भारत की बलिदानी परम्परा से ही सनातन संस्कृति अमिट : शेखावत

– दीनवा में शहीद राहुल जांगिड़ की प्रतिमा के अनावरण समारोह में शामिल हुए केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री

झुंझुंनू। केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत मंगलवार को दीनवा गांव में आयोजित शहीद राहुल जांगिड़ की प्रतिमा के अनावरण समारोह में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि देश की बलिदानी परम्परा से ही हमारी सनातन संस्कृति अब तक अमिट है और आगे भी रहेगी, वरना दुनिया की कई संस्कृतियां समय के साथ धूल धूसरित होती चली गईं।

शेखावत ने कहा कि देश की सीमा मां की तरह पवित्र होती है, जिस प्रकार हम मां की रक्षा हम करते हैं, वही जज्बा देश की रक्षा के लिए रखना होता है। शहीद राहुल जांगिड़ के माता-पिता का अभिनंदन करते हुए शेखावत ने कहा कि यह उनके दिए संस्कारों का परिणाम था कि राहुल में देश सेवा की भावना उत्पन्न हुई, अन्यथा जिस बीस वर्ष से भी कम उम्र में वे शहीद हुए, वह उम्र खेलने-कूदने की होती है। राहुल ने इस उम्र में हंसते-हंसते देश के लिए अपने आप को कुर्बान कर दिया। शहीद राहुल हम सब के लिए प्रेरणास्त्रोत है। 

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि इस देश की आजादी में हजारों लोगों ने अपना सर्वस्व समर्पण किया है। निश्चित रूप से हम सब के लिए वे सम्मान के पात्र हैं। उनके बलिदान से हम प्रेरणा ले सकते हैं।

सनातन संस्कृति को बनाए रखने के लिए गांव, गोरी, गोमती, गंगा और गोमाता की रक्षा की सुदीर्घ परम्परा रही है। हमारा पुराना इतिहास हम देख सकते हैं, जहां अनेक माताओं ने अपने बच्चों को इन मानदंडों की रक्षा के लिए कुर्बान कर दिया। 

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि शेखावाटी की धरती पर राव शेखाजी ने सामाजिक समरसता का भाव स्थापित किया। नारी की लज्जा की रक्षा के लिए अपने आप को और अपनी तीन पीढ़ियों को कुर्बान किया। इतिहासकार कर्नल टॉड ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि राजस्थान में इतने शहीद हैं कि हर गांव में शहीद स्मारक बनाया जा सकता है। राजस्थान के गांवों में ऐसे लोग भी है, जिन्होंने अपने पुरुषार्थ से गांव-गांव में पहचान बनाई। उनकी पहचान राजस्थानी गीतों में आज भी जीवंत है। 

शेखावत ने कहा कि आजादी की लड़ाई के समय में इस देश के लाखों लोगों ने अपना बलिदान दिया। इस बलिदानी परम्परा के चलते ही हमारी यह सनातन संस्कृति हमेशा के लिए अक्षुण्ण रही।  अन्यथा दुनिया में कई संस्कृतियां उत्पन्न हुई और समय के साथ समाप्त होती चली गई, लेकिन बलिदान की इस परम्परा ने भारत में सनातन संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखा है। देश का इतिहास हम सब के लिए मात्र प्वाइंट ऑफ रेफरेंस नहीं है, बल्कि प्रेरणा का स्त्रोत है।

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