जन्माष्टमी महोत्सव पर खरीद कर लाये मौर पंख और बांसुरी
जोधपुर। अरुणोदय ज्योतिष हस्तरेखा व वास्तु शोध संस्थान की अध्यक्ष डॉ सपना अरुण सारस्वत ने बताया कि इस वर्ष 2023 में अष्टमी तिथि 6 सितम्बर को दोपहर 3.37 बजे शुरु होगी तथा 7 सितम्बर शाम 4.14 बजे तक रहेगी। 6 सितम्बर सुबह 9.20 बजे रोहिणी नक्षत्र शुरु होगा तथा अगले दिन 7 सितम्बर की सुबह 10.25 बजे तक रहेगा। शास्त्रों के अनुसार श्री कृष्ण का जन्म रात्रि के समय रोहिणी नक्षत्र में हुआ था ऐसे में इस बार जन्माष्टमी पर्व 6 सितम्बर को मनाई जाएगी। जन्माष्टमी पर्व का त्योहार आमतौर पर दो दिन मनाया जाता है ग्रहस्थ लोग 6 सितम्बर को जन्माष्टमी मनाएंगे और वैष्णव सम्प्रदाय में 7 सितम्बर को जन्माष्टमी मनाई जाएगी।
पुजा का मुहूर्त व समय 6 सितम्बर को रात्रि 12 बजे से 12.48 बजे तक श्रेष्ठ।
सारस्वत ज्योतिषाचार्या बताती है कि इस दिन दो मौर पंख और दो बांसुरी एक साथ खरीद कर लाने से घर में सुख-समृद्धि और प्रेम बना रहता है।जिन घरों में अगर किसी प्रकार का वास्तु दोष है तो उन्हें भी लाने चाहिए, जिन पति पत्नी के बीच अक्सर अन बन चलती रहती है उन्हें भी लाने चाहिए।
जिनके व्यापार व्यवसाय में दिक्कत हो रही है उन्हें अपने आफिस में लाकर रखने चाहिए। मौर पंख और बांसुरी ये सुख-समृद्धि और प्रेम के प्रतीक हैं।साथ लक्ष्मी वही आती है जहां प्रेम और शान्ति रहती है जिन घरों में हर वक्त लडाई झगडे अनबन मनमुटाव बना रहता है वहां लक्ष्मी नहीं रुकती। मौर पंख और बांसुरी दोनो जहां रहते हैं वहां हसी खुशी का महोल बना रहता है।
वास्तु के अनुसार मौर पंख और बांसुरी को इन स्थानों पर रखें
1– बच्चों के कमरे में मोर पंख रख सकते हैं
2– मोर पंख और बांसुरी दोनो शयनकक्ष में रख सकते हैं
3– उतर दिशा, ईशान्य कोण, और पशि्चम दिशा में रख सकते है
4– घर में जिस स्थान पर बैठकर ज्यादा बातचीत या डिसीजन लिए जाते है उस जगह पर भी रख सकते हैं।
5– घर और आफिस में पुजा स्थान पर भी रख सकते हैं।
6– बडे बुजुर्ग के कमरे में भी रख सकते हैं।
7– जो व्यक्ति अगर ज्यादा बीमारी से पीड़ित हैं उनके कमरे में भी रख सकते हैं।