कहीं खो गई हैं किताबों की दुनिया
- पढ़ते रहना चाहिए किताबें, पढऩे से होते हैं फायदे
- बिंदु टाक
एक समय था जब लोग रेल से सफर करते हुए कुछ ना कुछ पढ़ा करते थे। इसके अलावा लाइब्रेरी में बहुत अच्छी खासी भीड़ रहा करती थी। अब कुछ हालात बदल से गए हैं। जि़ंदगी अब बहुत तेज़ है और जीने के तरीके वर्चुअल और रिश्ते सिर्फ नाम के मोबाइल स्क्रीन से चिपके हुए। अपनों के पास अपनों के लिए समय की कमी हैं। छोटे से छोटा बच्चा और बड़े बुजुर्ग हम देखेंगे कि काफी संख्या में मोबाइल में कुछ ना कुछ देखते हुए नजर आएंगे। अब समय का अभाव सा हो गया है, जाने कहां वह बचपन खो गया है और किताबों से जुड़े रहने का सिलसिला भी।
किताबें पढऩे से फायदे
किताबें पढऩे का एक अपना अलग ही फायदा होता हैं। जरूरी नहीं कि हम कोर्स की किताबें ही पढ़ें। इसके अलावा शिक्षण, नॉनफिक्शन, मैगजीन, न्यूज़पेपर को पढ़ सकते हैं और हमारी जिंदगी को तरीके से जी सकते हैं। आपकी मुस्कुराहट आपके लिए गुडविल का काम करती है। निराशा किसी भी समस्या का हल नहीं है, सो कीप स्माइल ऑलवेज विद गुड बुक्स।
जिज्ञासा बढ़ती है
किताब पढऩे के साथ एक खास बात होती है कि आपको और पढऩे का दिल करता है। किताबों से नई-नई चीजें जानने को मिलती हैं। ऐसे में हमारे मन में नई जिज्ञासा की उत्पत्ति होती है और आप अधिक पढ़ते हैं। इससे निजी और प्रोफेशनल लाइफ दोनों में फायदा होता है।
कल्पना करने की क्षमता बढ़ती है
जब हम कोई बुक रीड करते हैं तो हमारे दिमाग में एक कल्पना बनती हैं। ऐसे में आपका दिमाग जो है वह क्रिएटिव होता जाता हैं। वहीं सोचने और समझने की शक्ति उत्पन्न होती हैं। वहीं पढऩे से आपको लगातार नए किस्म के विचारों से मुलाकात होती है। आपके विचारों में विविधता और परिपक्वता आती है।
कम्युनिकेशन बेहतर होता है
किताबें पढऩे से सिर्फ ज्ञान ही नहीं बढ़ता है बल्कि बोलने और लिखने की क्षमता में बढ़ोतरी होती हैं। ऐसे में नॉवल्स या साहित्य पढऩा बेहतर होता हैं। इससे हमारी शब्दावली भी अच्छी हो जाती है। जब भी हम किसी प्रकार का कम्युनिकेशन का कोर्स करेंगे तो सबसे पहले हमें यही कहा जाएगा कि कम्युनिकेशन की कुछ बुक्स रीड करो।
याददाश्त बढ़ती है
जब आप किताब पढ़ते हो तो अपने बचपन की यादों को अपने आसपास घटित हुए घटना से जोडऩे की कोशिश करती हैं। ऐसे में हम इसे अपनी पुरानी बातों को याद करने का एक नया तरीका कह सकते हैं। इसके साथ ही साथ जब हम चर्चा करते हैं तो हमें हमारी बहुत पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। वह बचपन जो हम बहुत पीछे छोड़ आए, एक बार फिर किताबों के जरिए पुरानी और मीठी याद्दाश्त बनकर हमारे सामने आ जाता हैं।
किताबी सुकून देती है
इस कोरोनाकाल में जहाँ लगता है कि हमारी जिंदगी थम सी गई है तो क्या हम जीना छोड़ दें? नहीं, किताबें एक ऐसा जरिया है जो हमें टेंशन फ्री कर सकती है। किताबों में लेखक एक दुनिया बनाता है, जब हम उसे पढ़ते हैं तो हम उसमें खो जाते हैं। किताबों को पढऩे का अपना एक नया ही अंदाज है। किताब इसलिए सोने से पहले किताब पढऩा एक सुकून का अहसास कराती है।अगर हमें खुश रहना है तो जीवन में होने वाले बदलाव को सहजता से अपनाने चाहिए चाहे कितनी भी परेशानियों से होकर गुजरना पड़े। सो कीप रीडिंग कीप ग्रोइंग, रीडर्स ऑलवेज लीडर्स।
बस इक ही चाहत हैं मेरी कि
हो जाऊँ मैं इक दिलचस्प कि़ताब
लफ्ज़ दर लफ्ज़ रखा जाए मुझमें
बेहद करीने से और ध्यान से
पढ़े मुझे हर कोई बड़े दिल और इत्मिनान से।