विचार और आचार को निर्मल करता है सत्संग : चन्द्रप्रभ

Gulam Mohammed, Editor, Seva Bharati News

जोधपुर। राष्ट्र-संत श्री चन्द्रप्रभ महाराज ने कहा कि सत्संग हमारे विचार और आचार दोनों को ही निर्मल करता है। व्यक्ति के अज्ञान के अंधरे को मिटाकर जीवन में ज्ञान की ज्योति जलाता है और एक डाकू के मन को भी साधू मन बना सकता है। हमारा जीवन पानी की बूंद की तरह है अगर पानी की बूंद को साँप का सान्निध्य मिलता है तो जहर बन जाती है और वही पानी की बूंद सीप की सोहबत पाने में सफल हो जाए तो सच्चा मोती बन जाती है।

वे यहाँ गाँधी मैदान में 57 दिवसीय प्रवचन माला के समापन समारोह में श्रद्धालुओं को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह सत्संग माला जन-जन के लिए कल्याणकारी बनी, युवाओं में नई ऊर्जा का संचार हुआ। लोगों ने व्यसनों का त्याग किया और स्वस्थ जीवन का मालिक बनने के लिए नये आहार शुद्धि के प्रति लोगों की सजगता बढ़ी। पारिवारिक प्रेम और मिठास घोलने में यह प्रवचन माला वरदान स्वरूप बनी। पारिवारिक रिश्तों में आई दूरिया कम हुई और लोगों ने घर को स्वर्ग बनाने की कला सीखी। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को अपना वक्तव्य देते हुए सुखराज मेहता, के.एन. भण्डारी, औंकार वर्मा, नीलम मेहता, संदीप मेहता, गौतम बाफना, देवेन्द्र गेलड़ा, उषा जैन, चन्द्रा मेहता, प्रवीण पारख आदि ने अपने विचार रखते हुए इस सत्संग माला को जोधपुर शहर के लिए वरदान बताया।

इस अवसर पर चातुर्मास में विशिष्ट सेवाओं के लिए संबोधि धाम ट्रस्ट द्वारा सेवाभावी सदस्यों का सम्मान किया गया। इससे पूर्व संत चन्द्रप्रभ ने सभी श्रद्धालुओं को संवत्सरी पर्व की आलोयणा सम्पन्न कराई। श्रद्धालु जनों ने सजल नैनों के साथ अपने वर्ष भर के क्रिया-कलापों के लिए क्षमापना एवं प्रायश्चित का भाव समर्पित किया। समारोह में अनेक तपस्वीयों के सम्मान के साथ 51 उपवास के तपस्वी रजत चौपड़ा का संबोधि धाम ट्रस्ट द्वारा सम्मान किया गया।

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