सोलर हब बनी सूर्यनगरी- जोधपुर जिले में 670 मेगावाट सौर उत्पादन क्षमता

जोधपुर डिस्कॉम क्षेत्र में पीएम कुसुम योजना से 281 संयंत्र चालू, किसान बन रहे ऊर्जा उत्पादक

जोधपुर। जोधपुर स्थापना दिवस पर सूर्यनगरी अब केवल पर्यटन और विरासत के लिए ही नहीं, बल्कि सौर ऊर्जा उत्पादन में भी नई पहचान बना रही है। प्रधानमंत्री कुसुम योजना ए और सी के तहत जोधपुर डिस्कॉम क्षेत्र में सौर ऊर्जा उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। जोधपुर सिटी और जोधपुर डिस्ट्रिक्ट सर्कल को मिलाकर अब तक 281 सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिनसे 670.88 मेगावाट बिजली उत्पादन शुरू हो चुका है।

विशेष बात यह है कि योजना के तहत कुल 475 परियोजनाओं के माध्यम से 1073 मेगावाट क्षमता का लक्ष्य तय किया गया था। इसके मुकाबले आधे से ज्यादा उत्पादन क्षमता जमीन पर उतर चुकी है। पश्चिमी राजस्थान की तेज धूप और किसानों की भागीदारी ने इस योजना को उम्मीद से ज्यादा गति दी है।

राजस्थान सरकार की ऊर्जा सचिव आरती डोगरा इस योजना की लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं। फीडर सोलराइजेशन और कृषि क्षेत्र को दिन में बिजली उपलब्ध करवाने की दिशा में ऊर्जा विभाग ने इसे प्राथमिकता में रखा है। वहीं जोधपुर डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक डॉ. भंवरलाल के नेतृत्व में पीपीए, तकनीकी स्वीकृतियों और संयंत्र स्थापना की प्रक्रिया में तेजी लाई गई है।

आंकड़ों के अनुसार जोधपुर सिटी सर्कल में अब तक 2 संयंत्र स्थापित होकर 4 मेगावाट बिजली उत्पादन कर रहे हैं। सबसे बड़ी प्रगति जोधपुर डिस्ट्रिक्ट सर्कल में देखने को मिली है। यहां 279 संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं और उनसे 666ण्88 मेगावाट बिजली उत्पादन शुरू हो चुका है।

प्रबंध निदेशक डा. भंवरलाल के अनुसार पीएम कुसुम योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसान अब केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि ऊर्जा उत्पादक भी बन रहे हैं। कृषि फीडरों के सोलराइजेशन से दिन में बिजली आपूर्ति मजबूत होगी और रात के समय कृषि लोड का दबाव कम होगा। इससे बिजली तंत्र पर भार घटने के साथ लाइन लॉस में भी कमी आने की उम्मीद है।

योजना के कारण बड़ी संख्या में किसानों ने अपनी भूमि सौर परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराई है। किसानों को बिजली उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आय का रास्ता मिला है। आने वाले वर्षों में जोधपुर डिस्कॉम क्षेत्र प्रदेश के सबसे बड़े सौर ऊर्जा क्षेत्रों में शामिल हो सकता है।

जोधपुर जैसे मरुस्थलीय क्षेत्र में जहां सालभर तेज धूप रहती है, वहां यह योजना ऊर्जा आत्मनिर्भरता का बड़ा मॉडल बनकर उभर रही है। यही वजह है कि अब जोधपुर की पहचान केवल सूर्यनगरी नहीं, बल्कि ‘सोलर पावर हब’ के रूप में भी बनने लगी है।
पीएम कुसुम योजना से क्या बदल रहा
– किसान अब बिजली उपभोक्ता के साथ ऊर्जा उत्पादक भी
– दिन में कृषि बिजली आपूर्ति मजबूत होने की उम्मीद
– डीजल पंप और पारंपरिक बिजली पर निर्भरता घटेगी
– किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिला
– बिजली लाइन लॉस कम करने में मदद
– गांव स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ा
– पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी
– कृषि क्षेत्र में बिजली कटौती का दबाव घटने की संभावना

Show More

Gulam Mohammed

(EDITOR SEVA BHARATI NEWS) ==> Seva Bharti News Paper Approved Journalist, Directorate of Information and Public Relations, Rajasthan, Jaipur (Raj.), Mobile 7014161119 More »

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button