सोजत का प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर: श्रद्धा, संस्कृति और समृद्धि का प्रतीक
सोजत । मेहंदी नगरी सोजत न केवल अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और औद्योगिक पहचान के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहाँ स्थित प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर भी नगर की सांस्कृतिक एवं धार्मिक धरोहर का अद्भुत प्रतीक है। नव चौकिया ब्राह्मणों के बड़ा बास में स्थित यह मंदिर राव जोधा के शासनकाल से भी पूर्व निर्मित माना जाता है। मंदिर का ऐतिहासिक महत्व इस बात से भी जुड़ा है कि तुर्की शासकों के काल में यहां मूर्ति का विग्रह भी हुआ था।
इस मंदिर में स्थापित माता लक्ष्मी जी की अत्यंत आकर्षक प्रतिमा ऐसी है, जिस पर दृष्टि टिक जाए तो हटना मुश्किल हो जाता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि श्रीमाली ब्राह्मण समाज की सांस्कृतिक समृद्धि और सामाजिक गौरव का प्रतीक भी है।
भव्य आयोजन और पर्व विशेष
श्री महालक्ष्मी मंदिर में अष्टमी तिथि पर प्राकट्योत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन दूर-दराज़ से श्रद्धालु दर्शन हेतु पहुँचते हैं। मंदिर प्रांगण में भजन संध्या का आयोजन होता है और माता की पालकी यात्रा नगरभर में निकलती है, जिसमें माता लक्ष्मी जी की मूर्ति की भव्य शोभा देखते ही बनती है।
दीपावली पर विशेष श्रृंगार
दीपावली के पर्व पर मंदिर की सजावट और माता का श्रृंगार विशेष आकर्षण का केंद्र होता है। मंदिर को दीपों, फूलों और रंग-बिरंगे कपड़ों से सजाया जाता है। भव्य पूजन-अर्चन के साथ भक्तजन माता के चरणों में शीश नवाकर मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। मंदिर में न केवल महालक्ष्मी जी की, बल्कि अन्य देव मूर्तियों का भी आकर्षक श्रृंगार किया जाता है, और अन्नकूट पर्व पर श्रद्धा के साथ 56 भोग अर्पित किए जाते हैं।
समाज की श्रद्धा और सहभागिता
श्रीमाली ब्राह्मण समाज के चेतन व्यास बताते हैं कि यह मंदिर न केवल सोजत नगर, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के लिए भी श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है। 36 कौमों के श्रद्धालु यहां आकर अपनी आस्था प्रकट करते हैं और माता के दरबार में मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।
यह महालक्ष्मी मंदिर सोजत की धार्मिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और लोक आस्था का अद्भुत संगम है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।