मिर्गी से ठीक हो चुके मरीजों को मिलेगा स्वरोजगार प्रशिक्षण
जोधपुर। निशुल्क मिर्गी शिविर की कड़ी में 271वें कैंप का आयोजन किया गया। इन कैंपों ने 22 वर्ष का सफर तय कर लिया और 23वें वर्ष में प्रवेश कर लिया। 375 मरीजों का परीक्षण कर उनको निशुल्क दवा का वितरण किया गया।
वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ. नगेन्द्र शर्मा ने बताया कि 22 वर्ष पूर्ण करने पर यह निर्णय किया गया कि अब अब इस रोग से मुक्त होने वाले मरीजों को खासतौर से महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने के लिए स्वरोजगार योजना का प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वह अपने घर पर ही घरेलू उद्योग धंधे द्वारा अपना जीवन यापन आसानी से कर सकें। इन मरीजों के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि जब कभी भी ये किसी भी रोजगार के लिए जाते हैं तो इनको मिर्गी की बीमारी के कारण इनको कोई भी रोजगार नहीं देता इसलिए इनको मिर्गी रोग से मुक्त होने के बाद भी अपना जीवन यापन करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। इसलिए निर्णय लिया गया कि अभी मरीजों के इलाज के साथ-साथ इनको आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। इसके लिए तीन-चार एनजीओ का सहयोग लिया गया। मुख्य अतिथि के रूप में सूरसागर थाना अधिकारी प्रदीप शर्मा ने 23 वर्ष के प्रथम शिविर का उद्घाटन करते हुए शिविर को सराहा। वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ. नगेन्द्र शर्मा ने बताया कि 22 साल से लगातार करीबन 85000 से ज्यादा मरीजों का इलाज कर मिर्गी के प्रति एक सफ ल जागरूकता अभियान चलाया गया। 23वें वर्ष में यह कोशिश रहेगी कि मिर्गी से मुक्त युवाओं को भी किसी तरह का स्कील डवलपमेंट करवा कर उन को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जाएगा।