मौन एकादशी प्रचुर पुण्य प्राप्ति का पावन पल है: साध्वी रत्नमालाश्री
सिरोही । ’’ मौन एकादशी प्रचुर पुण्य प्राप्ति का पावन पल है ’’ इसलिए इस दिन सुबह 6 बजे से रात्रि 12 बजे तक मौन रखने के साथ साथ कोई ना कोई तप करना चाहिए । ये विचार पावापुरी तीर्थ मे विराजित पूज्य साध्वी श्री रत्नमाला श्री जी ने ’’ मोन एकादशी ’’ पर गौशाला मे रखे गये प्रवचन मे व्यक्त किए। साध्वीश्रीजी ने कहा कि वर्ष मे यह ग्यारस बहुत बडा दिन हैं इसलिए इस दिन जो भी तप व आराधना करेगे उसका 150 गुणा पुण्य अर्जित होगा। अपनी शक्तिनुसार एकासना या उपवास कर मौन रखा जावे।
साध्वीश्री जी ने कहा कि वर्ष मे आप ओर कोई तप जप व आराधना ना कर सको तो मगशर सुद ग्यारस को एक दिन मौन रखकर तप करने से उसका बडा फल मिलता हैं ओर इस दिन किसी प्रकार का पाप कर्म करने से भी बचना चाहिए क्योकि इस दिन जो भी पाप करेगे उसका भी 150 गुणा फल मिलता है।
साध्वीश्री मुक्तिमाला श्री जी ने कहा कि कर्म क्षय करने का यह मुख्य दिवस हैं इसलिए जीवन मे जीभ को भी एक दिन विश्राम देने के लिए यह मौन एकादशी का दिन आत हैं। उन्होने कहा कि भगवान महावीर स्वामी ने भी साढे बारह वर्ष तक कठोर तप साधना कर तप व त्याग के महत्व को रेखांकित किया।
साध्वीश्रीजी की प्रेरणा से पावापुरी तीर्थ मे शुक्रवार को यात्रियो के साथ साथ भोजनशाला, गौशाला, एवं अन्य विभागो के कर्मचारी भी मौन रखेगे ओर एकासना व उपवास करने का सकंल्प प्रवचन मे लिया।
प्रारम्भ में पावापुरी ट्रस्ट के मेनेजिंग ट्रस्टी महावीर जैन ने गुरूवदंन के साथ कहा कि साध्वीश्रीजी की प्रेरणा से पर्युषण पर्व पर भी पावापुरी स्टाफ ने उपवास व प्रतिक्रमण कर एक नजीर पेश की हैं ओर मौन ग्यारस को भी इसी तरह तप कर पुण्य अर्जित करेगें।