आफरी में ऑनलाइन हुई शोध परामर्शी समूह की बैठक
सेवा भारती समाचार
जोधपुर। राजस्थान एवं गुजरात के शुष्क क्षेत्रों में कृषि वानिकी सर्वाधिक महत्वपूर्ण है तथा इस क्षेत्र हेतु विशेष मॉडल किसानों के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकते है, यह उद्गार एमजीएस विश्वविद्यालय बीकानेर के पूर्व उप कुलपति प्रो. जीआर जाखड ने शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (आफरी) जोधपुर में वेबिनार द्वारा आयोजित शोध परामर्श समूह की बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए। प्रोफेसर जाखड ने शोध कार्यक्रमों को क्षेत्रानुरूप बनाने एवं किसानों तथा आमजन के अनुरूप बनाने की महत्ता प्रतिपादित की। कार्यक्रम के प्रारम्भ में आफरी निदेशक एमआर बालोच ने वेबिनार में अतिथियों का स्वागत करते हुए वर्तमान में शोध परामर्शी समूह की बैठक के लिए परियोजना बनाने हेतु नए नियमों के बारे में बताया। उन्होंने राष्ट्रीय वन पालिसी 2020-2030 के बारे में भी जानकारी देते हुए शोध कार्यक्रमों को प्रयोगशाला से किसानों के खेत तक पहुंचाने हेतु विशेष प्रयास करने की जरूरत बताई। कार्यक्रम के विशिष्ठ अतिथि गुजरात के पूर्व अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक आरएल मीणा ने राजस्थान एवं गुजरात में वन विभाग के साथ मिलकर अधिकाधिक शोध परियोजनाएं बनाने का आह्वान किया। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् देहरादून से अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. विमल कोटियाल ने अपने विचार व्यक्त किए। आफरी के समूह समन्वयक (शोध) डॉ. जी. सिंह ने शोध परामर्शी समूह की कार्यप्रणाली एवं आफरी की शोध परियोजनाओं के बारे में बताया। तकनीकी सत्र में 5 नई परियोजनाएं प्रस्तुत की गई तथा वर्तमान में चल रही 10 परियोजनओं की समीक्षा की गई। कार्यक्रम में प्रस्तुत नवीन परियोजनाओं को विभिन्न विशेषज्ञों के सुझाव के पश्चात् देहरादून स्थित भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् को आरपीसी बैठक में भेजा जाएगा तथा फिर इन्हें वित्त पोषण हेतु स्वीकृत किया जाएगा। इनमें से कुछ परियोजनाएं राजस्थान, गुजरात एवं अन्य विभागों में वित्त पोषण हेतु भेजी जाएगी। कार्यक्रम का संचालन एवं सूचना प्रौद्योगिकी व्यवस्था डॉ. तरूण कान्त एवं शिवानी भटनागर ने की तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. जी. सिंह ने किया।