आफरी में मरुप्रसार रोक पर हुई कई प्रतियोगिताएं
जोधपुर। भारत का अमृत महोत्सव पहल के तहत भारत की उपलब्धियों और पर्यावरणीय जागरूकता के प्रति समाज के विभिन्न वर्गों को जागरूक करने के उद्देश्य से कई आयोजन किए जा रहे है। इसी कड़ी में शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (आफरी) जोधपुर में कार्यक्रम आयोजित किया गया। आफरी निदेशक एमआर बालोच ने बताया कि 1947 से अब तक भारत की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक उपलब्धियों को आमजन तक पहुंचाने हेतु अमृत मंथन किया जा रहा है तथा इस कड़ी में देशभर में अनेक आयोजन किए जा रहे है।
आफरी में आयोजित कार्यक्रम में वैज्ञानिक डॉ. तरुणकांत ने इस कार्यक्रम की उपयोगिता के बारे में बताया जबकि आफरी के समूह समन्वयक (शोध) डॉ. जी. सिंह ने मरुस्थलीकरण रोकने एवं पारिस्थितिकी पुर्नस्थिरीकरण में आफरी का योगदान विषय पर विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे आफरी निदेशक एमआर बालोच ने मरुस्थलीकरण एवं उसके प्रभावों को समझाते हुए बताया कि देश का लगभग 96.4 मिलियन हैक्टेयर क्षेत्र मरुस्थलीकरण से प्रभावित है तथा इससे भूमि की उत्पादकता में कमी आती है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के कार्यक्रम के तहत 2030 तक 26 मिलियन हैक्टेयर क्षेत्र को मरुस्थलीकरण से मुक्त करने का टारगेट रखा है। बालोच ने बताया कि भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद्, देहरादून को भारत सरकार ने सेन्टर फोर एक्सीलेन्स बनाया है। कार्यक्रम में आफरी के सवाईसिंह ने मरुप्रसार रोक पर कविता पाठ किया, कार्यक्रम में इस महोत्सव के तहत् स्कूली बच्चों हेतु आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता, शोधार्थियों हेतु निबंध लेख एवं आफरी कर्मचारियों हेतु कविता पाठ प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा की गई। कार्यक्रम का संचालन कुसुम परिहार ने किया जबकि अनिल चौहान, धानाराम, रेखा दाधीच, कैलाश शर्मा ने सहयोग किया।
कविता लेखन में सवाई सिंह प्रथम रहे, निबन्ध लेखन प्रतियोगिता में विपुला व्यास, अरिहन्त लूणावत, कुमारी वर्षा गिरी क्रमश: प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय रहे। इसी प्रकार केंद्रीय विद्यालयों में आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में सोनाली प्रियदर्शिनी दास प्रथम, निहारिका गहलोत एवं अजय कुमार दुबल संयुक्त रूप से द्वितीय तथा कैलाश गोदारा एवं मानसी बालान संयुक्त रूप से तृतीय रहे।