रोके गए वेतन एवं समर्पण अवकाश वेतन के भुगतान पर रोक हटाई जाए: गहलोत
सिरोहीजयन्तिलाल दाणा)। राजस्थान शिक्षक संघ प्रगतिशील के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष धर्मेन्द्र गहलोत ने राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एवं शिक्षा मंत्री गोविन्दसिंह डोटासरा को ज्ञापन भेजकर मार्च 2020 के 15 दिन के रोके गये वेतन का भुगतान करवाने एवं समर्पण अवकाश वेतन के भुगतान से 15 मार्च 2021 से पूर्व रोक हटाकर 31 मार्च 2021 तक भुगतान करवाने की राज्य सरकार से मांग की। संघ के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष धर्मेन्द्र गहलोत ने ज्ञापन में बताया कि कोविड-19 से प्रभावित राज्य की अर्थ व्यवस्था पूर्ण रूप से पटरी पर आ चुकी हैं। राजस्थान के कर्मचारियों शिक्षकों ने पुरी निष्ठा से कार्य करते हुए कोरोना महामारी का मुकाबला कर उसे बिना वेक्सीन के काबु में लाकर देश भर में राज्य की गहलोत सरकार की गौरवशाली साख को बरकरार रखा हैं जिसका हर चुनाव में आमजन के रूझान से परिणाम को देखा जा सकता हैं। राज्य कर्मचारी परिवारों ने तन मन धन तीनों से सेवा देने में कोई कसर नहीं रखी। जन कल्याणकारी सरकार में राज्य कर्मचारी अपने आप को सुरक्षित और सदैव सुखी महसुस करता आया हैं। लेकिन मुख्यमंत्री का ध्यान संगठन इस ओर आकृष्ठ करना चाहता हैं कि जब परिस्थितियॉ अब पुरी तरह से सामान्य हैं, बिना वेक्सीन के ही नियन्त्रण में हैं, अर्थ व्यवस्था पटरी पर हैं तो राज्य कर्मियों का मार्च 2020 के 15 दिन का रोका वेतन क्यों नहीं दिया जा रहा हैं? कार्मिकों के समर्पण अवकाश वेतन के भुगतान पर से रोक हटाने में अब अनावश्यक विलम्ब क्यों किया जा रहा हैं? आखिर सरकार के सबसे बडे और सबसे महत्वपूर्ण अमले को आर्थिक रूप से नुकसान उठाने को मजबुर कर उनके मन में शासन के प्रति विरोधाभास पैदा करना कहॉ तक उचित हैं यह अत्यन्त गम्भीरता से विचार कर जिन कर्मचारियों के उपार्जित अवकाश 300 सेवा पुस्तिका में दर्ज हैं उनके 15 लीव का एनकेशमेंट नहीं होने से वो लेप्स होने से उनके अधिकार की हजारों की राशि का उन्हें नुकसान उठाना पडेगा जिस पर उन कार्मिक परिवारों का सरकार की सोच पर नकारात्मक दृष्टिकोण पनपना आने वाले समय में हितकारी नहीं हो सकता। राज्य की जन कल्याणकारी सरकार ने जिन कार्मिकों के बलबुते एक विश्व व्यापी महामारी पर बिना वेक्सीन नियन्त्रण में कामयाबी हासिल की उन कार्मिकों को आर्थिक नुकसान देकर अपने अस्तित्व पर अनावश्यक प्रश्न चिन्ह खडा करने का विरोधियों के लिये अवसर पैदा करे संगठन को इसी बात की पीडा हो रही हैं। संगठन ने राज्य सरकार से पुरजोर शब्दों में मांग की हैं कि विधान सभा के बजट सत्र में उक्त दोनो मांगों पर गम्भीरतापुर्वक विचार कर कर्मचारी हित में निर्णय किया जाए।