अविशान मेंढ़ों से होगा भेड़ों में नस्ल सुधार
जोधपुर। कृषि विश्वविद्यालय के अधीन प्रसार शिक्षा निदेशालय की ओर से संचालित फार्मर फस्र्ट प्रोग्राम के अतंर्गत स्थानीय भेड़ों की नस्ल सुधार के लिए भेड़पालकों को तीन अविशान मेंढ़ों का वितरण किया गया। विवि कुलपति डॉ बीआर चौधरी ने मणाई, बालरवा व बींजवाडिया के भेड़ पालकों को अविशान मेंढ़ों का वितरण किया।
निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ ईश्वरसिंह ने बताया कि फार्मर फस्र्ट प्रोग्राम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् नई दिल्ली व अटारी जोधपुर द्वारा वित्त पोषित कार्यक्रम है। जो इन गांवों में किसानों की आय वृद्धि के लिए चलाया जा रहा है। केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान अविकानगर द्वारा अविशान भेड़ विकसित की गई है, जो गैरोल, पाटनवाडी व मालपुरा के संकरण से तैयार की गई है। अविशान नस्ल मांस व ऊन दोनों के लिए पाली जाती है। पश्चिमी राजस्थान के लिए उपयुक्त पाई गई है। यह नस्ल 15-20 प्रतिशत तक अधिक ऊन उत्पादन देती है। प्रति वर्ष इन मेंढ़ों द्वारा 300 भेड़ों के संकरण का लक्ष्य रखा गया है।