संबोधि धाम में पावर योग वर्कशॉप का आयोजन
जोधपुर। डॉ. मुनि शांतिप्रिय सागर महाराज ने कहा कि हमारी सबसे बड़ी शक्ति है विचारों की शक्ति। विचारों द्वारा हम खुद का सृजन भी कर सकते हैं और विध्वंस भी। जैसे हथौड़े से शिल्पकार किसी मूर्ति का निर्माण कर देता है वहीं डाकू किसी को मार देता है। ठीक वैसे ही विचार बहते पानी की तरह है अगर वे गंगा में मिलेंगे तो गंगाजल बन जाएंगे और नाले में मिलेंगे तो गंदा जल। जैसे बगीचे की समय-समय पर कटाई छटाई की जाए तो वह सुंदर दिखाई देता है वैसे ही हमें भी समय-समय पर अपने विचारों की सफाई करते रहना चाहिए। हमारे दिमाग में काम के विचार कम चलते हैं और फालतू विचार ज्यादा। अगर हम फालतू विचारों को हटाकर सही विचारों को सही दिशा में सही लक्ष्य के लिए उपयोग करना शुरू कर दें तो हमारा जीवन वरदान बन सकता है।
मुनि कायलाना रोड स्थित संबोधि धाम में आयोजित संबोधि पावर योग वर्कशॉप के दौरान साधक भाई बहनों को संबोधित कर रहे थे उन्होंने कहा कि हमारे जीवन में कोई समस्या है तो हम चिंतन करें, चिंता भी करें तो चलेगा, पर याद रखें चिंता उतनी ही करें कि काम हो जाए उतनी भी न करें कि जीवन ही तमाम हो जाए। अपने विचारों का समय समय पर मूल्यांकन करते रहें, विचारों को सृजनात्मक दिशा दें और जीवन की तरक्की सुनिश्चित करें। जीवन बहुत ही छोटा और कीमती है इसे तकरार में लगाने की बजाय स्वयं की और औरों की तरक्की में लगाएं। मुझे खुशी है कि औरों से ज्यादा पाया मैंने, पर उससे भी ज्यादा खुशी है कि किसी का दिल दुखाया नहीं मैंने। अगर हमारे विचार सुंदर और सकारात्मक बन जाएं तो हम भी सदा खुश रहेंगे और अपनी ओर से दूसरों को भी खुशियां बांटने में सफल हो जाएंगे। इससे पूर्व मुनि प्रवर ने साधकों को बॉडी एंड माइंड रिलैक्सेशन के लिए संबोधि पावर योग के 11 चरणों का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने अ सि आ उ सा बीज मंत्र ध्यान का विशेष प्रयोग भी करवाया। मंच संचालन विफा सराफ और आभार योगिता ने दिया।