भूलों की क्षमा माँगना ही पर्युषण का मूल मंत्र: राष्ट्र-संत श्री चन्द्रप्रभ

संबोधि धाम में सकल समाज एक साथ मनाएगा संवत्सरी महापर्व

जोधपुर। राष्ट्र-संत श्री चन्द्रप्रभ जी ने कहा कि तीर्थंकरों का महान चरित्र केवल सुनने के लिए नहीं है, अपितु स्वयं का चरित्र बनाने के लिए हम महापुरूषों के चरित्र का श्रवण करते हैं। अगर हमें भगवान को पाना है, तो खुद को राजुल, चंदनबाला और मीरा बनाना पड़ेगा। हमारा हृदय अगर राजुल और मीरा जैसा है तो भगवान हमारे पास में और हमारी हर सांस में है। हम खुद को चंदनबाला बनाएँ, महावीर अपने आप मिल जाएँगे।


कायलाना रोड स्थित संबोधि धाम में राष्ट्र-संत श्री चन्द्रप्रभ पर्युषण पर्व प्रवचनमाला में ‘कल्पसूत्र में तीर्थंकरों की जीवन यात्रा के संदेश’ विषय पर श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर का जीवन हमें उत्कृष्ट तप त्याग के साथ जीना सिखाता है। भगवान पार्श्वनाथ का जीवन मन में समता धारण करने की प्रेरणा देता है। भगवान नेमीनाथ का जीवन हमें दया और करुणा से ओतप्रोत होने की शिक्षा देता है। भगवान आदिनाथ हमें कर्मयोग और ज्ञान योग को अपनाने के लिए उत्साहित करते हैं। तीर्थंकरों का उद्देश्य है: वे स्वयं तो तिरे ही, दूसरे लोगों को भी पार लगने का रास्ता मिलें।
संतप्रवर ने कहा कि हमारे महान आचार्यों ने शासन का गौरव बढ़ाया है। लाखों लोगों को उन्होंने अहिंसक और व्यसनमुक्त जीवन जीने का रास्ता दिखाया है। जिनका आचार मानव समाज के लिए आदर्श होता है, संसार में वे ही आचार्य कहलाते हैं। आचार्यों का जीवन हमें सिखाता है कि तुम सूरज भले ही न बन पाओ, पर दीपक बनकर तो अपने आसपास का अंधेरा अवश्य दूर कर सकते हो।
उन्होंने कहा कि हमें पर्युषण पर्व की आराधना करते हुए इसके अंतिम चरण में स्वयं के द्वारा जाने अनजाने में हुई भूलों के लिए क्षमा अवश्य माँग लेनी चाहिए। घर कितना भी साफ हो, धूल तो जम ही जाती है और इंसान कितना भी अच्छा हो, भूल तो हो ही जाती है। क्षमा यज्ञ है, धर्म है, शांति है, समाधान है। मन में गाँठ बांध कर रखने की बजाय हमें क्षमा माँगकर और क्षमा देकर वैर-विरोध की गाँठों को खोल लेना चाहिए। क्षमा ही पर्युषण पर्व का सार है।
उन्होंने कहा कि पर्युषण के अंतिम दिन संवत्सरी को हमें जहां उपवास करके अपने शरीर और इन्द्रियों की शुद्धि करनी चाहिए, वहीं प्रतिक्रमण करके अपने दोषों के लिए क्षमा प्रार्थना कर लेनी चाहिए। आंतरिक शुद्धि ही पर्युषण का पावन संदेश है।
संबोधि धाम के अध्यक्ष सुखराज मेहता ने बताया कि 31 अगस्त को संबोधि धाम में संवत्सरी पर्व की सामूहिक आराधना होगी। सुबह 9 बजे संवत्सरी की आलोयणा एवं पवित्र धर्मशास्त्र कल्पसूत्र का पारायण होगा और शाम को 4.30 बजे बड़ा प्रतिक्रमण होगा। 1 सितम्बर को प्रातः 8.30 बजे सभी तप आराधकों का पारणा होगा। 

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