माॅ एवं बच्चे के स्वास्थ्य की देखभाल की कमियो को पूर्ण करने हेतु एकीकृत प्रयास “पुकार”
सिरोही। कोविड महामारी के उपचार एवं रोकथाम में लगे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के लिए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था सुदृढ़ रखना एक चुनौती था, लेकिन इस चुनौती को स्वीकार करते हुए जिला कलक्टर भगवती प्रसाद द्वारा अन्य सहयोगी विभाग से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग का समन्वय स्थापित करते हुए जिले में मातृ एव शिशु स्वास्थ्य सेवाऐं जन – जन तक पहुंचाने में सफलता हासिल की। राज्य स्तर द्वारा माह जनवरी 2021 की जारी की गई स्वास्थ्य सूचकांक रैकिंग में जिला प्रथम स्थान पर रहा है। यह सब सुनियोजित कार्ययोजना, आपसी समन्वय, प्रभावी प्रशिक्षण, प्रभावी माॅनिटरिंग से संभव हो पाया है ।
जिले में माॅ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाऐं को सृद्धढ किये जाने हेतु जिला स्तर से ग्राम स्तर तक विभिन्न दी जा रही सेवाओं के अन्तराल को भरने के लिये अधिकारी एवं कर्मचारियों की पूर्ण जवाबदेही सुनिश्चित करने एवं माॅ एवं बच्चें के स्वास्थ्य की देखभाल की कमियों को पूर्ण करने हेतु जिला कलक्टर भगवती प्रसाद द्वारा एकीकृत प्रयास ’’पुकार’’ संचालित करने का निर्णय माह जून 2020 में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में लिया गया।
जिले की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यहां पर स्वास्थ्य सेवाएं एक चुनौती है। एएचएस 2012-13 के अनुसार सिरोही जिले में नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) 44 प्रति 1000 जीवित जन्म है, शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) 65 प्रति 1000 जीवित जन्म है, जिले की मातृ मृत्यु दर 222 है, 5 वर्ष तक के बच्चों की मृत्यु दर 85 प्रति 1000 जीवित जन्म है, जो कि राज्य की औसत से अधिक है। जिसके कारण जिले को उच्च प्राथमिकता वाले जिले में रखा गया है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जिला सिरोही की आबादी लगभग 10.36 लाख है। जिले में 39.73 प्रतिशत महिला और 69.98 प्रतिशत पुरूष साक्षर हैं जो कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के लिए समुदाय में जागरूकता फैलाने के लिए एक बड़ी चुनौती है। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं एवं बच्चो के अन्य राज्य एवं जिले में पलायन के कारण उनका ट्रेकिंग करना आवश्यक है, साथ ही जिले में कुपोषण की स्थिति चिंताजनक है, इन सबको ध्यान में रखते हुए विभिन्न सरकारी विभाग विशेष रूप से पंचायत राज संस्थानों, महिला एवं बाल विकास विभाग, महिला अधिकारिता विभाग, स्वच्छता कार्यक्रम एवं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत अधिकारी, कर्मचारी के बीच सहयोग स्थापित करने के लिए पुकार कार्यक्रम का संचालन किये जाने का निर्णय लिया गया है। इस कार्यक्रम के तहत प्रत्येक राजस्व गांव को 3 भागों में बांटा गया जिनके प्रभारी स्थानीय आंगनवाडी कार्यकर्ता, आशा, साथिन/सहयोगिनी/स्वच्छकर्मी को अलग अलग क्षैत्र का प्रभारी बनाया गया। इनकों प्रिन्टेड फार्म दिए गए,े जिसमें ये प्रत्येक 15 दिन में घर घर सम्पर्क के दौरान योग्य दम्पति, गर्भवती, धात्री महिलाओं एवं 0 से 2 वर्ष तक के बच्चों की सूचना एकत्रित कर अपडेट करती है। इसके पश्चात आशा एवं ए.एन.एम. इन समस्त पहचानी गई लाभार्थियों को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के साथ लाभ दिलाना सुनिश्चित करती है। इस सम्मिलित कार्यक्रम से जहंा पूर्व में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाआंे के कार्य ए.एन.एम. एवं आशा सहयोगिनी द्वारा ही किया जा रहा था, जो जिले जिनकी जिले में संख्या 992 थी, इसमे अन्य विभाग के आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, साथिन, स्वच्छताग्राही को सम्मिलित करने के पश्चात् जिले में मातृ एवं स्वास्थ्य सेवाओं के कार्य करने के लिए ये संख्या 2896 हो गई। पुकार कार्यक्रम चिकित्सा एंव स्वास्थ्य विभाग, पंचायत राज संस्थाओं, महिला एवं बाल विकास विभाग, महिला अधिकारिता विभाग एवं स्वच्छता कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है।
