वैशवि सिंह ने दी 3 घंटे भरतनाट्यम की प्रस्तुति

शिवम् नाट्यालय का 42वां अरंगेत्रम सम्पन्न

जोधपुर।शिवम् नाट्यालय का 42वां अरंगेत्रम डॉ. एस एन मेडिकल कॉलेज ऑडिटोरियम में संपन्न हुआ। जिसमें वैशवी ने अपनी गुरु के साथ घुंघरू पूजा कर घुंघरू ग्रहण किए।अपनी प्रथम प्रस्तुति पुष्पांजली ताल आदितालम में की। उसके बाद अलारिपु चतुरस्य एकम ताल में व जातिस्वरम राग हेमावती में प्रस्तुत किया।

शब्दम में द्रोपदी चीर हरण पर कृष्ण लीला का भावपूर्ण अभिनय पेश किया। चिदंबरम की कविता “नल्ला शगुनम” पर आधारित वर्णम राग मलिका में एवम् पराशक्ति जननी द्वारा पदम की बारीकियों को व दुर्गा के श्रृंगार रस,वियोग रस,वीर रस और रौद्र रस को आदितालम में दिखाकर सबको भावविभोर कर दिया। राग बहाग में तिल्लाना प्रस्तुत कर खूब तालियां बटौरी। अंत में मंगलम प्रस्तुत कर शिष्या ने अपने गुरु एवम् दर्शकों को धन्यवाद कर आशीर्वाद लिया।गुरु डॉ.मंजूषा सक्सेना ने वैशवी को भारतीय संस्कृति एवम् भरतनाट्यम गुरु शिष्य परंपरा को निभाने हेतु शपथ ग्रहण करवाई।साथ ही उसे स्नातक की डिग्री प्रदान की। डॉ.मंजूषा ने अरंगेत्रम के महत्व को समझाते हुए बताया कि 2000 ईसा पूर्व भरतनाट्यम का इतिहास है और तब से अरंगेतरम की प्रथा चली आ रही है। पहले के समय में बालिकाओं को गुरुकुल में छोड़ा जाता था और वह अपनी नृत्य साधना पूरी कर राजा महाराजाओं के समक्ष गुरुओं के समक्ष अपने नृत्य की प्रस्तुति देती थी।इस प्रथा को आज भी उतनी श्रद्धा पूर्वक मनाया जाता है।यह गुरु शिष्य परंपरा का अनूठा उदाहरण है। उनकी संस्था विगत 25 वर्षों से जोधपुर में भरतनाट्यम के क्षेत्र में लगातार कार्य कर रही है। मुख्य अतिथि के रूप में फिलैंथरोपिस्ट श्री राजेंद्र परिहार,राज उपभोक्ता आयोग के सदस्य श्री लियाकत अली, लर्निंग ट्री की फाउंडर श्रीमती रानी महेश्वरी एवम् लाफ एंड लर्न प्रीस्कूल की फाउंडर श्रीमती ज्योति उज्जवल उपस्थित थी।राजेंद्र परिहार जी ने शिवम नाट्यालय की इस पहल को सराहा और उम्मीद जताई कि आने वाले समय में जोधपुर राजस्थान में भरतनाट्यम के लिए जाना जाएगा। रानी महेश्वरी जी ने कहा की किसी ख्याति प्राप्त संस्था से अरंगेतरम करना मायने रखता है। यह डिग्री देश में ही नहीं विदेशों में भी महत्वपूर्ण है। विदेश जाकर पढ़ाई करने में, वीजा मिलने में, व टॉप यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने में बहुत सहायक होती है। बालिकाएं अपने पैरों पर खड़ी होती हैं। राज उपभोक्ता आयोग के सदस्य श्री लियाकत अली जी ने भी भारतीय संस्कृति की इस धरोहर को बचाए रखने और इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए संस्था की सराहना की। शिष्या के पैरेंट्स ने सभी अतिथियों का स्वागत एवं आभार प्रकट कर गुरु को सम्मान देते हुए धन्यवाद दिया। इस कार्यक्रम में मंच संचालन संस्थान की सीनयर छात्राएं आदित्रि व्यास एवं अक्षरा शर्मा द्वारा किया गया।

Show More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button