पाली में जल प्रदूषण की समस्या के स्थाई समाधान की जरूरत: श्रेया गुहा
शरद भाटी
पाली। जिले की प्रभारी सचिव श्रीमती श्रेया गुहा ने कहा कि पाली में जल प्रदूषण की समस्या के स्थाई समाधान के लिए गंभीरता से कार्य करने की जरूरत है।
प्रभारी सचिव ने शनिवार को जिला कलेक्टर सभागार कक्ष में एनजीटी के आदेश के क्रियान्विति के संबंध में अब तक की गई कार्यवाही की समीक्षा करते हुए कहा कि पाली में प्रदूषण की समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार हर संभव सहायता करने की तैयार है पाली में प्रदूषण समस्या के निजात के साथ औद्योगिक क्षेत्र में निरंतर विकास भी जरूरी है।
उन्होंने सीईटीपी के अध्यक्ष को कहा कि जल उपचारित संयंत्रों से निर्धारित मानक पर पानी को ट्रीट किया जाए किसी भी सूरज में प्रदूषित पानी नदी में न जाए इसकी सुनिश्चितता की जाए। उन्होंने कहा कि पाली को जनता को प्रदूषण से बचाना हम सब की नैतिक जिम्मेदारी है सभी को मिलकर इस समस्या का स्थाई समाधान ढूंढना चाहिए साथ ही उद्योगिक क्षेत्र से जुडे व्यापारी व सरकारी अधिकारियों की मंशा होनी चाहिए कि पाली को किस तरह प्रदूषण से मुक्त कर लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के साथ पर्यावरण को बचाया जा सके।
उन्होंने कहा कि समस्या से निपटने के लिए एनजीटी के आदेश की अक्षरशः पालना करते हुए एक्शन प्लान तैयार करे तथा आवश्यकता पड़ने पर दोषियों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की जाए। उन्होंने कहा कि जिला स्तर गठित कमेटिया युद्धस्तर पर प्रदूषण समस्याओं का निदान करे शिकायत प्राप्त होते ही अधिकारियों को मौके पर भेजकर दोषी के विरूद्ध पुख्ता कार्यवाही करे। नदी व अन्य स्थानों पर प्रदूषित पानी के टैंकर खाली करने वालों को बक्शा नही जाए।
उन्होंने एनजीटी के निर्देशों के संबंध में अब तक जिला स्तर कार्यवाही की विभागवार समीक्षा की। उन्होंने जिला कलक्टर व पुलिस अधीक्षक को प्रदूषण से निपटने के लिए और अधिक सक्रिय होकर कार्य करने को कहा। उन्होंने कहा कि अवैधरूप से संचालित इकाईयों की पहचान कर कार्यवाही करे तथा उनके बिजली, पानी के कनेक्शन पुनः नहीं जुड़े उसकी सुनिश्चित हो।
जिला कलक्टर अंश दीप ने प्रभारी सचिव को पाली में प्रदूषण समस्या के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए जिला प्रशासन द्वारा की गई कार्यवाही की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिला, उपखण्ड एवं तहसीलस्तर पर कमेटियों का गठन कर एनजीटी के आदेश की पालना की साप्ताहिक समीक्षा की जा रही हैं। जल प्रदूषण के संबंध में सीईटीपी के इनलेट व आउटलेट पर निगरानी के साथ सेम्पल की निरन्तर जांच की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा अब तक नियमानुसार कार्य नही करने पर 44 फैक्ट्रियों को बंद कराने के साथ ही अवैध रूप से संचालित हो रही 82 औधोगिक इकाईयों को पूर्ण रूप से बंद करा दिया है। इस संबंध में कार्यवाही निरन्तर जारी है। चयनित क्षेत्र में कृषि खराबा रिपोर्ट लेने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की स्वास्थ्य जांच एवं मिट्टी पानी के नमूनों की जांच करवाई जा रही हैं। परिवहन विभाग द्वारा प्रदूषित पानी छोड़ने वाले टैंकरों की धरपकड़ की जा रही हैं। जल प्रदूषण समस्या की शिकायत प्राप्त करने व्हाट्सअप व मोबाईल नम्बर जारी किए गए। उन्होंने कहा कि सीईटीपी में जेडएलडी प्लांट के निर्माण की निरन्तर समीक्षा के साथ स्लज, बायोवेस्ट निस्तारण कार्यवाही की जा रही हैं।
बैठक में पुलिस अधीक्षक राहुल कोटोकी ने कहा कि पुलिस द्वारा निरन्तर गश्त कर प्रदूषण नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरूद्ध कार्यवाही में सहयोग दिया जा रहा हैं। सीईटीपी के अध्यक्ष अनिल गुलेच्छा व अरूण जैन ने सीईटीपी द्वारा की जा रही कार्यवाही, जेडएलडी निर्माण स्लज निस्तारण स्काडा सिस्टम आदि के बारे में बताया।
बैठक में उपखण्ड अधिकारी उत्सव कौशल, प्रदूषण नियंत्रण मंडल के आर.के. बोड़ा, दीपक ओझा, कृषि विभाग के प्रभात रंजन, अधीक्षक अभियंता डिस्काम घनश्याम चौहान, नगर परिषद आयुक्त ब्रिजेश रॉय, सुखराम चौधरी, सिंचाई विभाग के राम नारायण चौधरी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।