गुरु पूर्णिमा महोत्सव में युगपुरुष गुरुदेव की महिमा गाई
जोधपुर। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा 3 जुलाई 2023 को अमरगढ़ रिजॉर्ट, जोधपुर में, सुबह 10 से 2 बजे तक, श्री गुरु पूर्णिमा महोत्सव मनाया गया।
भारतीय संस्कृति के अध्यात्म से पूरित यह पर्व आषाढ़ शुल्क पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन ब्रह्मज्ञान प्रदाता सतगुरु के प्रति शिष्य अपना आभार व्यक्त करते हैं। परन्तु यह जानना भी आवश्यक है कि भारत में यह पूर्णिमा किन गुरु की महिमा का गुणगान कर रही हैं।
कार्यक्रम का आरम्भ ब्रह्मज्ञानी वेदपाठियों द्वारा वेद मन्त्र उच्चारण से हुआ व् गुरु पूजन विधि को भारतीय संस्कृति के अनुरूप पूर्ण किया गया।
सन्त व् भक्त समाज ने गुरु महिमा से ओतप्रोत सूंदर भक्ति रचनाओं का गायन किया, जिसके द्वारा सम्पूर्ण वातावरण में भक्ति तरंगें संचारित हो गयी। कार्यक्रम में अतिथिगणों के रूप में घनश्याम ओझा जी (पूर्व महापौर), श्री जे. पी. गर्ग ( जॉन चेयरमैन, लायंस क्लब जोधपुर सेंट्रल) एवम् अन्य लायंस क्लब के सदस्य, राम किशोर कंसारा जी (कंसारा बेरिंग), इन सभी ने भी पधार कर गुरु कृपा प्राप्त की।
दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी शैब्या भारती जी ने विचारों के माध्यम से समझाया कि गुरु पूर्णिमा दिवस पर यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि किस गुरु की पूजा करना सार्थक है। उन्होंने समझाया कि शास्त्रों में वर्णित है- “अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम्। तत् पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः।।” अर्थात् वे गुरु जो सूक्ष्म से सूक्ष्म अणु जिसे खंडित नहीं किया जा सकता और मंडलाकार में व्याप्त सत्ता है, उस दिव्यता का जो दर्शन करवा दें ऐसे सतगुरु को नमन हैं।
साध्वी जी ने आगे समझाया कि जब जीव पूर्ण सतगुरु की शरण आता है और ज्ञानमार्ग पर बढ़ना आरम्भ करता है तब सतगुरु अपनी कृपा द्वारा उसे शीघ्र ही अध्यात्म की बहुमूल्य निधियां प्रदत्त करते हैं। ऐसे दिव्य गुरु का दर्शन शिष्य के कोटि जन्मों के पापों को समाप्त कर देता है। साथ ही उन्होंने समझाया कि इस मार्ग पर बढ़ते हुए साधक को धैर्य, सद्चरित्र आदि सद्गुणों को धारण करना होता है, तभी वह ज्ञान का पूर्ण लाभ ले सकता है।
कार्यक्रम में संस्थान के विभिन्न सामाजिक प्रकल्पों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जैसे मंथन प्रकल्प जिसमे अभावग्रस्त बच्चों को सम्पूर्ण शिक्षा के साथ ब्रह्म ज्ञान द्वारा भारतीय वैदिक संस्कृति से ओतप्रोत किया जा रहा है। संस्थान का कामधेनु प्रकल्प जिसमे गायों की नस्ल सुधार पर कार्य चल रहा है। युवा शक्ति के लिए YPSS युवा संगठन और एक निशुल्क मेडिकल कैंप भी लगाया गया। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित साधकों ने विश्व शांति हेतु ध्यान प्रक्रिया में भाग लिया, तदुपरान्त मंगल आरती का सत्र रहा। भक्त- श्रद्धालुओं के लिए भण्डारे की व्यवस्था रही।