डिसएबिलिटी की नहीं एबिलिटी की बात की जानी चाहिऐ – प्रो. वडेरा
दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का सम्पूर्ति कार्यक्रम प्रज्ञा निकेतन छात्रावास में आयोजित
जोधपुर। जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के लोक प्रशासन विभाग व छात्र सेवा मण्डल के संयुक्त तत्वाधान में विकलंाग पुर्नवास प्रशिक्षण संस्थान, इनर व्हील क्लब, रोटरी क्लब संस्कार के सहयोग से दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का सम्पूर्ति कार्यक्रम प्रज्ञा निकेतन छात्रावास में आयोजित किया गया। कार्यषाला की निदेषक प्रो मीना बरडिया ने बताया कि इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डी. आर. डी. ओ. के पूर्व निदेषक एवं आई आई टी जोधपुर के उप निदेषक प्रो. सम्पत वडेरा थे। प्रो. वडेरा ने कहा कि डिसएबिलिटी सभी में होती है। डिसएबिलिटी की नहीं एबिलिटी की बात की जानी चाहिए। दिव्यांगजन स्वयं समाज में अन्य का सषक्तिकरण करने की हिमाकत रखते है।कार्यक्रम की अध्यक्षता जे एन वी यू के कला संकाय की अधिष्ठाता प्रो. सरोज कौषल द्वारा की गयी। प्रो. कौषल ने अष्टावक्र का उदाहरण देते हुए बताया कि विकृति कोई बाधा नही है।
दिव्यांगों में ज्योति होती है, जो उन्हें असाधारण बनाती है। गेस्ट ऑफ ऑनर ईएमएमआरसी जे एन वी यू के निदेषक प्रो. प्रवीण गहलोत थे। इन्होने विष्वविद्यालय की दिव्यांगों में सकारात्मक सोच को व्यक्त किया। ऑनलाइन माध्यम से किस प्रकार दिव्यांगजन निरंतर अपना ज्ञान संवर्धन कर सकते है। प्रो. गहलोत ने आने वाले समय में दिव्यागों के लिए एक साथ दो डिग्री की सुविधा प्रदान करने की बात कही। कार्यषाला के विषिष्ट अतिथि लॉयनस क्लब जोधपुर के रीजन चेयर पर्सन राज कुमार जैन थे। समाज सेवक श्रीमान राजकुमार जी जैन ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन से विद्यार्थियों को प्रोत्साहन दिया। डॉ. सीमा गौड़, की-नोट स्पीकर रही। डॉ. गोड, जो कि स्पेषल एजुकेटर एवं रीहेबिलिटेषन काउंसलर हैं ने बताया कि परिवार या स्वयं में किसी भी प्रकार की विक्लांगता को स्वीकार करना पहला एवं महत्वपूर्ण चरण है। पॉजीटिव ऐटीट्यूड़ के साथ ही दिव्यांगजन का विकास एवं सषक्तिकरण संभव है। दो दिसवीय कार्यषाला के द्वितीय दिवस के प्रथम सत्र में प्रो ओ.पी. टाक व प्रो. सुनील आसोपा ने प्रतिभागियों से विचार साझा किए प्रो. आसोपा ने कहा कि विधि के शस्त्र द्वारा ही विक्लांगता की बेड़ियों से मुक्ति पाई जा सकती है। डॉ दिव्या सिंह राजपुरोहित, डॉ. मनीष कन्चन गोदारा ने अपने विचार व्यक्त किए। प्रज्ञा निकेतन के पूर्व छात्र श्यामदेव विष्नोई, प्रधानाचार्य ने विद्यार्थियों को हौसला रखते हुए निरन्तर गन्तव्य की ओर बढते रहने की प्रेरणा दी। इसी कार्यषाला में एल्युमीनाई मीट का भी आयोजन किया गया जिसमें प्रज्ञा निकेतन के 1999 के प्रथम बैंच से लेकर अभी तक के विद्यार्थी सम्मिलित हुए। यहॉ से पढ़े जिन विद्यार्थियों ने स्वयं को समाज में विभिन्न प्रतिष्ठित जगहों पर आचार्य, प्राचार्य,, लिपिक आदि के पदों पर स्थापित किया है, उनका प्रज्ञा निकेतन प्रांगण में सम्मान सत्कार किया गया। एल्युमीनाई मीट में गीत संगीत एवं मिमिक्रि प्रस्तुत कर दिव्यांगजनो ने अपनी प्रतिभाओं का प्रदर्षन किया। कार्यषाला के कन्वीनर डॉ. दिनेष कुमार गहलोत ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यषाला की को कन्वीनर डॉ. हेमलता जोषी ने मंच संचालन किया। डॉ. मीता सोंलकी, डॉ. सविता कष्यप, प्रदीप परिहार एवं दिलीप सोलंकी ने कार्यक्रम संयोजन में योगदान दिया।