इसका लक्ष्य और उद्देश्य गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण करना, गर्भवती महिलाओं का 12 सप्ताह पूर्व पंजीकरण करना, महिलाओं की 4 प्रसव पूर्व जाँच करवाना, उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान, प्रबंधक एवं रेफर सुविधा उपलब्ध करवाना, संस्थागत प्रसव करवाना, सभी प्रसूताओं की एचबीएनसी विजिट सुनिश्चित करवाना, बच्चों का पूर्ण टीकाकरण करना, समस्त अति कुपोषित बच्चों की पहचान, रेफरल सुविधा और फाॅलोअप सुनिश्चित करना एवं समुदाय को कुपोषण के विरूद्व लडने के लिए जागरूक करना है।
चिन्ह्ति ग्राम स्तरीय कार्यकर्ताओं की भूमिका और उत्तरदायित्व में प्रसव पूर्व देखभाल के लिए एएनसी जांच के लिए सभी गर्भवती महिलाओं को जुटाना, सभी गर्भवती महिलाओं को 12 सप्ताहों में आंगनवाडी केन्द्र पर पंजीकृत करवाना, आंगनवाडी केन्द्र पर सभी पंजीकृत गर्भवती महिलाओं का रिकार्ड रखना, गर्भवती महिलाओं के अन्य राज्य एवं जिले में पलायन के कारण उनका ट्रेकिंग करना एवं संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित करना है।
प्रसव के दौरान संस्थागत प्रसव के लिए गर्भवती महिलाओं को प्रेरित करना, रेफरल ट्रांसपोर्ट के लिए गर्भवती महिलाओं की सहायता करना, अपने क्षेत्र के सभी प्रसवों की ट्रैकिंग और माॅनिटरिंग, सभी प्रसव का रिकाॅर्ड बनाए रखना एवं घरो में किचन गार्डन स्थापित करना है तथा प्रसव पश्चात् देखाभाल के लिए सभी स्तनपान कराने वाली महिला को स्तनपान कराने और आशा को एचबीएनसी विजिट के लिए सहयोग प्रदान करना, सभी माताओं पीएनसी विजिट को पूरा करने के लिए आशा को सहयोग करना एवं एसएनसीयू व एमटीसी से डिस्चार्ज बच्चों की सामुदायिक व संस्था आधारित फाॅलोअप करना है।
इसी प्रकार टीकाकरण में सभी माताओं और परिवार के सदस्यों को नियमित टीकाकरण के बारे में जानकारी देना, नियत सूची के अनुसार सभी शिशुओं और बच्चों के लिए ट्रैकिंग और फाॅलोअप, टीकाकरण में आशा और एएनएम का सहयोग करना एवं गर्भवती महिलाओं के अन्य राज्य एवं जिले में पलायन के कारण उनका ट्रेकिंग करना।
तैयारी की गई कार्ययोजना से समस्त सहयोगी विभाग के के अधिकारियो, कार्मिको को प्रशिक्षित किया जाना था। इसके लिए कोविड नियमांे की पालना करते हुए जिला स्तर पर सहयोगी विभाग के जिला स्तरीय एवं ब्लाॅक स्तरीय अधिकारियो की वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से जिला कलक्टर द्वारा वीडियो कांन्फ्रेसिंग ली गई। सेक्टर स्तरीय चिकित्सा अधिकारी, सुपरवाईजर, ए.एन.एम. की कोविड नियमो की पालना करते हुए वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से प्रशिक्षण करवाया गया। ग्राम स्तरीय चिन्ह्ति कार्मिकों को सेक्टर स्तर पर कोविड नियमों की पालना करते हुए 20-20 संभागियांे को सेक्टर स्तर पर चिकित्सा अधिकारियों द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया गया जबकि 325 एएनएम, 779 आंगनवाडी कार्यकर्ताओं, 667 आशा सहयोगिनी, 753 सहायिका, 294 स्वच्छता ग्राही, 78 साथिन को प्रशिक्षित किया गया।
पर्यवेक्षण एवं समीक्षा के तहत नियिमत रूप से प्रत्येक सेक्टर बैठक, ब्लाॅक स्तरीय बैठक में योजना अनुसार कार्यों एवं प्रगति की समीक्षा की जाती है। उपखंड अधिकारी प्रतिमाह योजना अनुसार कार्यों की समीक्षा करते है। क्षेत्र भ्रमण के दौरान योजना अनुसार निर्धारित प्रपत्रों एवं कार्य विभाजन का निरीक्षण, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी (प.क./स्वा.), जिला आर.सी.एच.ओ., उपखण्ड अधिकारी, विकास अधिकारी, बीसीएमओ, तहसीलदार, डीपीएम (एनएचएम), यू.पी.एम.(एन.यू.एच.एम.), जिला आशा समन्वयक द्वारा की जाती है एवं प्रतिमाह जिला स्वास्थ्य समिति अथवा विभागीय समीक्षा के दौरान जिला कलक्टर महोदय द्वारा इसकी समीक्षा की जाती है।
परिणाम (जिला स्वास्थ्य सूचकांको में माह जनवरी 2021 में राज्य स्तर पर प्रथम स्थान पर रहा है) पुकार कार्यक्रम संचालित होने के पश्चात् माह जनवरी 2021 में जिला स्वास्थ्य सूचकांको में प्रदेश में प्रथम स्थान पर रहा है, ये सूचकांक है जिनमे जिले ने पुकार कार्यक्रम संचालित होने के पश्चात् प्रगति प्राप्त की है जिसमें सुचकांक एएनसी 12 सप्ताह पूर्व माह जुलाई,2020 में 69.51 प्रतिशत के मुकाबले माह जनवरी, 2021 में 80.70 प्रतिशत, 3 एएनसी चैकअप में जुलाई में 62.14 प्रतिशत के मुकाबले जनवरी में 84.29 प्रतिशत, 4 एएनसी चैकअप में 53. 97 प्रतिशत के मुकाबले 69.08 प्रतिशत, कम वजन के नवजात जुलाई में 12.7 प्रतिशत के मुकाबले जनवरी में 11.10 प्रतिशत, पूर्ण टीकाकरण माह जुलाई में 86.7 प्रतिशत के मुकाबले जनवरी में 100 प्रतिशत एवं संस्थागत प्रसव माह जुलाई में 90.03 प्रतिशत के मुकाबले 99.4 प्रतिशत रहा है।