पत्रकार कौन? अब कैमरा नहीं, जवाबदेही तय करेगी पहचान
पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर के बीच अंतर तय करने की तैयारी! संभावित नए मापदंडों को लेकर मीडिया जगत में मंथन, पत्रकार संगठनों ने पारदर्शी व्यवस्था और स्वतंत्र पत्रकारिता की सुरक्षा की उठाई मांग

नई दिल्ली। डिजिटल क्रांति ने पत्रकारिता का स्वरूप तेजी से बदल दिया है। मोबाइल कैमरा, सोशल मीडिया और लाइव प्रसारण ने समाचारों को आम लोगों तक पहुंचाना पहले से कहीं आसान बना दिया है। लेकिन इसी बदलाव के बीच एक गंभीर सवाल भी खड़ा हो गया है—क्या कैमरा और माइक्रोफोन लेकर घटनास्थल पर पहुंचने वाला हर व्यक्ति पत्रकार है?
आंदोलनों, प्रदर्शनों और सार्वजनिक आयोजनों में बड़ी संख्या में सोशल मीडिया कंटेंट तैयार करने वाले लोगों की मौजूदगी के बीच वास्तविक पत्रकारों की पहचान को लेकर बहस तेज हो रही है। इसी पृष्ठभूमि में सरकार स्तर पर पत्रकारों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर या कंटेंट क्रिएटर के बीच अंतर स्पष्ट करने के लिए संभावित मापदंडों पर विचार किए जाने की चर्चा है। हालांकि, अभी तक इस संबंध में किसी अंतिम नीति अथवा नियम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
वायरल वीडियो नहीं, तथ्यपरक रिपोर्टिंग बने पहचान
सोशल मीडिया ने खबरों की पहुंच और गति दोनों को बढ़ाया है, लेकिन इसके साथ अपुष्ट सूचनाओं और बिना पर्याप्त तथ्य-जांच के प्रसारित किए जाने वाले वीडियो एवं पोस्ट की चुनौती भी सामने आई है।
कई बार घटनास्थल से बनाए गए वीडियो को समाचार का रूप देकर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जाता है। ऐसी स्थिति में तथ्य और राय के बीच अंतर धुंधला पड़ सकता है। इसका असर उन पत्रकारों की विश्वसनीयता पर भी पड़ता है, जो किसी मीडिया संस्थान की संपादकीय जिम्मेदारी के तहत समाचारों का संकलन और प्रकाशन करते हैं।
पहचान तय हो, लेकिन पत्रकारिता की स्वतंत्रता भी सुरक्षित रहे
पत्रकारों की पहचान को लेकर किसी पारदर्शी व्यवस्था की आवश्यकता पर चर्चा हो सकती है, लेकिन ऐसी व्यवस्था पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर अंकुश का माध्यम नहीं बननी चाहिए।
यदि भविष्य में कोई नया मापदंड तैयार किया जाता है तो उसमें यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि वास्तविक और सक्रिय पत्रकार केवल प्रशासनिक औपचारिकताओं या तकनीकी कमियों के कारण समाचार कवरेज से वंचित न हों।
शेख रईस अहमद बोले—पत्रकारिता कैमरे से नहीं, जिम्मेदारी से पहचानी जाती है
अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति, नई दिल्ली के राष्ट्रीय महासचिव शेख रईस अहमद ने कहा कि डिजिटल युग में पत्रकार और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर के बीच स्पष्ट पहचान की व्यवस्था समय की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन इसके साथ पत्रकारिता की स्वतंत्रता और अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की असली पहचान तथ्य, जिम्मेदारी, निष्पक्षता और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता से होती है। सरकार यदि पत्रकारों की पहचान को लेकर कोई नया मापदंड तैयार करती है तो पत्रकार संगठनों और मीडिया प्रतिनिधियों के साथ व्यापक संवाद किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वास्तविक पत्रकार को सम्मान, सुरक्षा और स्वतंत्र रूप से समाचार संकलन का अधिकार मिलना चाहिए। वहीं पत्रकारिता के नाम पर अपुष्ट अथवा भ्रामक सामग्री प्रसारित करने वालों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। पत्रकारों की सुरक्षा और पत्रकारिता की विश्वसनीयता—दोनों को साथ लेकर चलना लोकतंत्र के हित में है।
फॉलोअर और व्यूज नहीं बन सकते पत्रकारिता की कसौटी
संभावित व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह रहेगा कि पत्रकार की पहचान किस आधार पर तय की जाएगी। केवल सोशल मीडिया फॉलोअर, व्यूज, लाइक या किसी वायरल वीडियो को पत्रकारिता की कसौटी बनाना उचित नहीं होगा।
किसी मीडिया संस्थान से जुड़ाव, नियमित समाचार प्रकाशन, तथ्यपरक रिपोर्टिंग, संपादकीय जिम्मेदारी, जनहित से जुड़े मुद्दों पर सक्रियता और पत्रकारिता को पेशेवर रूप से अपनाने जैसे पहलुओं को पहचान के आधार में शामिल किया जा सकता है।
फर्जी पहचान पर रोक के साथ वास्तविक पत्रकारों को सुरक्षा मिले
मीडिया जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि पत्रकारों की पहचान को लेकर कोई नई व्यवस्था बनती है तो उसका उद्देश्य पत्रकारों को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि वास्तविक पत्रकारिता की पहचान, विश्वसनीयता और सुरक्षा को मजबूत करना होना चाहिए।
स्पष्ट और पारदर्शी नियमों से एक ओर फर्जी पत्रकारिता के नाम पर होने वाली गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सकता है, वहीं दूसरी ओर वास्तविक पत्रकारों को घटनास्थल पर काम करने के दौरान अधिक स्पष्ट अधिकार और सुरक्षा मिल सकती है।
बड़ा सवाल यही—पत्रकारिता की पहचान लोकप्रियता से होगी या जिम्मेदारी से?
डिजिटल दौर में पत्रकारिता के सामने चुनौती केवल तकनीक की नहीं, बल्कि विश्वसनीयता की भी है। आने वाले समय में यदि पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर के बीच औपचारिक अंतर तय करने की दिशा में कदम बढ़ता है, तो सबसे जरूरी होगा कि स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी, अधिकारों के साथ जवाबदेही और तकनीक के साथ तथ्यपरकता को प्राथमिकता दी जाए।
क्योंकि लोकतंत्र में पत्रकारिता की ताकत केवल इस बात में नहीं है कि खबर कितनी तेजी से वायरल हुई, बल्कि इस बात में है कि खबर कितनी सच, निष्पक्ष और जनहित में थी।