रात्रिकालीन सामुहिक गुरू इकतीसा के पाठ में उमड़ रही है श्रद्धालुओं की भीड़
45 आगम महापूजन का दो दिवसीय अनुष्ठान हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न।
बाड़मेर। खरतरगच्छ की राजधानी बाड़मेर नगर में चल रहे निजानंदी चातुर्मास के अन्तर्गत परम पूज्य मुनिराज श्री विवेकसागरजी म.सा. आदि ठाणा 4 की पावन निश्रा में स्थानीय जिनकांतिसागरसूरि आराधना भवन में दो दिवसीय 45 आगम महापूजन का आयोजन किया गया।
श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ, चातुर्मास समिति बाड़मेर के सदस्य गौतमचंद डूंगरवाल व बंशीधर चौपड़ा ने बताया कि दो दिवसीय आगम पूजन के प्रथम दिन 11 अंगसूत्रों व 12 उपांगसूत्रों एवं दूसरे दिन रविवार को 10 प्रकीर्णसूत्र, 6 छेदसूत्र, 4 सूत्र एवं नंदीसूत्र व अनुयोगद्वार इस तरह कुल 45 आगमों की विभिन्न क्रियों के माध्यम से पूजन किया गया। सर्वप्रथम विभिन्न अनाजों के द्वारा मांडला बनाया गया तथा परमात्मा के समक्ष जल, चंदन, पुष्प, धूप, दीपक, अक्षत, नैवेद्य, फल आदि समर्पित कर विभिन्न मुद्राओं के माध्यम से पूजन किया गया। पूजन के अंतिम दिन 108 दीपक की महाआरती की गई। मुनि श्री विवेकसागरजी ने बताया जैन आगमों में गूढ़ रहस्य छिपे हुए है जिसे समझ पाना हर किसी मनुष्य के वश की बात नही है। जैन आगमों, विश्व की व्यवस्था, विश्व की संरचना, आहार शैली, जीवन शैली, ज्योतिष, सहित अनेकानेक विषयवस्तुओं का समावेश है। इसलिए जैन धर्म जिनागम को साक्षात प्राप्त के रूप में पूजा जाता है क्योंकि इन्ही आगमों में परमात्मा की मूलवाणी समाहित है। सम्पूर्ण विधि विधान इंदौर से पधारे अरविंदभाई चौरड़िया ने करवाया।
13 दिवसीय सामुहिक दादा गुरूदेव इकतीसा का भव्य आयोजन
मिडिया प्रभारी चन्द्रप्रकाश छाजेड़ ने बताया कि स्थानीय आराधना भवन में 13 सितम्बर से प्रतिदिन रात्रि में 8.30 बजे से 9 बजे तक 12 दिवसीय सामुहिक दादा गुरूदेव के इकतीसा भव्य आयोजन किया जा रहा है जिसमंे प्रतिदिन सैकड़ौ श्रद्धालुगण गुरूभक्ति में जुड़ते है। 12 दिवसीय गुरू इकतीसा समापन 23 सितम्बर को होगा।