’’मलका नसीम की शेरी कायनात’’ का लाकार्पण
शरीके दैरो हरम था न जाने क्या क्या था
जोधपुर। ’’मलका नसीम हमारे सूबे की मोतबर शाइरा हैं और उनकी शाइरी में जि़न्दगी के कई रंग मिलते हैं…’’ इन ख़्यालात का इज़हार ख्यातनाम शाइर और आलोचक शीन काफ निज़ाम ने बज़्मे उर्दू और सरोकार के तत्वावधान में मलका नसीम की शेरी कायनात के लोकार्पण अवसर पर होटल चन्द्रा इंपीरियल रातानाडा में आयोजित समारोह में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किये जबकि समारोह की अध्यक्षता करते हुए कश्मीर के विद्वान प्रोफेसर मोहम्मद ज़मा आज़ुर्दा ने नसीम के लहजे की ख़ूबी का जि़क्र किया।
कार्यक्रम संयोजक एवं राजस्थान उर्दू अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. निसार राही ने बताया कि देश भर से जोधपुर में आये हुए उर्दू अदब के विद्वानों के बीच आयोजित इस समारोह में उर्दू अकादमी के अध्यक्ष डॉ. हुसैन रज़ा ख़ान ने अकादमी के पूर्व सचिव मरहूम मोअज़्ज़म अली द्वारा अकादमी को दी गई खि़दमात का जि़क्र किया। इस अवसर पर दिल्ली के ख़ालिद अल्वी ने कहा कि नसीम के यहां ख़ुद के लहजे को तलाश करने की कोशिश मिलती है, ख़ालिद अशरफ़ ने कहा कि नसीम ने मुशायरों से ख़ुद को बचाते हुए अपनी पहचान बनाई है तथा मैयार से समझौता नहीं किया। उर्दू के विद्वान मुईद रशीदी ने नसीम के शेरों की व्याख्या करते हुए उनमें विशिष्ठ पैकरों, रूपकों का जि़क्र किया। युवा साहित्यकार डॉ. आलिया ने लोकार्पित पुस्तक पर तब्सिरा पढा। इस अवसर पर मलका नसीम ने गज़़ल के अश्आर प्रस्तुत करते हुए कहा कि हर आसतां पे झुकाए जबीं क़ीदत से, शरीके दैरो हरम था न जाने क्या क्या था.., जबीं पे आई शिकन हंस के टाल देता था, कभी तो मैं, कभी हम था, न जाने क्या क्या था। समारोह का संचालन डॉ. निसार राही ने किया तथा अन्त में उर्दू अकादमी के कोषाध्यक्ष बृजेश अम्बर ने आभार व्यक्त किया।