माहे रमजान का तीसरा अशरा शुक्रवार से
- अपने परिजनों के लिए मांगेंगे जन्नत की दुआएं
सेवा भारती समाचार
जोधपुर। माहे रमजान का तीसरा और अंतिम अशरा शुक्रवार से शुरू होगा। दस रोजों का एक अशरा होता है। पहला अशरा रहमतों का, दूसरा असरा बरकतों का और तीसरा असरा मगफिरत का होता है। आज दो अशरे पूरे हो जाएंगे। शुक्रवार को तीसरा जुमा और 21वीं रात साथ होने से रोजेदारों में उत्साह है।
मदरसा फैजाने अशफाक सूरसागर के मौलाना इकरामुद्दीन सहता ने बताया कि पाक महीने रमजान में एक शबे कद्र की रात होती है। इस रात का बहुत महत्व है। यह रात कल है। माहे रमजान का तीसरा अशरा जहन्नुम से आजादी का अशरा है। रमजान के तीसरे अशरे में पांच रातें खास अहमियत रखती है। इनमें 21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं, 29वीं रातों में से कोई एक रात शबे कद्र की होती है यह रात बहुत ही अजमत वाली मुकद्दस की रात है। शबे कद्र की इबादत हजार महीनों की इबादत से बेहतर होती है। खासकर 27वीं रात को शबे कद्र की खास रात माना गया है। इन पांच रातों में कुरआन की तिलावत खास तौर से की जाती है। इन रातों में जो भी दुआएं मांगी जाती है या जो भी जिक्रो अजकार किया जाता है, जो भी इबादत की जाती है और जो भी नैक दुआएं की जाती है। अल्लाह करीम उसको कुबूल फरमाता है।
वहीं माहे के तीसरे जुमे की नमाज कल अदा की जाएगी। जुमे की नमाज को लेकर रोजेदारों में उत्साह है क्योंकि इस 21वीं रात भी है। लॉकडाउन के चलते पहले दो जुमों की तरह तीसरे जुमे को भी लोग अपने अपने घरों में रहकर नमाज अदा करेंगे और फोन व सोशल मीडिया के जरिए तीसरे जुमे की मुबारकबाद देंगे। नमाज के बाद कोरोना से निजात दिलाने के लिए दुआ मांगी जाएगी।