नियंत्रण मंडल स्तर पर दो कमेटियों का गठन कर निरंतर निरीक्षण किया जा रहा है। सीईटीपी कैमरा, प्राथमिक ट्रीटमेंट, आॅटोकट आदि व्यवस्था शुरू है। इसके साथ ही सीईटीपी में क्लोचर व्यवस्था में सहयोग दे रही है। एसटीपी का 2.5 एमएलडी पानी उद्योगिक इकाईयों के पुन उपयोग के लिए दिया जा रहा है।
बैठक में अतिरिक्त जिला कलक्टर चन्द्रभानसिंह भाटी, उपखण्ड अधिकारी उत्सव कौशल, प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के क्षेत्रीय अधिकारी आर.के. बोडा, दीपक ओझा, नगर परिषद आयुक्त ब्रिजेश राय, सुखराम चौधरी, रिको के पीके गुप्ता, उद्योग विभाग के अब्दुल रज्जाक सहित संबंधित विभा के अधिकारी मौजूद रहे।