अधिस्वीकृत पत्रकारों से टोल वसूली पर रोक लगे
2007 की अधिसूचना का आदेश पुनः प्रसारित हो - राजस्थान पत्रकार संस्थान

जोधपुर। राजस्थान में अधिस्वीकृत पत्रकारों के निजी वाहनों से राज्य के राजमार्गों पर सफर करने के दौरान टोल नाकों पर टोल वसूले जाने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। कई टोल नाकों पर अधिस्वीकृत पत्रकारों का परिचय पत्र दिखाने के बावजूद टोल कर्मियों द्वारा मनमाने तरीके से टोल वसूला जा रहा है, जो कि सरकारी आदेशों की सीधी अवहेलना है और किसी भी दृष्टि से न्यायसंगत नहीं है। इसको लेकर पत्रकारों में भारी रोष व्याप्त है।
इस गंभीर समस्या को देखते हुए राजस्थान पत्रकार संस्थान ने अब मोर्चा संभाल लिया है। संस्थान के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार नरेन्द्र कुमार लोढ़ा ने राजस्थान राज्य राजमार्ग प्राधिकरण के अतिरिक्त मुख्य अभियंता को मेल भेजकर पूरे मामले से अवगत कराया है। साथ ही अतिशीघ्र कार्यवाही के लिए इस पत्र की प्रतिलिपि अध्यक्ष, राजस्थान राज्य राजमार्ग प्राधिकरण तथा मुख्य सचिव, राजस्थान सरकार को भी भेजी गई है। संस्थान ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार द्वारा अधिस्वीकृत पत्रकारों के हित में वर्षों पहले ही टोल मुक्त व्यवस्था लागू की जा चुकी है, फिर भी जमीनी स्तर पर उसका पालन नहीं हो रहा है।
राजस्थान पत्रकार संस्थान ने अपने पत्र में बताया है कि 15 जून, 2007 को तत्कालीन राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी कर सांसदों, विधायकों के साथ-साथ प्रदेश के अधिस्वीकृत पत्रकारों के निजी वाहनों को भी राज्य के राजमार्गों पर टोल टैक्स से पूर्णतः मुक्त कर दिया था। यह अधिसूचना आज भी राज्य के अधिकांश राजमार्ग टोल नाकों के सूचना पट्ट पर अंकित है। वर्षों से अधिस्वीकृत पत्रकारों को इस अधिसूचना के तहत लगातार टोल में छूट मिलती रही है, लेकिन पिछले कुछ समय से कई टोल नाकों पर इस आदेश की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। टोल संचालकों द्वारा अधिस्वीकरण कार्ड को मानने से इंकार कर दिया जाता है और जबरन टोल वसूली की जाती है।
राजस्थान पत्रकार संस्थान के अध्यक्ष नरेन्द्र कुमार लोढ़ा ने बताया कि अधिस्वीकृत पत्रकारों के निजी वाहन टोल टैक्स से पूर्ण रूप से मुक्त होने के बावजूद टोल नाकों पर उनसे टोल वसूलना नियम विरुद्ध है। इससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि जब पत्रकार मौके पर मौजूद अधिकारियों का ध्यान सरकारी अधिसूचना की ओर आकर्षित कराते हैं तो उनकी सुनवाई नहीं की जाती, बल्कि कई जगह टोल कर्मियों द्वारा अभद्र व्यवहार किया जाता है और उच्च अधिकारियों द्वारा इस मनमानी को मौन संरक्षण दिया जा रहा है। यह स्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में पत्रकारों को समाचार संकलन के लिए दिन-रात अपने निजी वाहनों से राज्य के कोने-कोने में जाना पड़ता है, ऐसे में उन्हें टोल पर रोकना और धन वसूलना उनके कर्तव्य निर्वहन में बाधा उत्पन्न करने जैसा है। इसी को लेकर राजस्थान पत्रकार संस्थान ने राजस्थान राज्य राजमार्ग प्राधिकरण के उच्च अधिकारियों से पुरजोर निवेदन किया है कि राज्य के अधिस्वीकृत पत्रकारों से राज्य के राजमार्गों पर की जा रही जबरन टोल वसूली पर तुरंत रोक लगाई जाए और 15 जून, 2007 की अधिसूचना के अनुसार राज्य के सभी राजमार्ग टोल नाकों को अधिस्वीकृत पत्रकारों को टोल मुक्त रखने का आदेश पुनः जारी किया जाए।
साथ ही जारी किए गए आदेश की एक प्रति राजस्थान पत्रकार संस्थान को भी शीघ्र भेजी जाए ताकि प्रदेश के सभी पत्रकारों तक इसकी जानकारी पहुंचाई जा सके। संस्थान ने अपने मेल के साथ 15 जून, 2007 की मूल गजट अधिसूचना की प्रति भी प्रेषित की है ताकि किसी प्रकार के भ्रम की गुंजाइश न रहे। संस्थान ने भरोसा जताया है कि मुख्य सचिव और राजमार्ग प्राधिकरण इस जनहित के मामले में त्वरित और सकारात्मक कार्यवाही करते हुए पत्रकारों को राहत प्रदान करेंगे।