चुनाव के मद्देनज़र मुद्रण-प्रकाशन पर नियंत्रण से संबंधित आवश्यक निर्देश जारी

जिला मजिस्ट्रेट हिमांशु गुप्ता ने जारी किए निर्देश

जोधपुर। जिला कलक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट जोधपुर (ग्रामीण) हिमांशु गुप्ता ने विधानसभा आम चुनाव 2023 के अंतर्गत विभिन्न राजनैतिक दलों, अभ्यर्थियों, उनके समर्थकों / कार्यकर्ताओं, व्यक्तियों, संगठनों, संस्थाओं द्वारा ऐसे पेम्पलेट, पोस्टर, विज्ञापन, हैंडबिल आदि के मुद्रण पर नियंत्रण के संबंध में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 127-क के प्रावधान के तहत निर्देश जारी किये है।

पेम्पलेटां, पोस्टरों इत्यादि के मुद्रण पर नियंत्रणः-

जिला कलक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री हिमांशु गुप्ता ने बताया कि कोई भी व्यक्ति किसी ऐसे निर्वाचन पेम्पलेट या पोस्टरों को प्रकाशित या मुद्रित नहीं करेगा या मुद्रित या प्रकाशित नहीं करायेगा, जिसके मुख पर उसके मुद्रक और प्रकाशक का नाम और पता न दिया हो। कोई भी व्यक्ति किसी निर्वाचक पेम्पलेट या पोस्टर का मुद्रण तब तक नहीं करेगा या नहीं करवायेगा जब तक कि उसके प्रकाशक के पहचान की घोषणा उसके द्वारा हस्ताक्षरित और दो व्यक्तियों द्वारा जिनको वह व्यक्तिगत रूप से जानता हो, सत्यापित कर दो प्रतियों में उसके द्वारा मुद्रक को नहीं दे दी जाती और जब तक कि दस्तावेज के मुद्रण के पश्चात् युक्तिसंगत समय के भीतर घोषणा की एक प्रति दस्तावेज की एक प्रति के साथ, मुद्रक द्वारा जहाँ वह मुद्रित हुआ हो, उस राज्य की राजधानी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को और तथा किसी अन्य मामले में, उस जिले के जिला मजिस्ट्रेट को, जहाँ वह मुद्रित किया गया हो, भेज न दिया जाये।

उन्होने बताया कि धारा के प्रयोजनों के लिये किसी दस्तावेज की प्रतियों की संख्या को बढ़ाने के लिये हाथ द्वारा नकल करने को छोड़कर कोई भी प्रक्रिया को मुद्रक समझा जायेगा और मुद्रक पद का तद्नुसार अर्थ लगाया जायेगा और निर्वाचन पेम्पलेट या पोस्टर का तात्पर्य किसी मुद्रित पेम्पलेट, हैंड बिल या अन्य दस्तावेज से है, जो किसी अभ्यर्थी या अभ्यर्थियों के समूह के निर्वाचन को प्रोत्साहित करने या पक्षपात / प्रतिकूल करने के लिये वितरित किया जाये या किसी इश्तिहार या पोस्टर से है, जिसमें किसी निर्वाचन का कोई संदर्भ हो, किन्तु उसमें ऐसा कोई हैंडबिल, इश्तिहार या पोस्टर सम्मिलित न होगा, जिसमें कि किसी निर्वाचन सभा की तिथि, समय, स्थान और अन्य का विवरण या निर्वाचन अभिकर्ताओं या कार्यकर्ताओं को सामान्य अनुदेश घोषित किये गये हो। 

उन्होंने बताया कि कोई व्यक्ति, जो उपधारा (1) या (2) के प्रावधानों का उल्लंघन करता है. कारावास से, जिसको 6 माह तक बढ़ाया जा सकता है या जुर्माने से, जिसे दो हजार रुपये तक बढ़ाया जा सकता है या दोनों सहित दण्डनीय होगा।

उन्होंने बताया कि इन कानूनी प्रावधानों की कड़ाई से पालना कराने के प्रयोजन से भारत निर्वाचन आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 324 के अधीन प्रदत्त शक्तियों का एवं इस निमित्त उसे सक्षमता प्रदान करने वाली समस्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उपधारा 127 क के प्रावधानों एवं एवं आयोग के इन आदेशों की पालना में  धारा 127 क के प्रावधानों की अपेक्षानुसार यह सुनिश्चित किया जाये कि उनके द्वारा मुद्रित प्रत्येक निर्वाचन पेम्पलेट पोस्टर या ऐसी अन्य सामग्री पर मुद्रकीय हाशियों में उत्तके मुद्रक एवं प्रकाशकों के नाम एवं पते स्पष्ट रूप से अंकित किये जाये, किसी भी निर्वाचन पैम्पलेट, पोस्टर इत्यादि के मुद्रण के कार्य को लेने से पूर्व धारा 127-क (2) की शर्तों के अनुसार निर्वाचन आयोग के इस आदेश (दिनांक 02.09.1994) में दिये गये परिशिष्ट-क में विहित प्रपत्र में प्रकाशक से घोषणा प्राप्त की जाए। यह घोषणा पत्र प्रकाशक द्वारा विधिवत हस्ताक्षरित होगा और ऐसे दो व्यक्तियों द्वारा सत्यापित किया जायेगा जो प्रकाशक को व्यक्तिगत रूप से जानते हो, धारा 127-क (2) के अधीन अपेक्षित प्रकाशक द्वारा प्राप्त की गई परिशिष्ट-क में घोषणा और मुद्रित सामग्री की 4 प्रतियों, उसके मुद्रित किये जाने के 3 दिनों के भीतर जिला मजिस्ट्रेट को प्रेषित की जायेगी। इस परिशिष्ट-क में विहित प्रपत्र में की गई घोषणा को जिला मजिस्ट्रेट को अग्रेषित करते समय संबंधित द्वारा प्रेषित की जायेगी तथा इस मुद्रित सामग्री की 4 प्रतियाँ एवं परिशिष्ट-क में निर्धारित घोषणा पत्र के साथ निर्वाचन आयोग के उक्त आदेश दिनांक 02.09.1994 में बताये गये परिशिष्ट-ख में विहित प्रपत्र में मुद्रित दस्तावेजों की प्रतियों की संख्या और ऐसे कार्य के लिये कीमत से संबंधित सूचना भी जिला मजिस्ट्रेट को निर्धारित तिथि के भीतर प्रस्तुत की जायेगी। मुद्रित प्रत्येक निर्वाचन पेम्पलेट, पोस्टर, हैंड बिल, प्लेकार्ड, विज्ञापन आदि के संबंध में उपरोक्त वर्णित सूचना (परिशिष्ट-क. परिशिष्ट-ख एवं मुद्रित सामग्री की 4 प्रतियाँ) प्रत्येक ऐसे दस्तावेज के मुद्रण के तीन दिनों के भीतर सामूहिक रूप से नहीं बल्कि अलग-अलग रूप से जिला मजिस्ट्रेट को प्रेषित करने होंगे। 

इस बारे में जारी आदेश में बताया गया है कि इस धारा 127 क के किन्हीं भी प्रावधानों और भारत निर्वाचन आयोग के उपरोक्त आदेश में दिये गये निर्देशों का किसी भी प्रकार से उल्लंघन / अतिक्रमण किये जाने पर कड़ी कानूनी कार्यवाही की जायेगी, जिसमें सुसंगत नियमों के अधीन मुद्रणालयों के अनुज्ञापत्र को समाप्त किये जाने की कार्यवाही भी शामिल है। 

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