अकेले सफर में महिलाओं की हमसफर बनी ‘मेरी सहेली’
-कोच में पहुंचकर हालचाल पूछती हैं महिला आरपीएफ कर्मी

-छह माह में 40 हजार से अधिक महिला यात्रियों तक पहुंची सहायता
जोधपुर। अनजान रास्ता,लंबा सफर और साथ में कोई अपना नहीं। ट्रेन में अकेले यात्रा कर रही महिला के लिए ऐसे में सुरक्षा का भरोसा काफी मायने रखता है। सफर के बीच जब महिला आरपीएफ कर्मी कोच में पहुंचकर हालचाल पूछती हैं और जरूरत पड़ने पर मदद का भरोसा दिलाती हैं, तो मन की झिझक कम होती है। रेलवे की ‘मेरी सहेली’ योजना इसी भरोसे के साथ अकेले सफर कर रही महिलाओं की हमसफर बन रही है।
उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल में इस वर्ष प्रथम छमाही अप्रैल से सितंबर 2026 तक छह माह के दौरान 2 हजार 384 ट्रेनों में इस योजना का क्रियान्वयन किया गया। इस दौरान 55 हजार 676 एकल महिला यात्रियों की पहचान की गई, जिनमें से 40 हजार 192 को यात्रा के दौरान कम से कम एक बार सहायता या विशेष ध्यान दिया गया।
योजना के तहत लंबी दूरी की ट्रेनों में अकेले यात्रा कर रही महिलाओं की जानकारी संबंधित स्टेशनों पर रेलवे सुरक्षा बल को भेजी जाती है। ट्रेन के स्टेशन पर पहुंचने पर महिला आरपीएफ कर्मी कोच में जाकर यात्रियों से संवाद करती हैं और सुरक्षा संबंधी जरूरी जानकारी देती हैं। किसी संदिग्ध गतिविधि,छेड़छाड़ या सामान संबंधी परेशानी पर मदद के लिए संपर्क करने का भरोसा भी दिलाया जाता है।
यह सीधा संवाद महिला यात्रियों को अपनी परेशानी बताने और जरूरत के समय सहायता मांगने का अवसर देता है। सफर के दौरान सुरक्षा को लेकर आश्वस्त करना इस पहल का अहम उद्देश्य है।
छह माह में 56,524 नोटिफिकेशन
अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच मेरी सहेली टीमों को 56 हजार 524 नोटिफिकेशन भेजे गए, जिनमें से 40 हजार 672 पर अनुपालन किया गया। ये आंकड़े योजना के तहत यात्रियों तक पहुंच बनाने और सहायता संबंधी गतिविधियों का दायरा दर्शाते हैं।
सुरक्षा के साथ अपनत्व का एहसास
जोधपुर मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी के दिशा-निर्देशन और वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त नीतीश कुमार के नेतृत्व में अभियान संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य अकेले सफर कर रही महिलाओं को जरूरत के समय सहायता उपलब्ध कराना और उनकी यात्रा को अधिक सुरक्षित व सहज बनाना है, ताकि वे भरोसे के साथ अपने गंतव्य तक पहुंच सकें।