गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति का रजत जयंती महोत्सव शुरू
जोधपुर। संत रामसुखदास महाराज की प्रेरणा से स्थापित गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति का रजत जयंती समारोह आज से शुरू हो गया। समारोह के तहत शनिवार को सुबह जनजागरण रैली निकाली जाएगी।
गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामकिशोर तिवाड़ी व राष्ट्रीय महामंत्री श्यामसुन्दर मंत्री ने बताया कि कन्या भू्रण हत्या और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं कार्यक्रम की अलख 25 वर्ष पूर्व ही रामसुखदास महाराज ने रख दी थी। आठ अक्टूबर को सुबह एक जन जागरण रैली का आयोजन किया गया जो सोमानी कॉलेज से रवाना होकर हाउसिंग बोर्ड पहला पुलिया, ज्वाला विहार के रास्ते वापस सोमानी कॉलेज आएगी। इस रैली को डीसीपी ईस्ट डॉ. अमृता दुहन एवं उपखण्ड अधिकारी अपूर्वा परवाल हरी झण्डी दिखाकर रवाना करेंगे। दोपहर में रजत जयंती महोत्सव एवं राष्ट्रीय संकल्प अधिवेशन का आयोजन होगा। जिसमें रिटायर्ड आईएएस रतन लाहोटी मुख्य अतिथि होंगे व संत आनन्द ब्रह्मचारी अध्यक्षता करेंगे। इसके अलावा मुख्य वक्ता योगी रमननाथ, राष्ट्र-संत व प्रबुद्ध चिंतक चन्द्रप्रभ, सुरेश राठी, डॉ. अर्पिता कक्कर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।
संस्था के अध्यक्ष कमल किशोर चांडक व महानगर महामंत्री रामानन्द काबरा ने बताया कि 8 अक्टूबर की शाम 5 बजे भ्रूण हत्या के दुष्प्रभाव पर लघु फिल्म एवं प्रदर्शनी का आयोजन किया जायेगा एवं रात्रि 8 बजे प्रसिद्ध भजन गायक रामकिशोर दाधीच की भजन संध्या का कार्यक्रम होगा। वहीं 9 अक्टूबर को प्रात: 9 बजे आरएएस प्रमुख के क्षेत्रीय प्रचारक प्रमुख नंदलाल मंत्री के मार्गदर्शन में कार्य समिति की बैठक एवं समापन समारोह का आयोजन होगा।
पे्रस वार्ता को संबोधित करते हुए गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामकिशोर तिवाड़ी ने बताया कि गर्भपात त्रस्त मानवता का विषय है, जबकि मानव जीवन विश्व की एक अद्भुत घटना है, किन्तु गर्भपात के द्वारा निर्दोष व स्वस्थ शिशु को जन्म से पूर्व ही मिटा कर प्रकृति के आधारभूत सिद्धांत एवं पर्यावरणीय संतुलन का पोर हनन किया जा रहा है। अहिंसा के पुजारी भारत देश में जिस तरह से सफाई (गर्भपात) के नाम पर हिंसा का तांडव चल रहा है और माता की पवित्र कोख में पल रहे जीव को टुकड़े-टुकड़े कर निकालने का दानवी कृत्य हो रहा है। अमेरिका सहित अनेक राष्ट्र गर्भपात को विनाशकारी मानते हुए कानून बनाकर इसे रोकने के कारगर उपाय करने में जुटे हैं परन्तु हमारा नेतृत्व इस जघन्य अपराध को सख्त कानून संसद में बनाने के नाम पर मौन है ? यह मानव जीवन जन्म के साथ ही प्रारम्भ नहीं होता है बल्कि जन्म के समय तो हम 9 माह के हो चुके होते हैं, अत: गर्भावस्था में इस नन्नों प्राणी को किसी भी स्तर पर मिटाना स्पष्टत: एक मानव जीवन को समाप्त करना है। यह एक ऐसी आवरण हत्या है जिसमें यह अजन्मा प्राणी अपनी माता की कोख के अन्दर शल्य औजारों से जकड़ा हुआ जीवन के लिये क्रंदन भरा संघर्ष करता है।